Thursday, March 8, 2012

भारत की भौतिक उन्नति का मार्ग (वैदिक भाषा संस्कृत)


भारत के सामने हमारे पूर्व राष्ष्ट्रपति श्री. अब्दुल कलाम ने 2020 तक विश्व की आर्थिक एवं सामरिक महाशक्ति बनने का लक्ष्य रखा है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने की क्षमता केवल आनेवाली पीढ़ी में है ऐसा मानकर वे बाल एवं युवकों को श्शिक्षा संस्थानों में जाकर प्रोत्साहित कर रहे हैं। किन्तु इस तरूणाई को सामुहिक रीति से किस मार्ग पर आगे बढ़ना चाहिए इस विष्षय में पर्याप्त मार्गदर्शन नहीं कर पा रहे हैं। शासन में बैठा राजकीय दल या विपक्ष दोनों केवल आनेवाले चुनाव तक की सोच रखते हैं। तात्कालिक सोच के श्शिकार नौकरशाह केवल अपने कार्यकाल को चमकाने और उस आधार पर उँचा पद प्राप्त करने के जुगाड में लगे रहते हैं। यही कारण है कि लगभग दो लाख किसानों द्वारा आत्महत्या करने पर भी देश के नीति निर्धारकों एवं योजनाओं को क्रियान्वित करने वाले तन्त्रा की नींद टूटी नहीं है। ऐसे में समाज के सभी घटकों को इस लक्ष्य की प्राप्ति हेतु मार्ग निर्धारण के लिए आगे आना चाहिए।

विकसित देशों की कहानी-

विश्व के वर्तमान परिदृश्य पर दृष्टि डालें तो विश्व के 204 देशों को सामान्यतः तीन श्रेणियों में
विभाजित किया गया है। प्रथम श्रेणी का नाम है ‘ विकसित ’ दूसरी का ‘ विकसनशील ’ एवं तीसरी का ‘
अविकसित ’ रखा गया है। भारत विकसनशील देशों की श्रेणी में आता है। विकसित देशों की श्रेणी के अन्तर्गत
एक छोटा गट बना है, जिसका नाम है G8। ये आठ देश सर्वाधिक प्रगत देश माने जाते है। इनके नाम है-
अमेरिका, कैनडा, ब्रिटेन, फ्रान्स, जर्मनी, इटली, रशिया और जापान। इन देशों ने विज्ञान और तन्त्राज्ञान के आधार पर प्रगति की है। ये देश विश्व की मण्डी में नये-नये उत्पाद या तकनीक को बेचकर धनार्जन करते हैं।
उदाहरण के लिए
1. अमेरिका में सगणक का निर्माण हुआ। उसे चलाने के लिए मॅक्रोसॉफ्ट ने विन्डोज नामका सॉफ्टवेयर विकसित किया। तत्पश्चात् अन्तरताने (इन्टरनेट) का अविष्कार किया। इन तीनों उत्पादों को विश्व में सभी देशो को बेचकर अमेरिका ने अत्यधिक पैसा कमाया।
2. जापान ने इलेक्ट्रॉनिक्स और वाहनों के स्तरीय उत्पादों से विश्व के बाजार भर दिये। आज भी ‘सोनी’ ‘टोयोटा’ जैसे ब्रॅण्ड पूरे विश्व में अपनी धाक जमाये हुए हैं।
3. रशिया भारत को दीर्घकालसे शस्त्रों की आपूर्ति करता रहा है। चाहे पनडुब्बी हो या विमान वाहक जलपोल, हम रशिया पर निर्भर हैं।
उपर्युक्त परिपेक्ष में यदि हम भारत का विचार करें तो प्रश्न उठता है कि हमने किन उत्पादों को बेचकर पैसा कमाया। स्वतन्त्राता के पश्चात् हमने विज्ञान और गणित को मैट्रिक तक अनिवार्य विषय बनाया। इन दोनों विषयों की भाषा अंग्रजी है ऐसा मान कर उसे अनिवार्य विषय के रूप में स्थापित किया। आज भारत के १०% लोग अंग्रजी जानते हैं। हमने पर्याप्त मात्रा में तन्त्राज्ञ निर्माण किये हैं। किन्तु वैज्ञानिक कम ही उत्पन्न
कर पाये। इतनी पूर्वसिद्धता के पश्चात् भी हम ऐसी कोई वस्तु निर्माण नहीं कर पाये जिसे बेचने से हम धनवान बन सकें। न हम विज्ञान के क्षेत्रा में कोई मौलिक संशोधन कर पाये। हर वर्ष विज्ञान की विविध शाखाओं में नोबेल पुरस्कार वितरित किये जाते हैं। स्वतन्त्राता प्राप्ति के पश्चात् किसी भारतीय नागरिक को विज्ञान का नोबेल पुरस्कार प्राप्त नहीं हुआ। हम केवल पश्चिम की नकल उतारते हैं। किसी नकलची को परीक्षा में किसी ने प्रथम स्थान प्राप्त करते हुए देखा है? जो मूल पश्चिम का ज्ञान है उसमें उनका अग्रणी बने रहना स्वाभाविक है। हमें उनके ज्ञान के आधार पर अग्रणी बनने के सपने को छोड़ देना चाहिए। क्या हमारे पास अपना भी कुछ है?

भारतीय विज्ञान-
अंग्रेजों का भारत में पदार्पण होने के पूर्व भारत के विश्विद्यालयों में कुल 62 विषयों की पढ़ाई होती थी। शिक्षा की भाषा संस्कृत होने के कारण इन विषयों के ग्रन्थ संस्कृत भाषा में लिखे जाते थे। संस्कृत भाषा को आत्मसात करने पर हम इन ग्रन्थों को पढकर समझ सकेंगे। यदि हम ऐसा कर पायेंगे तो हमें विरासत में मिले ज्ञान भण्डार के द्वार खुल जायेंगे। जब हम भारतीय विज्ञान, अर्थशास्त्रा, विधिशास्त्रा की बात करते हैं तो लोग कहते हैं कि- ‘मान लिया कि भारत का ज्ञान क्षेत्रा पूर्व में विस्तृत था। किन्तु वर्तमान मे उसका क्या उपयोग?’ ऐसा कहने वालों के लिए कुछ उदाहरण प्रस्तुत कर रहा हूँ।

1. दिल्ली में आज की तिथि में पर्यटक अक्षरधाम देखने के लिए अधिक संख्या में पहुचते हैं। उसे बनाने के लिए 7 हजार शिल्पी 5 वर्ष तक काम करते रहे। उनमें आधुनिक शिक्षा प्राप्त कोई नहीं था। उन भवनों और मन्दिरों की आयु भी आधुनिक भवनों से अधिक है। सुन्दरता, भव्यता और विशालता में भी उनका कोई सानी नहीं हैं। उस निर्माण में लोहा, सीमेन्ट (वज्रचूर्ण) बालु और गिट्टी का उपयोग नहीं हुआ है। संगमरमर में पत्थरों से बने उस निर्माण में जोडने वाला तत्व (binding force) क्या है, यह जानने का विषय है। क्या हमारा यह परम्परागत भवन निर्माण शास्त्रा आज के स्थापत्य अभियन्ता (सिविल इंजीनियर) को सिखाना नहीं चाहिए?
2. भारत में आधुनिक विज्ञान एवं संस्कृत दोनों को जाननेवालों की संख्या अत्यन्त सीमित है। उनमें एक है डॉ.सी.एस.आर प्रभु। वें छंजपवदंस प्दवितउंजपबे में सहायक महाप्रबन्धक हैं। उन्होंने भास्कराचार्य द्वारा लिखित ‘ यन्त्रासर्वस्व ’ नामके ग्रन्थ का अú रहे ‘विमान शास्त्रा’ का अध्ययन प्रारम्भ किया और पाया की विमानों के निर्माण हेतु उपयोग किये जानेवाले धातुओं का विवरण कुछ श्लोकों में संग्रहित है। उन धातुओं के निर्माण के प्रयत्न के फलस्वरूप उन्होंने 5 नये मिश्रधातु बनाये जो वर्तमान विज्ञान जगत को ज्ञात नहीं हैं। उनमें से कुछ के यू.एस.पेटन्ट भी उन्हें प्राप्त हैं। उन मिश्र धातुओं में से एक का भार तो अल्युमीनियम से भी हल्का है। यदि उस मिश्र धातु से विमान बनाया जायेगा तो स्वाभाविक उसका भार कम रहेगा और गति अधिक।
3. नागपुर स्थित नीरी नामकी (NEERI-National Environmental Engineering Research Institute) केन्द्र सरकार की प्रयोगशाला पर्यावरण पर कार्य करती है। वहाँ के वैज्ञानिकों की एक टोली ने पानी की शुद्धता पर एक प्रकल्प हात में लिया। उस टोली में उन्होंने एक स्थानीय आयुर्वेदिक वैद्य को जोडा। उस वैद्य ने उन्हें 92 वी सदी के ‘चिन्तामणि’ नामके ग्रन्थ से 6 श्लोक निकालकर दिये जिनमें पानी के शुद्धीकरण के उपाय बताये हैं। एक श्लोक में लवंग के द्वारा पानी का शुद्धीकरण कैसे होगा इसका विवरण दिया है। उस विवरण पर काम करने के कारण उन वैज्ञानिकों की टोली ने एक रसायन बनाने मे सफलता प्राप्त की, जिसकी एक बूंद एक लीटर पानी को शुद्ध करती है।उस रसायन का यू.एस.पेटन्ट भी भारत सरकार के नामसे प्राप्त किया गया है।
 
अर्थव्यवस्था-
आर्थिक समृद्धि का कारक जैसे विज्ञान है वैसे ही दूसरा कारण है अर्थव्यवस्था। आज विश्व को केवल दो अर्थव्यवस्था की धाराओं की जानकारी है। 1. सामाजवादी अर्थव्यवस्था और 2. बाजारवादी अर्थव्यवस्था। अभी यह माना जाने लगा है कि साम्यवादी तत्वज्ञान आर्थिक समृद्धि लाने मे असफल रहा है। इसलिए साम्यवादी देश अब बाजारवाद की चपेट में आ गये है। भारत ने मिश्र अर्थव्यवस्था, समाजवादी अर्थव्यवस्था और बाजारवादी अर्थव्यवस्था को आजमाकर देखा है। बाजारवादी अर्थव्यवस्था ने हमारे देश को दो पाटों में बाँट दिया है। एक है- सम्पन्न एवं मध्यम वर्ग का जो बाजारवाद से लाभान्वित है और दूसरा निर्धनों का। अर्थव्यवस्था की सफलता का मापदण्ड तो यही हो सकता है कि उचित अर्थप्रबन्धन के कारणगरीबी कम हो। गरीबों की संख्या का सही आकलन करने के अबतक कई प्रयास भारत में हुए। उनमें अन्तिम प्रयास अर्जुन सेन गुप्ता एवं तेंडुलकर समिति का रहा। प्रधानमंत्री द्वारा नियुक्त इन समितियों की रपट ने बाजारवाद के समर्थकों को निराशा ही कियाकारण निर्धनता की व्याख्याओं को मनोनुकूल बनाकर भी गरीबों की संख्या कम नहीं आँकी गयी।

हमने अपनी अर्थव्यवस्था को शेष विश्व से जोड दिया है। किन्तु गरीबों की संख्या के आकलन के लिए निर्धारित वैश्विक मानदण्डों को हम नहीं मानते। फिर भी जनसंख्या के ३७.६% गरीब भारत में रहते हैं ऐसा सरकार मानती हैं। इन्हें २० रूपये या उससे कम की आय पर प्रतिदिन गुजारा करता पड़ता है। विश्व बैंक का  गरीबी का मापदण्ड देढ डॉलर है। यदि उस कसौटी पर भारत को कसा जायेगा तो भारत की ८० % जनसंख्या गरीबी रेखा के नीचे आ जायेगी। क्या इस संख्या के आधारपर भारत को समृद्ध देश कहा जा सकेगा? बाजारवाद के समर्थक यह कहते आये हैं कि यदि समाज का एक हिस्सा सम्पन्न होगा तो उसके कारण अन्य
भी लाभाविन्त होंगे। इसे ‘ट्रिकल डाऊन थेयरी’ कहा गया। हमारे देश मे बाजारवाद का प्रारम्भ 1990 में हुआ।
अब 20 वर्ष गुजर चुके हैं। ‘ट्रिकल डाऊन थेयरी कहीं कारगर होती दिखाई नहीं दे रही है।

इतिहासकालीन भारत-
इतिहास काल में भारत की समृद्धि का वर्णन सभी विदेशी यात्रिायों ने अपने-अपने यात्रााव‘तान्तों में किया है। इसीलिए भारत को सोने की चिड़िया कहा जाता था। यहाँ के समृद्धि के आकर्षण से ही भारत पर आक्रमणों का दौर निरन्तर चलता रहा। प्रारम्भ ग्रीकों ने किया। तत्पश्चात् हूण, शक, कुशाण,मुगल, तुर्क, पठाण, पोर्तुगीज, फ्रेंच एवं अन्त में अंग्रजों ने भारत की लूट जारी रखी।यदि हम निर्धन होते तो भला कोई क्यों हम पर आक्रमण करता? विकसित देशों का एक संगठन है व्म्ब्क्। उस सúठन ने ई.स. शून्य से ईस. 2000 वर्ष तक का आर्थिक इतिहास लिखकर जालपुटपर (ूमइेपजम) डाला है। उसमें केवल 22 देशों का आर्थिक इतिहास सम्मिलित है, जो इस पूरे काल तक जीवित रहें। उन 22 देशों में ई.स शून्य से ई.स.2000 इस कालखण्ड में सर्वाधिक सकल घरेलू उत्पाद भारत का ही रहा है। इ.स. 1700 में भारत का सकल घरेलु उत्पाद विश्व की तुलना में 40ः था, जो आज किसी भी समृद्ध देश का नहीं है। इसका सीधा अर्थ यहीं निकलता है कि हमारे देश में एक सुदृढ अर्थ व्यवस्था रही होगी, जिसका वर्णन तत्कालीन साहित्य में हमें स्थान स्थान पर मिलता है। उस व्यवस्था का परिशीलन कर यदि उसके कालानुरूप अंशो के आधार पर युगनुकूल नयी व्यवस्था हम बनाते हैं तो उसमें केवल भारत का ही नहीं तो विश्व का कल्याण निहित है।

संस्कृत ही उपाय-
उपर्युक्त उदाहरणों से यह निश्चित रीति से कहा जा सकता है कि हमारे पूर्वजों ने हमारे लिए छोड़ी धरोहर वर्तमान युग मे भी उतनी ही उपयोगी है। उस ज्ञान सागर से ज्ञान रूपी अमृत निकालकर हम तो ज्ञान क्षेत्रा में अग्रणी राष्ट्र बन सकते हैं। पश्चिम का ज्ञान हमने सीख ही लिया है। हमारे प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह द्वारा नियुक्त ज्ञान आयोग ने अपने रिपोर्ट में स्पष्ट लिखा है कि ‘जिस समाज या मानव समूह के पास ज्ञान होगा वहीं विकास करेगा’। यदि यह बात सच है तो हम विश्व में सबसे विकसित समाज बनकर उभरेंगे। इस मार्ग में जो एकमात्रा बाधा है वह है संस्कृत भाषा। जितना शीघ्र हम उस भाषा को सीख पायेंगे उतना ही शीघ्र हम विकास पथ के अग्रणी राष्ट्र बनेंगे। अतः आनेवाले वर्षों में हमारे प्रगति का मूल मन्त्र होगा-
पठतु संस्कृतम्! लिखतु संस्कृतम्!! वदतु संस्कृतम्!!!

Sunday, February 12, 2012

अजर, अमर हम अविनाशी


यूनानी साहित्य में एक मृत्युंजयी पक्षी ‘फीनिक्स’ की चर्चा आती है। उसके बारे में मान्यता है कि अपनी राख में से वह फिर-फिर जीवित हो जाता है।

दुनिया के गत लाखों वर्ष के इतिहास पर दृष्टि डालें, तो ध्यान में आता है कि भारत वर्ष और हिन्दू समाज भी मृत्युंजयी है। फीनिक्स पक्षी तो काल्पनिक है; पर हिन्दू समाज इस धरा की जीवित-जाग्रत वास्तविकता है। हिन्दुओं पर हजारों आपदाएं आयीं। इससे असीमित धन, जन, भूमि, सत्ता और मान-सम्मान की हानि भी हुई; पर वह फिर उठ खड़ा हुआ। ‘कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी’ कहकर हमारे विरोधी भी इसे स्वीकार करते हैं।

उतार-चढ़ाव सृष्टि का सनातन नियम है। दुनिया में जय-पराजय हर देश और समाज को समय-समय पर झेलनी पड़ी हैं। हमारे साथ तो यह कुछ अधिक ही हुआ है; पर हमने एक दिन के लिए भी पराजय को मन से स्वीकार नहीं किया। इतना ही नहीं, तो हमने हजारों वर्ष तक चले संघर्ष में उन अमर बलिदानियों और हुतात्माओं को अपने देश व धर्म के लिए गौरव और प्रेरणा के रूप में स्वीकार किया।

बलिदान की यह परम्परा तब से ही प्रारम्भ हो गयी, जब से शक, हूण, तुर्क, पठान, मुगल आदि विदेशी और विधर्मियों के हमले भारत पर होने लगे। इस्लामी हमलावरों के काल में राजा दाहिरसेन की पुत्रियां सूर्या और परिमल, गुरु अमरदास, गुरु तेगबहादुर और चारों गुरुपुत्र, बन्दा बैरागी, हकीकत राय जैसे हजारों बलिदानियों के प्रेरक प्रसंगों से इतिहास भरा है।

राजस्थानी जौहर की गाथाएं सुनकर किसका मस्तक गर्व से ऊंचा नहीं हो जाता ? उन वीर माताओं ने जान देना स्वीकार किया; पर आन नहीं। अंग्रेजों और पुर्तगालियों ने भी इस बर्बरता को दोहराया। भारत का कोई क्षेत्र ऐसा नहीं है, जहां इन्होंने हत्या, अग्निकांड और दुराचार का नंगा नाच न किया हो। गत शती की जलियांवाला बाग (अमृतसर) और मानगढ़ (राजस्थान) जैसे अनेक सामूहिक नरसंहारों की गाथाएं भी लोककथाओं और लोकगीतों में जीवित हैं।

लेकिन इतना सब होने के बाद भी इन बलिदान पर्वों पर हम हर साल काले कपड़े पहनकर छाती नहीं पीटते। उत्सवप्रिय हिन्दू समाज ने इन दुखद प्रसंगों को भी प्रेरणा और गौरव के पर्वों में बदल दिया है। प्रायः हम मेले लगाकर उस दिन को याद करते हैं। जगह-जगह भोजन और शरबत के लंगर तथा सेवा के शिविर लगाकर उन बलिदानियों को अपनी श्रद्धांजलि देते हैं।

हम ‘पुरानी नींव नया निर्माण’ की कहावत के अनुसार पिछली घटनाओं और दुर्घटनाओं से प्रेरणा लेकर आगे देखने में विश्वास रखते हैं। मुस्लिम और ईसाई हमलावरों ने भारत में हजारों मंदिर तोड़े। हमने उनमें से कई को पहले से भी अधिक भव्य रूप में फिर बना लिया। अब हम विध्वंस के बदले उनके पुनर्निमाण के दिन को याद कर उत्सव मनाते हैं।

लेकिन इसके दूसरी ओर अरब जगत को देखें, तो 1400 साल पूर्व हुए एक युद्ध को याद कर, पराजित गुट के अनुयायी आज तक रोते हैं। कुछ लोग उसे भले ही सत्य और असत्य के युद्ध जैसा कोई अच्छा नाम दें; पर वह विशुद्ध सत्ता का संघर्ष था। उसमें एक गुट को हारना ही था। एक गुट ने अपनी कबीलाई बर्बरता दिखाते हुए दूसरे गुट के बड़ों ही नहीं, तो बच्चों को भी तड़पा-तड़पा कर मारा।

पराजित लोग भले ही इसे अमानवीय कहें; पर उनके अपने क्रूर कर्मों से भी इतिहास के लाखों पृष्ठ भरे हैं। बिना बात मरने और निहत्थे-निरपराध लोगों को मारने का उनका स्वभाव आज भी बना है। जेहादी और आत्मघाती हमलों से वे सब कुछ नष्ट करने पर तुले हैं। दुनिया में आतंक का मुख्य कारण यह मानसिकता ही है।

हिन्दुओं की जीवंतता और उत्सवप्रियता पर एक और दृष्टि से विचार करें। ईश्वर एक होने पर भी हिन्दू कण-कण में उसे देखता है। उसकी दृष्टि में पशु, पक्षी, मानव, जलचर, पेड़, पौधे, धरती, जल, वायु, अग्नि, आकाश..सबमें भगवान है। हम हजारों पंथ, मत, सम्प्रदाय और देवी-देवताओं को मानते हैं। ईश्वर अजन्मा, अजर और अमर है; पर उसके कई अवतारों ने अपनी लीलाओं से इस धरा को पवित्र किया है। हम इन सब रूपों की पूजा करते हैं।

अवधबिहारी श्रीराम और मथुरानंदन श्रीकृष्ण के बालरूप की महिमा सुनने और गाने में किसे आनंद नहीं आता ? जब तुलसीदास ठुमक चलत रामचंद्र, बाजत पैंजनिया गाते हैं, तो सबका मन श्रीराम को गोद में उठाकर दुलारने का हो उठता है। धनुष यज्ञ से पूर्व राजा जनक और जानकी के मन का असमंजस हर व्यक्ति को अपना सा लगता है। जब श्रीराम अपनी प्राणप्रिया के वियोग में रोते हुए वन-वन भटकते हैं, तो सबकी आंखों में आंसू आ जाते हैं।

इसी प्रकार जब सूरदास यशोदा हरि पालने झुलावे गाते हैं, तो बच्चे से लेकर बूढ़े तक बालकृष्ण के पालने की डोरी में हाथ लगाकर उन्हें सुलाने का श्रेय लेने को उमग उठते हैं। जब यशोदा कृष्ण को ऊखल से बांधती है, तो सबके मन में कृष्ण के प्रति करुणा उत्पन्न हो जाती है। कंस का वध करते समय और महाभारत में गीता सुनाते समय श्रीकृष्ण सबको गौरव से भर देते हैं।

हमारे भगवान का क्या कहना ? वे हंसते हैं, तो रोते भी हैं। वे नाचते हैं, तो गाते भी हैं। घर में बच्चों की बालसुलभ शरारतों को देखकर हम भगवान को तथा मंदिर में बाल भगवान की मूर्ति देखकर अपने बच्चों को याद कर लेते हैं। भगवान के कण-कण और हर प्राणी में विद्यमान होने का यही तो अर्थ है। कीर्तन करते हुए तेरा-मेरा का भेद मिटाकर भक्त और भगवान एकरूप हो जाते हैं।

दूसरी ओर ईसा मसीह या इस्लाम के पैगम्बर के सौम्य रूप की चर्चा प्रायः कहीं नहीं है। ईसा मसीह का सर्वाधिक प्रसिद्ध चित्र वही है, जिसमें वे रक्तरंजित अवस्था में सूली पर लटके हैं। इस्लाम के पैगम्बर का जीवन तो युद्धों में ही बीता। इसीलिए मुसलमान चाहे जिस देश में हों, किसी न किसी से लड़ ही रहे हैं। दूसरे नहीं मिलते, तो वे आपस में ही लड़ते हैं।

गत 2,000 साल का अनुभव बताता है कि किसी नगर, गांव या कबीले पर कब्जे के लिए हुआ आपसी संघर्ष; या मृत्युदंड पाये, सलीब पर लटके ईसा मसीह किसी को सत्य, अहिंसा और प्रेम की शिक्षा नहीं दे सकते। इसलिए इन दोनों मजहबों के अनुयायी अपने जन्मकाल से ही दुनिया के अधिकाधिक जन, धन और भूमि पर कब्जा करने के लिए लड़ रहे हैं। विश्व में अशांति का यही कारण है।

क्या यह कटु सत्य नहीं है कि किसी इस्लामी देश में लोकतंत्र नहीं है। कुछ स्थानों पर वह दिखावे के लिए है; पर वहां कब सेना या तालिबानी हावी हो जाएं, कहना कठिन है। अपनी वैचारिक असफलता को छिपाने के लिए वहां मरने और मारने का खुला खेल जारी है। कौन, कब, किसे मार दे; कुछ पता नहीं। पिछले दिनों कई इस्लामी देशों में तानाशाही सत्ता के विरुद्ध विद्रोह हुआ है; पर वह भी किसी सार्थक निष्कर्ष पर पहुँचता नजर नहीं आता।

अधिकांश ईसाई देशों में लोकतंत्र है; पर इसकी आड़ में द्वितीय विश्व युद्ध से पूर्व ब्रिटेन और अब अमरीका पूरी दुनिया को लूटने और बरबाद करने पर तुला है। वे अपने धन और शस्त्रों के बल पर भले ही दुनिया को दबा कर रखें; पर यह भी सत्य है कि वहां चर्च बिक रहे हैं। चर्च में जाने वालों की संख्या लगातार घट रही है। इस कमी को वे अपने धनबल से भारत जैसे देशों में मतान्तरण द्वारा पूरा करना चाहते हैं।

चर्च के बंधन टूटने से वहां सब मर्यादाएं मिट रही हैं। परिवार व्यवस्था के बाद अब विवाह व्यवस्था भी समाप्त होने को है। ‘लिव इन रिलेशनशिप’ के नाम पर खुला व्यभिचार चल रहा है। बुढ़ापे में देखरेख की जिम्मेदारी जब शासन की है, तो बच्चे क्यों पैदा करें ? इस सोच से ईसाई देशों की जनसंख्या घट रही है। इससे चिंतित होकर अब वे अधिक बच्चे पैदा करने वाले दम्पतियों को पुरस्कृत करने लगे हैं। केरल का चर्च भी इसी दिशा चल रहा है।

मिशनरी और पादरी चाहे कुछ भी कहें; पर सलीब पर लटका, ईश्वर का तथाकथित पुत्र, युवा वर्ग की मानसिक और आत्मिक भूख अब शांत नहीं करता। इसके बदले हंसता-खेलता, रोता-लड़ता और शरारत करता बालकृष्ण उन्हें अच्छा लगता है। इसलिए पश्चिमी देशों में ‘हरे कृष्ण आंदोलन’ बहुत लोकप्रिय हो रहा है। हर नगर में कीर्तन करते, धोती पहने गौरांग लोग, भाव विभोर होकर नाचते नजर आते हैं। रूस में गीता के विरोध का कारण भी यही है।

हिन्दू धर्म की विशेषता उसका लचीलापन है। हमने देश, काल, और परिस्थिति के अनुसार स्वयं को बदला और सुधारा है; पर मजहबवादी आज भी लकीर के फकीर बने हैं। किसी ने कहा है - झुकेगा वही, जिसमें कुछ जान है, अकड़ खास मुर्दे की पहचान है।।

हम जीवन को याद रखते हैं, मृत्यु को नहीं। हम बलिदान को याद रखते हैं, सत्ता के बर्बर संघर्ष में हुई मौतों को नहीं। हम ‘जियो और जीने दो’ के पुजारी हैं, ‘मारो और मरो’ के नहीं। जो जीवन की पूजा करते हैं, वे कभी मरेंगे नहीं। भले ही कालक्रम में उन्हें कुछ सौ या हजार साल पराजय और गुलामी का दंश झेलना पड़े। जो मृत्यु के पुजारी हैं, वे मिट कर ही रहेंगे। भले ही वे कुछ सौ या हजार साल जीतते हुए दिखाई दें।

सृष्टि का यह सनातन नियम है। इसीलिए हम अजर, अमर और अविनाशी हैं। ऐसे संकट पहले भी आये हैं, जिन्हें हमने हर बार कुचला है। इस बार भी ऐसा ही होगा। बस, आवश्यकता इस बात की है कि हिन्दू धर्म की जिन विशेषताओं की चर्चा हम मुंह से करते हैं, अपने धर्मग्रन्थों से प्रेम और सामाजिक समरसता के जो उद्धरण हम प्रायः देते हैं, उन्हें व्यवहार में लाना प्रारम्भ कर दें।
(लेखक : ‘राष्ट्रधर्म’ मासिक के पूर्व सहायक सम्पादक हैं)

Thursday, February 9, 2012

भारत के रोचक तथ्‍य

  • भारत ने अपने आखिरी 100000 वर्षों के इतिहास में किसी भी देश पर हमला नहीं किया है।
  • जब कई संस्कृतियों में 5000 साल पहले घुमंतू वनवासी थे, तब भारतीयों ने सिंधु घाटी (सिंधु घाटी सभ्यता) में हड़प्पा संस्कृति की स्थापना की।
    भारत का अंग्रेजी में नाम ‘इंडिया’ इं‍डस नदी से बना है, जिसके आस पास की घाटी में आरंभिक सभ्‍यताएं निवास करती थी। आर्य पूजकों में इस इंडस नदी को सिंधु कहा।
  • ईरान से आए आक्रमणकारियों ने सिंधु को हिंदु की तरह प्रयोग किया। ‘हिंदुस्तान’ नाम सिंधु और हिंदु का संयोजन है, जो कि हिंदुओं की भूमि के संदर्भ में प्रयुक्त होता है।
  • शतरंज की खोज भारत में की गई थी।
  • बीज गणित, त्रिकोण मिति और कलन का अध्‍ययन भारत में ही आरंभ हुआ था।
  • ‘स्‍थान मूल्‍य प्रणाली’ और ‘दशमलव प्रणाली’ का विकास भारत में 100 बी सी में हुआ था।
  • विश्‍व का प्रथम ग्रेनाइट मंदिर तमिलनाडु के तंजौर में बृहदेश्‍वर मंदिर है। इस मंदिर के शिखर ग्रेनाइट के 80 टन के टुकड़ों से बने हैं। यह भव्‍य मंदिर राजाराज चोल के राज्‍य के दौरान केवल 5 वर्ष की अवधि में (1004 ए डी और 1009 ए डी के दौरान) निर्मित किया गया था।
  • भारत विश्‍व का सबसे बड़ा लोकतंत्र और विश्‍व का सातवां सबसे बड़ा देश तथा प्राचीन सभ्‍यताओं में से एक है।
  • सांप सीढ़ी का खेल तेरहवीं शताब्‍दी में कवि संत ज्ञान देव द्वारा तैयार किया गया था इसे मूल रूप से मोक्षपट कहते थे। इस खेल में सीढियां वरदानों का प्रतिनिधित्‍व करती थीं जबकि सांप अवगुणों को दर्शाते थे। इस खेल को कौडियों तथा पांसे के साथ खेला जाता था। आगे चल कर इस खेल में कई बदलाव किए गए, परन्‍तु इसका अर्थ वहीं रहा अर्थात अच्‍छे काम लोगों को स्‍वर्ग की ओर ले जाते हैं जबकि बुरे काम दोबारा जन्‍म के चक्र में डाल देते हैं।
  • दुनिया का सबसे ऊंचा क्रिकेट का मैदान हिमाचल प्रदेश के चायल नामक स्‍थान पर है। इसे समुद्री सतह से 2444 मीटर की ऊंचाई पर भूमि को समतल बना कर 1893 में तैयार किया गया था।
  • भारत में विश्‍व भर से सबसे अधिक संख्‍या में डाक खाने स्थित हैं।
  • भारतीय रेल देश का सबसे बड़ा नियोक्ता है। यह दस लाख से अधिक लोगों को रोजगार प्रदान करता है।
  • विश्‍व का सबसे प्रथम विश्‍वविद्यालय 700 बी सी में तक्षशिला में स्‍थापित किया गया था। इसमें 60 से अधिक विषयों में 10,500 से अधिक छात्र दुनियाभर से आकर अध्‍ययन करते थे। नालंदा विश्‍वविद्यालय चौथी शताब्‍दी में स्‍थापित किया गया था जो शिक्षा के क्षेत्र में प्राचीन भारत की महानतम उपलब्धियों में से एक है।
  • आयुर्वेद मानव जाति के लिए ज्ञात सबसे आरंभिक चिकित्‍सा शाखा है। शाखा विज्ञान के जनक माने जाने वाले चरक में 2500 वर्ष पहले आयुर्वेद का समेकन किया था।
  • भारत 17वीं शताब्‍दी के आरंभ तक ब्रिटिश राज्‍य आने से पहले सबसे सम्‍पन्‍न देश था। क्रिस्‍टोफर कोलम्‍बस भारत की सम्‍पन्‍नता से आकर्षित हो कर भारत आने का समुद्री मार्ग खोजने चला और उसने गलती से अमेरिका को खोज लिया।
  • नौवहन की कला और नौवहन का जन्‍म 6000 वर्ष पहले सिंध नदी में हुआ था। दुनिया का सबसे पहला नौवहन संस्‍कृ‍त शब्‍द नव गति से उत्‍पन्‍न हुआ है। शब्‍द नौ सेना भी संस्‍कृत शब्‍द नोउ से हुआ।
  • भास्‍कराचार्य ने खगोल शास्‍त्र के कई सौ साल पहले पृथ्‍वी द्वारा सूर्य के चारों ओर चक्‍कर लगाने में लगने वाले सही समय की गणना की थी। उनकी गणना के अनुसार सूर्य की परिक्रमा में पृथ्‍वी को 365.258756484 दिन का समय लगता है।
  • भारतीय गणितज्ञ बुधायन द्वारा ‘पाई’ का मूल्‍य ज्ञात किया गया था और उन्‍होंने जिस संकल्‍पना को समझाया उसे पाइथागोरस का प्रमेय करते हैं। उन्‍होंने इसकी खोज छठवीं शताब्‍दी में की, जो यूरोपीय गणितज्ञों से काफी पहले की गई थी।
  • बीज गणित, त्रिकोण मिति और कलन का उद्भव भी भारत में हुआ था। चतुष्‍पद समीकरण का उपयोग 11वीं शताब्‍दी में श्री धराचार्य द्वारा किया गया था। ग्रीक तथा रोमनों द्वारा उपयोग की गई की सबसे बड़ी संख्‍या 106 थी जबकि हिन्‍दुओं ने 10*53 जितने बड़े अंकों का उपयोग (अर्थात 10 की घात 53), के साथ विशिष्‍ट नाम 5000 बीसी के दौरान किया। आज भी उपयोग की जाने वाली सबसे बड़ी संख्‍या टेरा: 10*12 (10 की घात12) है।
  • वर्ष 1896 तक भारत विश्‍व में हीरे का एक मात्र स्रोत था। (स्रोत: जेमोलॉजिकल इंस्‍टी‍ट्यूट ऑफ अमेरिका) 
  • बेलीपुल विश्‍व‍ में सबसे ऊंचा पुल है। यह हिमाचल पर्वत में द्रास और सुरु नदियों के बीच लद्दाख घाटी में स्थित है। इसका निर्माण अगस्‍त 1982 में भारतीय सेना द्वारा किया गया था।
  • सुश्रुत को शल्‍य चिकित्‍सा का जनक माना जाता है। लगभग 2600 वर्ष पहले सुश्रुत और उनके सहयोगियों ने मोतियाबिंद, कृत्रिम अंगों को लगना, शल्‍य क्रिया द्वारा प्रसव, अस्थिभंग जोड़ना, मूत्राशय की पथरी, प्‍लास्टिक सर्जरी और मस्तिष्‍क की शल्‍य क्रियाएं आदि की।
  • निश्‍चेतक का उपयोग भारतीय प्राचीन चिकित्‍सा विज्ञान में भली भांति ज्ञात था। शारीरिकी, भ्रूण विज्ञान, पाचन, चयापचय, शरीर क्रिया विज्ञान, इटियोलॉजी, आनुवांशिकी और प्रतिरक्षा विज्ञान आदि विषय भी प्राचीन भारतीय ग्रंथों में पाए जाते हैं।
  • भारत से 90 देशों को सॉफ्टवेयर का निर्यात किया जाता है।
  • भारत में 4 धर्मों का जन्‍म हुआ – हिन्‍दु, बौद्ध, जैन और सिक्‍ख धर्म और जिनका पालन दुनिया की आबादी का 25 प्रतिशत हिस्‍सा करता है।
  • जैन धर्म और बौद्ध धर्म की स्‍थापना भारत में क्रमश: 600 बी सी और 500 बी सी में हुई थी।
  •  इस्‍लाम भारत का और दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा धर्म है।
  • भारत में 3,00,000 मस्जिदें हैं जो किसी अन्‍य देश से अधिक हैं, यहां तक कि मुस्लिम देशों से भी अधिक।
  • भारत में सबसे पुराना यूरोपियन चर्च और सिनागोग कोचीन शहर में है। इनका निर्माण क्रमश: 1503 और 1568 में किया गया था।
  • ज्‍यू और ईसाई व्‍यक्ति भारत में क्रमश: 200 बी सी और 52 ए डी से निवास करते हैं।
  • विश्‍व में सबसे बड़ा धार्मिक भवन अंगकोरवाट, हिन्‍दु मंदिर है जो कम्‍बोडिया में 11वीं शताब्‍दी के दौरान बनाया गया था।
  • तिरुपति शहर में बना विष्‍णु मंदिर 10वीं शताब्‍दी के दौरान बनाया गया था, यह विश्‍व का सबसे बड़ा धार्मिक गंतव्‍य है। रोम या मक्‍का धार्मिक स्‍थलों से भी बड़े इस स्‍थान पर प्रतिदिन औसतन 30 हजार श्रद्धालु आते हैं और लगभग 6 मिलियन अमेरिकी डॉलर प्रति दिन चढ़ावा आता है।
  • सिक्‍ख धर्म का उद्भव पंजाब के पवित्र शहर अमृतसर में हुआ था। यहां प्रसिद्ध स्‍वर्ण मंदिर की स्‍थापना 1577 में गई थी।
  • वाराणसी, जिसे बनारस के नाम से भी जाना जाता है, एक प्राचीन शहर है जब भगवान बुद्ध ने 500 बी सी में यहां आगमन किया और यह आज विश्‍व का सबसे पुराना और निरंतर आगे बढ़ने वाला शहर है।
  • भारत द्वारा श्रीलंका, तिब्‍बत, भूटान, अफगानिस्‍तान और बांग्‍लादेश के 3,00,000 से अधिक शरणार्थियों को सुरक्षा दी जाती है, जो धार्मिक और राजनैतिक अभियोजन के फलस्‍वरूप वहां से निकल गए हैं।
  • माननीय दलाई लामा तिब्‍बती बौद्ध धर्म के निर्वासित धार्मिक नेता है, जो उत्तरी भारत के धर्मशाला में अपने निर्वासन में रह रहे हैं।
  • युद्ध कलाओं का विकास सबसे पहले भारत में किया गया और ये बौद्ध धर्म प्रचारकों द्वारा पूरे एशिया में फैलाई गई।
  • योग कला का उद्भव भारत में हुआ है और यह 5,000 वर्ष से अधिक समय से मौजूद है।

Friday, February 3, 2012

जम्मू-कश्मीर राज्य : एक परिचय


तत्कालीन जम्मू-कश्मीर रियासत का विलय 26 अक्तूबर 1947 को भारतीय संघ में हुआ था। वह आज के भारत द्वारा शासित जम्मू-कश्मीर राज्य से कहीं अधिक विशाल था। इसके निम्न हिस्से हैं-

जम्मू - इसका क्षेत्रफल कुल 36,315 वर्ग कि.मी. है जिसमें से आज हमारे पास लगभग 26 हजार वर्ग कि.मी. है। दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों से युक्त पीर पंजाल पर्वत के दक्षिण में इस क्षेत्र में तवी और चेनाब जैसी बारहमासी नदियां बहती हैं। यहां की वर्तमान जनसंख्या का लगभग 67 प्रतिशत हिन्दू हैं। मुख्य भाषा डोगरी व पहाड़ी है।

कश्मीर- लगभग 22 हजार वर्ग कि.मी. क्षेत्रफल, जिसमें से लगभग 16 हजार वर्ग कि.मी. ही हमारे पास है। वर्तमान में अधिकांश जनसंख्या मुस्लिम है, लगभग 4 लाख हिन्दू वर्तमान में कश्मीर घाटी से विस्थापित हैं। जेहलम और किशनगंगा नदियों में जाने वाली जलधाराओं से बना यह क्षेत्र दो घाटियों जेहलम घाटी एवं लोलाब घाटी से मिलकर बना है। मुख्यत: कश्मीरी भाषा बोली जाती है, परन्तु एक तिहाई लोग पंजाबी-पहाड़ी बोलते हैं।

लद्दाख- कुल 1,01,000 वर्ग कि.मी. क्षेत्र, जिसमें से लगभग 59 हजार वर्ग कि.मी. भारत के अधिकार में है। प्रकृति की अनमोल धरोहर के साथ ही बड़ी संख्या में बौद्ध मठ यहां हैं जहां दुनिया के कोलाहल से दूर शांति का अनुभव किया जा सकता है।

गॉडविन आस्टिन (K 28611 मीटर) और गाशरब्रूम I (8068 मीटर) सर्वाधिक ऊँची चोटियाँ हैं। यहाँ की जलवायु अत्यंत शुष्क एवं कठोर है। वार्षिक वृष्टि 3.2 इंच तथा वार्षिक औसत ताप 5 डिग्री सें. है। नदियाँ दिन में कुछ ही समय प्रवाहित हो पाती हैं, शेष समय में जमी रहती है। सिंधु मुख्य नदी है। उत्तर में कराकोरम पर्वत तथा दर्रा है। कारगिल में 9000 फुट से लेकर कराकोरम में 25000 फुट ऊंचाई तक की पर्वत श्रंखलायें है।

01 जुलाई 1979 को लद्दाख का विभाजन कर लेह और करगिल; दो जिलों का गठन किया गया। पश्चिम बंगाल के गोरखालैंड की तर्ज पर दोनों जिलों का संचालन ‘स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषद’ द्वारा किया जाता है। वर्ष 2001 की जनगणना के अनुसार, लद्दाख की कुल जनसंख्या 236539 और क्षेत्रफल 59146 वर्ग कि.मी. है। यह भारत के सबसे विरल जनसंख्या वाले भागों में से एक है।

राज्य में लोकसभा की 6 और विधानसभा की 87 सीटें हैं जिसमें लद्दाख में लोकसभा की एक और विधानसभा की 4 सीटें हैं। करगिल और लेह जिले में विधानसभा की दो-दो सीटें है; जिनके नाम क्रमशः जांस्कर व कारगिल और नोब्रा व लेह है। दोनों जिले करगिल और लेह लद्दाख लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आते हैं। राज्य में मतदाताओं की कुल संख्या 65 लाख से ज्यादा है; जिसमें करीब 1,52,339 मतदाता लद्दाख में हैं।

करगिल के मुसलमान पक्के देशभक्त माने जाते हैं और 1999 में पाकिस्तान द्वारा कारगिल घुसपैठ के दौरान उन्होंने भारतीय सेना का खुलकर साथ दिया था। लद्दाख को चीन पश्चिम तिब्बत कहता है और सिन्धु नदी तक अपनी सीमा को बढ़ाना चाहता है। 1950 से ही इस क्षेत्र पर उसकी नजर है। लेह, जंस्कार, चांगथांग, नुब्रा, यह चार घाटियां बौध्दबहुल व सुरू घाटी पूर्णतया मुस्लिमबहुल है।

गिलगित-वाल्टिस्तान- जम्मू-कश्मीर के इस क्षेत्र को पाकिस्तान ने विधिवत अपना प्रांत घोषित कर उसका सीधा शासन अपने हाथ में ले लिया है। यह लगभग 63 हजार वर्ग किमी. विस्तृत भू-भाग है जिसमें गिलगित लगभग 42 हजार वर्ग किमी. और वाल्टिस्तान लगभग 21 हजार वर्ग किमी. है। गिलगित का सामरिक महत्व है। यह वह क्षेत्र है जहां 6 देशों की सीमाएं मिलती हैं- पाकिस्तान, अफगानिस्तान, तजाकिस्तान, चीन, तिब्बत एवं भारत। यह मध्य एशिया को दक्षिण एशिया से जोड़ने वाला दुर्गम क्षेत्र है जो सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है तथा जिसके द्वारा पूरे एशिया में प्रभुत्व रखा जा सकता है।

अमेरिका भी पहले गिलगित पर अपना प्रभाव रखना चाहता था और एक समय चीन के बढ़ते प्रभुत्व को रोकने के लिये सोवियत रूस की भी ऐसी ही इच्छा थी, इसलिये 60 के दशक में रूस ने पाकिस्तान का समय-समय पर समर्थन कर गिलगित को अपने प्रभाव क्षेत्र में लाने का प्रयास किया था। वर्तमान में गिलगित में चीन के 11000 सैनिक तैनात हैं। पिछले वर्षों में इस क्षेत्र में चीन ने लगभग 65 हजार करोड़ रूपये का निवेश किया व आज अनेक चीनी कम्पनियां व कर्मचारी वहां पर काम कर रहे हैं।

1935 में जब सोवियत रूस ने तजाकिस्तान को रौंद दिया तो अंग्रेजों ने गिलगित के महत्व को समझते हुये महाराजा हरिसिंह से समझौता कर वहां की सुरक्षा व प्रशासन की जिम्मेदारी अपने हाथ में लेने के लिये 60 वर्ष के लिये इसे पट्टे पर ले लिया। 1947 में इस क्षेत्र को उन्होंने महाराजा को वापिस कर दिया। इसकी सुरक्षा के लिये अंग्रेजों ने एक अनियमित सैनिक बल गिलगित स्काउट का भी गठन किया।

पाकिस्तान के कब्जे में जम्मू-कश्मीर- लगभग 10 हजार वर्ग किमी. जम्मू क्षेत्र एवं 6 हजार वर्ग किमी. कश्मीर क्षेत्र पाकिस्तान के अनधिकृत कब्जे में है। प्रमुख रूप से यहा पंजाबी एवं पहाड़ी भाषी जनसंख्या है। आज यह क्षेत्र पूर्णतया मुस्लिम हो चुका है परन्तु 1947 में यहां से विस्थापित हुए लगभग दस लाख हिन्दू शरणार्थी जम्मू-कश्मीर एवं भारत के अन्य भागों में रहते हैं।

चीन अधिगृहीत जम्मू-कश्मीर- लद्दाख के लगभग 36,500 वर्ग किमी. पर 1962 में चीन ने आक्रमण कर अवैध कब्जा कर लिया। बाद में पाकिस्तान ने 5500 वर्ग किमी. जमीन चीन को भेंटस्वरूप दे दी।
(जम्मू-कश्मीर : तथ्य, समस्याएं एवं समाधान पुस्तक से साभार)

Monday, January 30, 2012

नेहरू - गांधी वंश के बारे में कुछ छिपा तथ्य

 नेहरू - गांधी वंश मुग़ल Ghiyasuddin गाजी नाम के एक आदमी के साथ शुरू होता है. वह शहर कोतवाल यानी पुलिस अधिकारी दिल्ली 1857 के विद्रोह से पहले मुगल शासन के अधीन था,. गदर के वर्ष में, 1857 में दिल्ली पर कब्जा करने के बाद, ब्रिटिश सभी मुगलों हर जगह कत्लेआम कर रहे थे. ब्रिटिश एक गहन खोज की है और हर मुग़ल मार डाला इतना है कि दिल्ली के सिंहासन के लिए कोई भविष्य दावेदार थे. दूसरे हाथ पर हिंदुओं ब्रिटिश द्वारा लक्षित नहीं जब तक पृथक हिंदुओं मुगलों, पिछले संघों के कारण के साथ साइडिंग हो पाए गए थे. इसलिए, यह कई मुसलमान के लिए प्रथागत बने हिंदू नाम को अपनाने. तो, आदमी Ghiyasuddin गाजी (काफिर का हत्यारा शब्द का मतलब है) एक हिंदू नाम गंगाधर नेहरू अपनाया और इस प्रकार छल द्वारा उसकी जान बचाई. Ghiyasuddin गाजी जाहिरा तौर पर (या Nehr) लाल किले के पास एक नहर के किनारे पर रहते थे. इस प्रकार, वह नाम 'नेहरू' परिवार के नाम के रूप में अपनाया. दुनिया से बाहर के माध्यम से, हम किसी भी गंगाधर की तुलना में अन्य वंशज नहीं मिल रहा है, उपनाम नेहरू वाले. "भारतीय आजादी के युद्ध के विश्वकोश" की 13 वीं मात्रा एम.के. द्वारा (ISBN :81-261-3745-9) सिंह अलंकृत राज्यों. भारत सरकार इस तथ्य को छुपा रही है.

सिटी कोतवाल आज पुलिस आयुक्त की तरह एक महत्वपूर्ण पद था. यह मुगल रिकॉर्ड से प्रतीत होता है कि वहाँ कोई हिंदू कोतवाल नियुक्त किया गया था. यह एक हिंदू के लिए बहुत संभावना नहीं थी कि पद के लिए काम पर रखा जा. विदेशी वंश के अनिवार्यतः केवल मुसलमान जैसे महत्वपूर्ण पदों के लिए काम पर रखा गया.

जवाहरलाल नेहरू की दूसरी बहन कृष्णा Hutheesing भी अपने संस्मरण में उल्लेख है कि उसके दादा दिल्ली शहर कोतवाल 1857 के विद्रोह से पहले किया गया था जब बहादुर शाह जफर अब भी दिल्ली के सुल्तान था. जवाहरलाल नेहरू ने अपनी आत्मकथा में राज्यों, कि वह अपने दादा है जो उसे एक मुगल ठाकुर की तरह चित्रण के एक चित्र देखा है. यह है कि चित्र में दिखाई देता है कि वह लंबी और बहुत मोटी दाढ़ी रहा था, एक मुस्लिम टोपी पहने हुए था और उसके हाथ में दो तलवारें. जवाहरलाल नेहरू भी अपनी आत्मकथा में कहा गया है कि दिल्ली से आगरा (मुगल प्रभाव की एक सीट) को अपने रास्ते पर, अपने भव्य पिता के परिवार के सदस्यों को अंग्रेजों द्वारा हिरासत में थे. निरोध का कारण उनके मुग़ल सुविधाओं था. लेकिन वे वकालत की कि वे कश्मीरी पंडित थे और इस तरह दूर मिला. 19 वीं सदी के उर्दू साहित्य, विशेष रूप से ख्वाजा हसन निज़ामी का काम करता है, दुख से भरा है कि मुगलों और मुसलमान तो सामना करना पड़ता है. उन्होंने यह भी वर्णन कैसे मुगलों अन्य शहरों के लिए बच करने के लिए अपनी जान बचाने के. सभी संभावना में, जवाहर नेहरू मुग़ल दादा और उनके परिवार को उन के बीच में थे.

जवाहर लाल नेहरू एक व्यक्ति है कि भारत प्यार करते हैं. वह निस्संदेह एक बहुत ही ध्वनि राजनीतिज्ञ और एक प्रतिभाशाली व्यक्ति था. लेकिन, भारत सरकार उनके जन्म इलाहाबाद में जगह 77 Mirganj पर जवाहरलाल नेहरू के स्मारक नहीं बनाया है, क्योंकि यह एक वेश्यालय है. पूरे इलाके में लंबे समय के बाद से एक प्रसिद्ध रेड लाइट एरिया है. यह हाल ही में एक वेश्यालय बन गया है, लेकिन यह जवाहरलाल नेहरू के जन्म से पहले भी एक वेश्यालय है. एक ही घर के एक हिस्से को अपने पिता मोतीलाल नेहरू ने एक वेश्या का नाम लाली जान बेच दिया गया था और यह करने के लिए "Imambada" के रूप में जाना जाने लगा. यदि आप कुछ संदेह है, तो आप जगह की यात्रा कर सकते हैं. कई भरोसेमंद सूत्रों और भी encyclopedia.com और विकिपीडिया यह कहना है. मोतीलाल नेहरू अपने परिवार के साथ साथ बाद में आनंद भवन में स्थानांतरित कर दिया. याद रखें कि आनंद भवन जवाहर लाल नेहरू के पैतृक घर और जन्म नहीं जगह अपने.

भारतीय सिविल सेवा की एमओ मथाई प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को निजी सचिव के रूप में सेवा की. मथाई एक पुस्तक "नेहरू आयु के Reminiscences" (ISBN: 13-9780706906219) पुस्तक में लिखा है मथाई पता चलता है कि जवाहर लाल नेहरू और Edwina माउंटबेटन (भारत के अंतिम वायसराय, लुई माउंटबेटन की पत्नी) के बीच गहन प्रेम प्रसंग था. रोमांस इंदिरा गांधी, जो उसके पिता को राजी करने के लिए उनके रिश्ते के बारे में थोड़ा सावधानी बरतनी में मौलाना अबुल कलाम आजाद की मदद लेनी लिए बहुत शर्मिंदगी का एक स्रोत था.

इसके अलावा नेहरू सरोजिनी नायडू की बेटी पद्मजा नायडू, जिसे नेहरू बंगाल के राज्यपाल के रूप में नियुक्त किया गया के साथ प्रेम प्रसंग था. यह पता चला है कि वह अपने बेड रूम में उसके चित्र, जो इंदिरा अक्सर दूर होता है रखने के लिए किया. यह पिता और बेटी के बीच कुछ तनाव के कारण है.

इन महिलाओं के अलावा, पंडित नेहरू श्रद्धा माता का नाम बनारस से एक संन्यासिन के साथ एक चक्कर था. वह एक आकर्षक संस्कृत अच्छी तरह से प्राचीन भारतीय शास्त्र और पौराणिक कथाओं में निपुण विद्वान था. जब वह उनके अवैध संबंध के बाहर 1949 में, कल्पना, बंगलौर में एक कॉन्वेंट में, वह जोर देकर कहा कि नेहरू उसे शादी कर लेनी चाहिए. लेकिन, नेहरू कि मना कर दिया है, क्योंकि यह उनके राजनीतिक कैरियर को प्रभावित कर सकता है. एक बेटे का जन्म हुआ था और एक ईसाई मिशनरी बोर्डिंग स्कूल में वह रखा गया था. की उनकी जन्म तिथि 30 मई, 1949 होने का अनुमान है. अब वह अपने प्रारंभिक साठ के दशक में किया जा सकता है. ऐसे मामलों में convents बच्चे का अपमान को रोकने के लिए गोपनीयता बनाए रखने के. हालांकि मथाई बच्चे के अस्तित्व की पुष्टि की, कोई प्रयास कभी उसे ढूँढने किया गया. वह बड़े हो गए हैं चाहिए के रूप में एक कैथोलिक ईसाई blissfully उसका पिता कौन था से अनभिज्ञ है.

नेताजी सुभाष चन्द्र बोस और डा. श्यामा प्रसाद मुखर्जी भारत के प्रधानमंत्री के पद के लिए जवाहर लाल नेहरू के प्रतियोगियों के थे और उन दोनों को रहस्यमय परिस्थितियों में मृत्यु हो गई.

इन सभी तथ्यों को जानने का, नेहरू का जन्मदिन बाल दिवस के रूप में मनाने का कोई अर्थ है? उसे अपने बच्चों को एक अलग व्यक्ति के रूप में पेश करने और सच छुपा है, उन्हें शिक्षा को नकार के लिए बराबर है.

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अनुसूचित जाति भट्ट जवाहरलाल नेहरू की बहन विजया लक्ष्मी उसके पिता कर्मचारी Syud हुसैन के साथ भाग द्वारा: (ISBN 9788121205917 13): जैसा कि "मुस्लिम अलगाववाद और विभाजन महान डिवाइड" पुस्तक के प्रति. तब मोतीलाल नेहरू जबरदस्ती उसे वापस ले लिया गया और उसे एक और रंजीत पंडित नाम के एक आदमी के साथ शादी की.

इंदिरा प्रियदर्शिनी नेहरू राजवंश में अनैतिकता perpetuated. बौद्धिक इंदिरा ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में भर्ती कराया गया था, लेकिन वहाँ से बाहर गैर - प्रदर्शन के लिए प्रेरित. वह तो शांतिनिकेतन विश्वविद्यालय में भर्ती कराया गया था, लेकिन, गुरु देव रवीन्द्रनाथ टैगोर उसे बुरा आचरण के लिए पीछा किया.

शान्तिनिकेतन के बाहर संचालित करने के बाद, इंदिरा अकेला हो गया है के रूप में पिता राजनीति के साथ व्यस्त था और माँ तपेदिक के स्विट्जरलैंड में मर रहा था. उसे अकेलापन, फिरोज खान, नवाब खान नाम पंसारी जो इलाहाबाद में मोतीलाल नेहरू घरेलू वाइन आदि की आपूर्ति के बेटे के साथ खेलना, उसके करीब आकर्षित करने में सक्षम था. महाराष्ट्र के तत्कालीन राज्यपाल डा. श्रीप्रकाश नेहरू ने चेतावनी दी है कि इंदिरा फिरोज खान के साथ अवैध संबंध रहा था. फिरोज खान इंग्लैंड में तो था और वह काफी इंदिरा के लिए सहानुभूति था. जल्द ही वह अपने धर्म बदल, एक मुस्लिम महिला बनीं और लंदन के एक मस्जिद में फिरोज खान से शादी कर ली. इंदिरा प्रियदर्शिनी नेहरू Maimuna बेगम के लिए उसका नाम बदल दिया है. उनकी मां कमला नेहरू कि शादी के खिलाफ पूरी तरह से किया गया था. नेहरू मुस्लिम रूपांतरण के रूप में प्रधानमंत्री बनने की उसकी संभावना को ख़तरे में डालना होगा खुश नहीं था.

तो, नेहरू युवा आदमी फिरोज खान से पूछा खान से गांधी के लिए अपने उपनाम बदल. यह इस्लाम से हिंदू धर्म के लिए धर्म के परिवर्तन के साथ कुछ नहीं करना था. यह सिर्फ एक हलफनामा द्वारा नाम का एक परिवर्तन का एक मामला था. और इसलिए फिरोज खान फिरोज गांधी बन गया है, हालांकि यह बिस्मिल्लाह सरमा की तरह एक असंगत नाम है. दोनों अपने नाम करने के लिए भारत की जनता मूर्ख बदल दिया है. जब वे भारत लौटे, एक नकली वैदिक विवाह सार्वजनिक उपभोग के लिए स्थापित किया गया था. इस प्रकार, इंदिरा और उसके वंश काल्पनिक नाम गांधी मिला. नेहरू और गांधी दोनों फैंसी नाम हैं. के रूप में एक गिरगिट अपने रंग बदलता है, इस राजवंश ने अपनी असली पहचान छिपाने के लिए कोई नाम बदल गया है.

इंदिरा गांधी अर्थात् दो बेटों राजीव गांधी और संजय गांधी था. संजय मूल संजीव कि राजीव अपने बड़े भाई के नाम के साथ तुकांतवाला के रूप में नामित किया गया था. संजीव ब्रिटेन में एक कार चोरी के लिए ब्रिटिश पुलिस द्वारा गिरफ्तार किया गया था और उसका पासपोर्ट जब्त किया गया था. इंदिरा गांधी की दिशा में तत्कालीन भारतीय राजदूत ब्रिटेन, कृष्ण मेनन अपनी शक्ति का दुरुपयोग, संजय के लिए उसका नाम बदल दिया और एक नया पासपोर्ट खरीद. इस प्रकार संजीव गांधी संजय गांधी के रूप में जाना जाने लगा.

यह एक ज्ञात तथ्य यह है कि जन्म के बाद राजीव, इंदिरा गांधी और फिरोज गांधी के अलग - अलग रहते थे, लेकिन वे नहीं तलाक ले रहे थे. पुस्तक के.एन. राव राज्यों द्वारा "नेहरू राजवंश" (10:8186092005 ISBN) है कि इंदिरा (या श्रीमती फिरोज खान) के दूसरे बेटे संजय गांधी के रूप में जाना जाता फिरोज गांधी के पुत्र नहीं था. वह एक और मुस्लिम मोहम्मद यूनुस नाम सज्जन का बेटा था.

दिलचस्प सिख लड़की मेनका के साथ संजय गांधी की नई दिल्ली में मोहम्मद यूनुस के घर में शादी जगह ले ली. जाहिर यूनुस शादी से नाखुश था के रूप में वह अपनी पसंद की एक मुस्लिम लड़की के साथ उसकी शादी करना चाहता था. मोहम्मद यूनुस जो सबसे अधिक रोया जब संजय गांधी की विमान दुर्घटना में निधन हो गया था. 'यूनुस की पुस्तक में, "व्यक्तियों, जुनून और राजनीति" (ISBN-10: 0706910176) एक खोज कर सकते हैं कि बच्चे संजय खतना निम्नलिखित इस्लामी कस्टम था.

यह एक तथ्य है कि संजय गांधी को लगातार अपनी मां इंदिरा गांधी का रहस्य उसका असली पिता कौन है के साथ, ब्लैकमेल किया है. संजय उसकी माँ पर एक गहरा भावनात्मक नियंत्रण, जो वह अक्सर दुरुपयोग का प्रयोग किया. इंदिरा गांधी अपने कुकर्मों की अनदेखी करने का फैसला किया और वह परोक्ष रूप से सरकार नियंत्रित किया गया था.

जब संजय गांधी की मृत्यु की खबर इंदिरा गांधी पर पहुंच गया, उसे पहला सवाल था, "उसकी कुंजी और उसकी कलाई घड़ी कहाँ हैं?". नेहरू - गांधी वंश के बारे में कुछ गहरे रहस्य उन objects.The विमान दुर्घटना में छिपा हो लगता है भी रहस्यमय था. यह एक नया है कि एक दुर्घटना में ग़ोता मारना और अभी तक विमान के प्रभाव पर विस्फोट नहीं था विमान था. ऐसा होता है जब वहाँ कोई ईंधन नहीं है. लेकिन उड़ान रजिस्टर से पता चलता है कि ईंधन टैंक लेने से पहले पूरा किया गया था. इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुचित प्रभाव का उपयोग कर जगह ले जाने से किसी भी जांच निषिद्ध. तो, जो संदिग्ध है?

इंदिरा नेहरू गांधी की पुस्तक "लाइफ" (ISBN: 9780007259304) कैथरीन फ्रैंक ने इंदिरा गांधी के अन्य प्रेम संबंधों के कुछ पर प्रकाश डालता है. यह लिखा है कि इंदिरा पहला प्यार शान्तिनिकेतन में उसे जर्मन शिक्षक के साथ था. बाद में वह एमओ मथाई (पिता के सचिव), तो धीरेंद्र ब्रह्मचारी (उसे योग शिक्षक) और दिनेश सिंह (विदेश मंत्री) के साथ पिछले चक्कर था.

पूर्व विदेश मंत्री नटवर सिंह ने अपनी पुस्तक "प्रोफाइल और पत्र" (ISBN 8129102358) में मुगलों के लिए इंदिरा गांधी आत्मीयता के बारे में एक दिलचस्प रहस्योद्घाटन किया. यह कहा गया है कि 1968 में इंदिरा गांधी ने भारत के प्रधानमंत्री के रूप में अफगानिस्तान के लिए एक सरकारी यात्रा पर चला गया. नटवर गाओ उसे कर्तव्य में एक आईएफएस अधिकारी के रूप में साथ है. दिन भर सगाई पूरा करने के बाद, इंदिरा गांधी शाम में एक सवारी के लिए बाहर जाना चाहता था. कार में एक लंबी दूरी जाने के बाद इंदिरा गांधी बाबर दफन जगह यात्रा करना चाहता था, हालांकि इस कार्यक्रम में शामिल नहीं किया गया. अफ़ग़ान सुरक्षा अधिकारियों ने उसे परहेज करने की कोशिश की, लेकिन वे अडिग रहीं. अंत में वह उस दफन जगह पर चला गया. यह एक सुनसान जगह थी. वह बाबर की कब्र से पहले चला गया, श्रद्धा में नीचे तुला सिर के साथ एक कुछ मिनट के लिए वहाँ खड़ा था. नटवर सिंह उसके पीछे खड़ा था. जब इंदिरा ने उसकी प्रार्थना को समाप्त किया था, वह वापस कर दिया और सिंह "आज हम इतिहास के साथ हमारे ब्रश. पड़ा है" कहा था उल्लेख है कि बाबर भारत में मुगल शासन के संस्थापक, जिसमें से नेहरू - गांधी वंश का वंशज है वॉर्थ.

यह मुश्किल है कि गिनती कितने संस्थानों में उच्च शिक्षा के राजीव गांधी के नाम कर रहे हैं, लेकिन राजीव गांधी खुद कम क्षमता का एक व्यक्ति था. 1962 से 1965 तक, वह ट्रिनिटी कॉलेज, कैम्ब्रिज में एक यांत्रिक अभियांत्रिकी पाठ्यक्रम के लिए दाखिला लिया था. लेकिन, वह एक डिग्री के बिना छोड़ दिया कैम्ब्रिज, क्योंकि वह परीक्षा पारित नहीं कर सका. अगले साल 1966 में, वह इंपीरियल कॉलेज, लंदन में शामिल हो गए, लेकिन इसे फिर से एक डिग्री के बिना छोड़ दिया.

इसके बाद के संस्करण में के.एन. राव ने कहा कि पुस्तक का आरोप है कि राजीव गांधी एक कैथोलिक बने सानिया माइनो शादी. राजीव रॉबर्टो बन गया. उनके बेटे का नाम राउल और बेटी का नाम Bianca है. काफी बड़ी चतुराई से एक ही नाम राहुल और प्रियंका के रूप में भारत के लोगों के लिए प्रस्तुत कर रहे हैं.

प्रेस कॉन्फ्रेंस कि राजीव गांधी भारत के प्रधानमंत्री के रूप में पदभार संभालने के बाद लंदन में दिया बहुत जानकारीपूर्ण गया था. इस पत्रकार सम्मेलन में राजीव दावा है कि वह एक हिंदू लेकिन एक पारसी नहीं है. फिरोज खान के पिता और राजीव गांधी के पैतृक दादा गुजरात के जूनागढ़ क्षेत्र से एक मुस्लिम सज्जन था. नवाब खान के नाम से यह मुस्लिम पंसारी उसे इस्लाम धर्म के बाद एक पारसी महिला से शादी की थी. इस स्रोत है जहां राजीव एक पारसी होने के मिथक से निकाली थी. मन है कि वह सब पर कोई पारसी पूर्वज था. उनके पैतृक दादी पारसी धर्म नवाब खान शादी परित्यक्त के बाद मुस्लिम बदल दिया था. हैरानी की बात है, पारसी राजीव गांधी वैदिक संस्कार के अनुसार भारतीय जनता के पूर्ण दृश्य में अंतिम संस्कार किया गया.

व्यक्तिगत आचरण में राजीव बहुत एक मुगल था. 15 अगस्त 1988 को वह लाल किले की प्राचीर से गरजा, "हमारा प्रयास हाइट्स करने के लिए जो इसे 250-300 साल पहले के बारे में संबंधित देश लेने के लिए किया जाना चाहिए. यह तो औरंगजेब के शासनकाल 'jeziya' मास्टर और नंबर एक मंदिर विध्वंसक था.

डॉ. सुब्रमण्यम स्वामी लिखते हैं कि सोनिया गांधी के नाम Antonia Maino था. उसके पिता एक मेसन था. उन्होंने इटली के कुख्यात फासीवादी शासन के एक कार्यकर्ता था और वह रूस में पांच साल की कैद की सेवा. सोनिया गांधी को उच्च विद्यालय से परे नहीं अध्ययन किया है. वह कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय परिसर में लेनोक्स स्कूल का नाम अंग्रेजी शिक्षण की दुकान से कुछ अंग्रेजी सीखा. इस तथ्य से वह प्रतिष्ठित कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में अध्ययन के समेटे हुए है. कुछ अंग्रेजी सीखने के बाद, वह कैम्ब्रिज शहर में एक रेस्तरां में एक वेट्रेस था.

सोनिया गांधी ब्रिटेन में माधवराव सिंधिया, जो उसकी शादी के बाद भी जारी रखा के साथ तीव्र दोस्ती थी.

2 AM में एक रात 1982 में माधवराव सिंधिया और सोनिया गांधी के साथ अकेले पकड़े गए थे जब उनकी कार आईआईटी दिल्ली मुख्य गेट के पास एक दुर्घटना की.

जब इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के प्रधानमंत्रियों थे, प्रधानमंत्री की सुरक्षा के लिए नई दिल्ली और चेन्नई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर जाने के लिए मंदिर की मूर्तियों की तरह भारतीय खजाने के बक्से भेजने के लिए इस्तेमाल किया, प्राचीन वस्तुएँ, पेंटिंग्स रोम करने के लिए आदि. मुख्यमंत्री के रूप में अर्जुन सिंह और संस्कृति प्रभारी मंत्री लूट का आयोजन किया के रूप में बाद में. सीमा से अनियंत्रित, वे इटली के लिए ले जाया गया और दो Etnica एवं गणपति, सोनिया गांधी की बहन एलेसैंड्रा माइनो विंची द्वारा स्वामित्व नाम दुकानों में बेचा .

इंदिरा गांधी क्योंकि उसके दिल या मस्तिष्क गोलियों से छेदा गया, नहीं मृत्यु हो गई, लेकिन वह खून की कमी की मृत्यु हो गई. के बाद इंदिरा गांधी पर निकाल दिया गया था, सोनिया गांधी अजीब जोर देकर कहा है कि खून बह रहा इंदिरा गांधी डा. राम मनोहर लोहिया अस्पताल ले जाया जाना चाहिए एम्स जो ठीक इस तरह की घटनाओं के साथ सौदा करने के लिए एक आपात प्रोटोकॉल था के विपरीत दिशा में. डा. राम मनोहर लोहिया अस्पताल तक पहुँचने के बाद, सोनिया गांधी ने उसके मन और मांग है कि इंदिरा गांधी एम्स के लिए लिया जाना चाहिए बदल गया है, इस प्रकार 24 बहुमूल्य मिनट बर्बाद कर. यह संदिग्ध है कि चाहे वह सोनिया गांधी की अपरिपक्वता या एक चाल के लिए तेजी से उसके पति को सत्ता में लाने था.

राजेश पायलट और माधव राव सिंधिया के प्रधानमंत्री पद के लिए मजबूत दावेदार थे और वे सोनिया गांधी के सत्ता में रास्ते में सड़क ब्लॉक थे. उन दोनों रहस्यमय दुर्घटनाओं में मृत्यु हो गई.

प्रथम दृष्टया संभावना है कि माइनो परिवार लिट्टे अनुबंधित किया है राजीव गांधी की हत्या की ओर इशारा करते हुए परिस्थितिजन्य सबूत हैं. आजकल, सोनिया गांधी एमडीएमके, पीएमके और द्रमुक जैसे जो राजीव गांधी के हत्यारों प्रशंसा के साथ राजनीतिक गठबंधन होने में काफी अडिग है. कोई भारतीय विधवा कभी करना होगा कि. ऐसे हालात कई हैं, और एक शक बढ़ा. राजीव की हत्या में सोनिया की भागीदारी में एक जांच आवश्यक है. (ISBN 81-220-0591-8) - तुम डॉ. सुब्रह्मण्यम स्वामी पुस्तक "आशातीत प्रश्न और अनुत्तरित प्रश्न राजीव गांधी की हत्या" पढ़ सकते हैं. यह ऐसी साजिश के संकेत हैं.

1992 में, सोनिया गांधी इतालवी नागरिकता कानून के अनुच्छेद 17 के तहत इटली की उसकी नागरिकता पुनर्जीवित. इतालवी कानून के तहत, राहुल और प्रियंका इतालवी नागरिक हैं क्योंकि सोनिया ने एक इतालवी नागरिक था जब वह उन्हें जन्म दिया. राहुल गांधी इतालवी उसकी हिंदी की तुलना में बेहतर है. राहुल गांधी एक इतालवी नागरिक तथ्य यह है कि 27 सितंबर 2001 को वह बोस्टन हवाई अड्डे, संयुक्त राज्य अमेरिका में एफबीआई द्वारा एक इतालवी पासपोर्ट पर यात्रा करने के लिए हिरासत में था से प्रासंगिक है. यदि कोई कानून भारत में किया जाता है कि कि राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के जैसे महत्वपूर्ण पदों पर विदेशी मूल के एक व्यक्ति द्वारा आयोजित नहीं किया जाना चाहिए, तो राहुल गांधी स्वचालित रूप से प्रधानमंत्री के पद के लिए disqualifies ho jayenge .

स्कूली शिक्षा खत्म करने के बाद, राहुल गांधी योग्यता के आधार पर नहीं बल्कि राइफल शूटिंग के खेल कोटे पर नई दिल्ली में सेंट स्टीफंस कॉलेज में दाखिला मिल गया. 1989-90 में एक संक्षिप्त रहने के बाद, वह 1994 में, फ्लोरिडा के रोलिंस कालेज से बी.ए. किया. बीए कर के लिए बस एक अमेरिका के लिए जाने की जरूरत नहीं है. अगले ही वर्ष, 1995 में उन्होंने एम. फिल. ट्रिनिटी कॉलेज, कैम्ब्रिज से डिग्री. इस डिग्री की वास्तविकता के रूप में वह एम. फिल किया है पूछताछ की है. एमए के बिना. Amaratya सेन की मदद माना जाता है. आप में से कई मशहूर फिल्म 'मुन्नाभाई एमबीबीएस "देखा है

2008 में राहुल गांधी को कानपुर में चन्द्र शेखर आजाद विश्वविद्यालय के छात्रों की रैली के लिए एक सभागार का उपयोग करने से रोका था. बाद में, विश्वविद्यालय के कुलपति वी.के. सूरी, उत्तर प्रदेश के राज्यपाल द्वारा अपदस्थ किया गया था. 26/11 जब पूरे देश के बारे में कैसे से निपटने के लिए मुंबई आतंकी के तनाव में था के दौरान राहुल गांधी आराम से 5 AM तक अपने दोस्तों के साथ जश्न मना रहा था. राहुल गांधी कांग्रेस के सभी सदस्यों के लिए तपस्या की सलाह है. वे कहते हैं, यह सभी के लिए तपस्या होना राजनेताओं के कर्तव्य है. दूसरी ओर वह एक पूरी तरह सुसज्जित जिम के साथ एक मंत्री बंगला है. वह कम से कम दिल्ली के poshest जिम के दो, जिनमें से 5 सितारा दर्ज़ा दिया गया है की एक नियमित सदस्य है. राहुल गांधी चेन्नई यात्रा 2009 में मितव्ययिता अभियान के लिए पार्टी के 1 करोड़ रुपये से अधिक लागत. इस तरह की विसंगतियों को बताते हैं कि राहुल गांधी द्वारा उठाए गए कदमों के अपने ही है, लेकिन उनकी पार्टी केवल पुरुषों की कसरत नहीं कर रहे हैं.

2007 उत्तर प्रदेश में चुनाव अभियान के दौरान राहुल गांधी ने कहा कि "अगर नेहरू - गांधी परिवार से किसी को भी राजनीति में सक्रिय किया गया था तो, बाबरी मस्जिद गिर नहीं होगा". यह doubtlessly अपने पूर्वजों के लिए एक वफादारी के रूप में अपने मुसलमान संबद्धता से पता चलता है. 31 दिसम्बर, 2004 में, जॉन एम. itty, केरल के अलाप्पुझा जिले में एक सेवानिवृत्त कॉलेज के प्रोफेसर, तर्क है कि राहुल गांधी और केरल में एक रिसॉर्ट में तीन दिनों के लिए एक साथ रहने के लिए प्रेमिका Juvenitta उर्फ वेरोनिका के खिलाफ कार्रवाई लिया जाना चाहिए कि. यह अनैतिक अधिनियम के तहत एक अपराध के रूप में वे शादी नहीं कर रहे हैं. वैसे भी, एक और अधिक विदेशी बहू सहिष्णु भारतीयों नियम इंतज़ार कर रही है.

स्विस पत्रिका Schweizer Illustrierte 11 वीं नवंबर 1991 मुद्दे से पता चला है कि राहुल गांधी ने 2 बिलियन अमरीकी डॉलर के लायक अपनी मां सोनिया गांधी द्वारा नियंत्रित खातों के लाभार्थी था. 2006 में स्विस बैंकिंग एसोसिएशन से एक रिपोर्ट से पता चला है कि भारतीय नागरिकों की संयुक्त जमा अभी तक किसी भी अन्य देश, 1.4 खरब अमरीकी डॉलर का एक कुल, एक भारत के सकल घरेलू उत्पाद से अधिक आंकड़ा से अधिक कर रहे हैं. इस राजवंश भारत के आधे से अधिक नियम. केंद्र की उपेक्षा, 28 राज्यों और 7 संघ शासित प्रदेशों से बाहर समय के किसी भी बिंदु पर, उनमें से आधे से भी कांग्रेस सरकार है. राजीव गांधी तक भारत में मुग़ल सोनिया गांधी के साथ शासन था, भारत पर रोम शासन शुरू कर दिया है.

मोतीलाल और शादी अपनी पहली पत्नी और बेटे को प्रसव में निधन हो गया.

मोतीलाल और उनकी दूसरी पत्नी THUSSU (नाम स्वरूप रानी के लिए बदल) तीन बच्चों की थी

THUSSU MOBARAK अली (मोतीलाल बॉस) के साथ पहले बेटे जवाहर लाल नेहरू (वह खतना था)

मोतीलाल और THUSSU नाम (भी बुलाया विजया लक्ष्मी) नेन और कृष्णा द्वारा दो बेटियां थी

मोतीलाल भी था दो कमीने बेटों के नाम शेख़ अब्दुल्ला और SYUD हुसैन द्वारा मुस्लिम महिलाओं की

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विजया लक्ष्मी SYUD हुसैन (आधा भाई और बहन) के साथ भागकर एक लड़की चंद्रलेखा था

विजयलक्ष्मी शादी आर.एस. पंडित था और दो लड़कियों नयनतारा और रीता

जवाहरलाल नेहरू विवाहित कमला कौल (consummated कभी नहीं शादी)

जवाहर लाल SARADDHA माता (कल्पित नाम) के साथ एक चक्कर था और बंगलूरू में एक अनाथालय को दे दिया बेटा था

जवाहर लाल लेडी माउंटबेटन के साथ एक चक्कर है, लेकिन बच्चों को नहीं था

जवाहर कई विदेश था और अंत में गरमी की मृत्यु हो गई

कमला कौल MANZUR अली (जो Mobark अली के बेटे जो नेहरू भी जन्मा है) और उनकी बेटी के साथ एक चक्कर था इंदिरा PRIYADARSINI नेहरू

कमला कौल फिरोज खान (नवाब खान ने अपने घर के लिए शराब की आपूर्ति के बेटे), लेकिन कोई बच्चों के साथ एक चक्कर था

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इंदिरा बिस्तर में उसे जर्मन अध्यापक के साथ शान्तिनिकेतन में पाया गया था

इंदिरा PRIYADARSINI खुद इस्लाम में परिवर्तित करने के बाद इस्लामी संस्कार फिरोज खान के अनुसार nikhahed. उसका नया नाम MAIMUNA बेगम था और दोनों उनके नाम बदल गांधी की सलाह पर एक अदालत में एक हलफनामा द्वारा इंदिरा गांधी और फिरोज गांधी भारत की जनता मूर्ख था

इंदिरा और फिरोज नाम राजीव गांधी (इस्लामी संस्कार के अनुसार वह खतना किया गया था) द्वारा एक बेटा था

इंदिरा मोहम्मद यूनुस के साथ एक चक्कर था और एक दूसरे बेटे संजीव गांधी था (बाद में संजय गांधी को बदल कार चोरी के लिए ब्रिटेन में अभियोजन पक्ष से बचने के नाम उन्होंने इस्लामी संस्कार के अनुसार खतना किया गया था.)

इंदिरा प्रसूतिविज्ञान निष्णात साथ एक चक्कर था मथाई (नेहरू स्टेनो) और एक बेटा निरस्त कर दिया गया

इंदिरा धीरेन्द्र BRAMMACHARI के साथ एक चक्कर है लेकिन बच्चों को नहीं था

इंदिरा DHINESH सिंह के साथ एक चक्कर है, लेकिन बच्चों को नहीं था

फिरोज TARAKESWARI सिन्हा के साथ एक चक्कर था

फिरोज MEHMUNA सुल्ताना के साथ एक चक्कर था

फिरोज सुभद्रा जोशी और कई दूसरों के साथ एक चक्कर था

Saturday, January 28, 2012

इस्लाम न तो धर्म है औऱ न ही संप्रदाय


इस्लाम न तो धर्म है औऱ न ही संप्रदाय ,इसके पूरे संदर्भ मैं ये एक संपूर्ण 100 प्रतिशत जीवन जीने का एक तरीका है.इस्लाम मैं धार्मिक,कानूनी,राजनीतिक,आर्थिक सामाजिक व सामरिक पहलू है.

किसी भी देश मैं इस्लामी करण का प्रारंभ होता है जब पर्याप्त मात्रा मैं मुस्लिम जनसंख्या होती है और वे इसके लिए उग्रता दिखाने की स्थिति मैं होते हैं और जब राजनीतिक रूप से जागरूक और सहनशील समाज मुस्रलिमों की कुछ धार्मिक बातों को मान लेते हैं तब उनकी कुछ और मांगें धीरे से आगे आजाती है…….ये किस तरह काम करता है…. उस देश मैं हो जब तक मुस्लिम जनसंख्या 2 प्रतिशत या कम हो तो मुस्लिम समाज एक शांतिप्रिय समाज है जो किसी भी प्रकार से अन्य नागरिकों के लिए खतरा नहीं दिखाई देता है जैसा कि ….

United States -- Muslim 0.6%,Australia -- Muslim 1.5%,,canada -- Muslim 1.9%,China -- Muslim 1.8%,Italy -- Muslim 1.5%,Norway -- Muslim 1.8%
जब ये जनसंख्या 2-5 प्रतिशत तक पहुंच जाती है तब धर्मांतरण प्रारंभ होता है,जो अक्सर अन्य धर्म के अल्पसंख्यकों और जैलों मैं अलग थलग पङे लोगों से होता है ….जैसा कि निम्नांकित है…..
Denmark -- Muslim 2%,Germany -- Muslim 3.7%,United Kingdom -- Muslim 2.7%,Spain -- Muslim 4%,Thailand -- Muslim 4.6%,प्रतिशत से ज्यादा होने पर ये अपनी जनसंख्या के अनुपात से ज्याद मांगे रखना शुरु कर देते है……जैसे वे हलाल के मांस की मांग करेंगे एक तरह से जोब सिक्यूरिटी हो गई मुस्लिमों की खाने की इंडस्ट्री मैं…..सुपरमार्केट्स पर हलाल के मांस के अलग स्टाल लगाने का दबाव बनाया जाता है अन्यथा उनके बहिष्कार की धमकियां दी जाती हैजैसा कि निम्न देशों मैं हो रहा है……
France -- Muslim 8%,Philippines -- Muslim 5%,Sweden -- Muslim 5%,Switzerland -- Muslim 4.3%,The Netherlands -- Muslim 5.5%,Trinidad & Tobago -- Muslim 5.8%

और अब समय आता है जब वे सरकार से ऐसे कानून बनाने की बात करते हैं कि उनके ऊपर सिर्फ शरियत लागू की जाये…..क्यों कि मुसलमानों का अंतिम लक्ष्य पूरे विश्व मैं शरियत लागू करना है…..

जब मुस्लिम जनसंख्या 10 प्रतिशत या ज्यादा हो जाती है तो अपनी बनाई हुई बिगङी हुई परिस्थितियों के लिये आंदोलन करना शुरू करते हैं….और यदि कोई गैर मुसलमान इस्लाम के प्रति असम्मान जताते है तो ये धमकियां देना शुरु कर देते हैं और दंगा भङकाने की कोशिश करते हैं. जैसा कि एम्सटर्डम मैं हुआ जहां मुहम्मद साहब का कार्टून बनाने के बाद धमकियां दी गई……..

Guyana -- Muslim 10%,India -- Muslim 13.4%,Israel -- Muslim 16%,Kenya -- Muslim 10%,Russia -- Muslim 15%

और जब जनसंख्या 20 प्रतिशत या उससे अधिक हो तो छोटी छोटी बात पर दंगा करना….जिहादी ग्रुप बनाना,हत्यायें करना ….मंदिर और चर्च जला देना आम बात हो जाती है जैसा कि ……
Ethiopia -- Muslim 32.8%
At 40%, nations experience widespread massacres, chronic terror attacks, and ongoing militia warfare, such as in:
Bosnia -- Muslim 40%,Chad -- Muslim 53.1%,Lebanon -- Muslim 59.7%

60 प्रतिशत से ऊपर वाली जनसंख्या वाले देशों मैं गैर मुस्लिमों को औऱ अन्य मुस्लिम समुदाय जैसे पाकिस्तान मैं अहमदिया पर स्वायंभू तरीके से मुकदमें चलाकर उन्हें परेशान किया जाता है औऱ एक तरह से उनकी सामुहिक हत्यायें आदि करके उनको खत्म किया जाता है…..औऱ इसके लिए हथियार बनाया जाता है शरिया कानून को औऱ जजिया कर जो कि काफिरों पर लगाया गया टैक्स है कि वे शांति से जी सकें…….जैसा निम्न देशों मैं हो रहा है……
Albania -- Muslim 70%,Malaysia -- Muslim 60.4%,Qatar -- Muslim 77.5%,Sudan -- Muslim 70%

औऱ 80 प्रतिशत के बाद हिंसक जिहाद औऱ हत्यायें रोजमर्रा का काम हो जाता है…..याने राज्य द्वारा प्रायोजित सामुहिक हत्यायें क्यों कि काफिरों को खत्म करना इन देशों की मूल नीति होती हैऔर 100 प्रतिशत मुस्लिम जनसंख्या लक्ष्य जैसा कि निम्न देशों मै हो रहा है….
Egypt -- Muslim 90%,Gaza -- Muslim 98.7%,Indonesia -- Muslim 86.1%,Iran -- Muslim 98%,Iraq -- Muslim 97%,Jordan -- Muslim 92%,Morocco -- Muslim 98.7%,Pakistan -- Muslim 97%,Palestine -- Muslim 99%,Syria -- Muslim 90%,Tajikistan -- Muslim 90%,Turkey -- Muslim 99.8%,United Arab Emirates -- Muslim 96%

और जहां संपूर्ण लक्ष्य प्राप्तकर लिया जाता है वहां दार –ए -सलाम के रूप मैं शांति का प्रवेश होता है…..और वहां पूरी तरह से शांति औऱ शांति ही होनी चाहिये क्यों कि हर व्यक्ति मुसलमान है…..विध्यालयों की जगह सिऱ्फ मदरसे होते हैं औऱ कोरान ही सिर्फ साहित्य होता है……..चारों और इस्लाम का बोलबाला होता है…..सिर्फ कुरान सुनाई देती है जैसा इन देशों मैं हुआ है…….

पर दुर्भाग्य से शांति कभी नहीं आती जैसा कि इन देशों मैं हुआ है…जिनमें बिना किसी अपवाद के सबसे कट्टर मुसलमान रहते हैं और जो अपनी खून की प्यास को थोङे कम कटेटर मुसलमानों के खून से बुझाते हैं…..जिसके अनेक कारण गिनाये जा सकते हैं

Afghanistan -- Muslim 100%
Saudi Arabia -- Muslim 100%
Somalia -- Muslim 100%
Yemen -- Muslim 100%'

Before I was nine I had learned the basic canon of Arab life. It was me against my brother; me and my brother against our father; my family against my cousins and the clan; the clan against the tribe; the tribe against the world, and all of us against the infidel. -- Leon Uris, 'The Haj'

ये समझना बहुत ही महत्वपूर्ण है कि जिन देशों मैं मुस्लिम जनसंख्या 100 प्रतिशत से ठीक ठाक कम होती है जैसे फ्रांस जहां अल्पसंख्यक मुस्लिम जनसंख्या अपनी ही बनाई हुई बस्तियों मैं रहती है जहां वे शरियत कानून के अनुसार रहते हैं….जहां पुलिस प्रवेश भी नहीं करती………जहां न पुलिस न न्यायालय न विध्यालय और न हीं गैर मुस्लिमों के लिए कोई धार्मिक सुविधा होती है….ऐसे मैं मुस्लिम समाज के अन्य वर्गों के साथ मिल भी नहीं सकते ……बच्चे मदरसों मैं जाते हैं और केवल कुरान सीखते हैं जिसमें वो जान पाते हैं कि काफिर की सजा केवल मौत है……………

आज 1.5 अरब मुसलमान विश्व की जनसंख्या का 22 प्रतिशत है….पर उनकी जन्म दर ईसाई,हिंदु,बौंद्ध,यहूदी और अन्य सभी धर्मों के मानने वालो से अधिक हैइस सदी के अंत तक मुसलमान विश्व की जनसंख्या के 50 प्रतिशत से ज्यादा होंगे……….

सोचो………और सोचो…………….फिर क्या होगा…..

Adapted from Dr. Peter Hammond's book: Slavery, Terrorism and Islam: The Historical Roots and Contemporary Threat.

Wednesday, January 25, 2012

इंडोनेशिया के हिन्दू इतिहास में जुड़ा नया अध्याय


पूवी ईशांत देश इंडोनेशिया आज एक ईस्लामिक देश है और यहाँ मुस्लिम जनसंख्या सर्वाधिक है, परंतु इस देश का इतिहास भी हिन्दू धर्म की गौरवगाथा का प्रमाण पेश करता है. और अब खुदाई के दौरान दिखे एक अति प्राचीन मंदिर के अवशेष इस देश के हिन्दू इतिहास में कई नए तथ्य जोड़ सकता है.

इंडोनेशिया के योगकर्ता शहर के ईस्लामिक विश्वविद्यालय में नए पुस्तकालय की नीवं डालने के लिए खुदाई शुरू की गई तो पता चला कि वहाँ की जमीन स्थिर नहीं है. मजदूरों ने सावधानीपूर्वक और अधिक खुदाई की तो एक प्राचीन मंदिर की दिवारें दिखाई दी. इसके बाद तेज वर्षा की वजह से मंदिर की पृष्ठभूमि और गर्भगृह दिखाई दिया जहाँ भगवान गणेश की मूर्ति स्थापित थी.

इसके बाद इस स्थान का कब्जा इंडोनेशिया के पुरातत्व विभाग ने ले लिया. कुछ सप्ताह की खुदाई के बाद पता चला है कि यह मंदिर करीब 1000 वर्ष पुराना है. अब पुरातत्व विभाग ने इसे अमूल्य धरोहर घोषित कर दिया है. पुरातत्व विभाग का मानना है कि यह मंदिर इंडोनेशिया में ईस्लाम के प्रवेश से पहले की संस्कृति के बारे में कई महत्वपूर्ण जानकारियाँ प्रदान कर सकता है.

क्यों है यह मंदिर महत्वपूर्ण?

अभी तक इंडोनेशिया में खुदाई के दौरान कोई साबुत मंदिर नहीं मिला था. लेकिन यह पहला मंदिर है जो अपनी वास्तविक स्थिति में है. पुरातत्व विभाग के डॉ. बुद्धि सानकोयो के अनुसार यह एक महत्वपूर्ण खोज है क्योंकि यह मंदिर अभी भी अपनी मूल स्थिति में है और सभी मूर्तियाँ भी अपने मूल स्थान पर है.

अब इस स्थान पर गणेश की मूर्ति के अलावा शिवलिंग, नंदी गाय और कई अन्य मूर्तियाँ भी मिली है.

डॉ. बुद्धि का मानना है कि 10वीं सदी में किसी ज्वालामुखी के फटने से यह मंदिर उसके लावा में दब गया होगा और उसी लावा की वजह से इतने वर्षों के बाद भी सुरक्षित रह पाया होगा.

अभी इस मंदिर की खुदाई और सरंक्षण का कार्य चल रहा है और बाद में इसे आम जनता के लिए खोला जाएगा.

इंडोनेशिया के इतिहास में हिन्दू:

इंडोनेशिया द्वीपसमूह सातवीं शताब्दी से एक महत्वपूर्ण व्यापारिक क्षेत्र रहा है. यहाँ के शासक पश्चिमी देशों के साथ व्यापार व्यवहार करते थे. सातवीं से दसवीं शताब्दी के बीच वे हिन्दू और बोद्ध धर्म के सम्पर्क में आए. श्रीविजय राजशाही ने चीन और भारत के साथ व्यापारिक संबंध स्थापित किए थे. धीरे-धीरे भारतीय सांस्कृतिक, धार्मिक और राजनीतिक असर इंडोनेशिया पर छाने लगा और कालांतर में हिंदू और बौद्ध राज्यों का उत्कर्ष हुआ.

13वीं शताब्दी में अरब के मुस्लिम व्यापारी यहाँ आए और इसके साथ ही ईस्लाम का भी आगमन हुआ. आज यहाँ मुस्लिम आबादी बहुमत में है.


साभार - तरकश

Tuesday, January 24, 2012

राईट बन्धुओं से पहले ही भारत में विमान का आविष्कार हो चुका था !


हिन्दू धर्म से संबंधित विभिन्न धार्मिक कथा कहानियों में इस प्रकार के उल्लेख मिलते हैं कि प्राचीन काल में विभिन्न देवी-देवता,यक्ष,गंधर्व,ऋषि-मुनि इत्यादि विभिन्न प्रकार के विमानों द्वारा यात्रा भ्रमण किया करते थे। जैसे कि रामायण में पुष्पक विमान का वर्णन आता है। महाभारत में भी श्री कृष्ण, जरासंध आदि के विमानों का वर्णन आता है। इसी प्रकार से श्रीमहाभागवत में कर्दम ऋषि की एक कथा आती है कि तपस्या में तल्लीनता के कारण वे अपनी पत्नी की ओर अधिक ध्यान नहीं दे पाते थे। किन्तु कुछ समय बाद जब उन्हे इसका भान हुआ तो उन्होंने अपने विमान के द्वारा उसे संपूर्ण विश्व का भ्रमण कराया। 

देखा जाए तो इन उपरोक्त वर्णित कथाओं को जब आज का तार्किक व प्रयोगशील व्यक्ति सुनता,पढ़ता है तो उसके मन में स्वाभाविक रूप से ये विचार आता है कि यें सब कपोल कल्पनाएं हैं, मानव के मनोंरंजन हेतु गढ़ी गई कहानियॉ मात्र है। ऐसा विचार आना सहज व स्वाभाविक है, क्योंकि आज देश में इस प्रकार के कहीं कोई प्राचीन अवशेष नहीं मिलते, जों ये सिद्ध कर सकें कि प्राचीनकाल में मनुष्य विमान निर्माण की तकनीक से परिचित था। किन्तु यदि भारतीय ग्रन्थों का सही तरीके से अध्ययन, मनन करें तो ये स्पष्ट हो जाता है कि युद्ध कौशल में प्रयोग होने वाले विभिन्न प्रक्षेपात्रों, अदृ्श्य अस्त्रों-शस्त्रों आदि की उपलब्धता भारत में विज्ञान के चर्मोत्कर्ष की ओर संकेत करती है। इसी क्रम में प्राचीन भारतीय विमान शास्त्र पर आज ये लेख प्रस्तुत कर रहा हूँ जिससे कि आप लोगों को प्राचीन भारतीय ज्ञान-विज्ञान की एक झलकी मिल सके।  

मैं यह दृ्डतापूर्वक कह सकता हूँ कि विभिन्न वैज्ञानिक निर्माण, आविष्कार आदि जितनी भी लोकोपयोगी विद्याएं हैं---ये सभी भारत की ही देन हैं। समुद्रतल तथा आकाशमंडल की परिधि में उडना, विभिन्न लोकों में गमन, विशाल भवन,यान, वाहन आदि का बनाना इत्यादि सम्पूर्ण यान्त्रिक संस्कृ्ति, आविष्कारों, खोजों की आदि विकासस्थली हमारी यह भारतभूमी ही है। व्यास,वशिष्ठ,विश्वामित्र,पाराशर, याज्ञवल्क्य, जैमिनी, अत्रि, वत्स, नारद, भारद्वाज, शकटायन, स्फोटायन, प्रभूति इत्यादि मन्त्रदृ्ष्टा ऋषि ही यन्त्रों के भी आविष्कारक तथा निर्माता रहे हैं । महर्षि अत्रि और वत्स तो अपने समय के तत्वान्वेषी वैज्ञानिक मनीषी थे तथा सर्वप्रथम इन्ही दो मनीषियों नें चन्द्र सूर्य ग्रहण विज्ञान और आकर्षण विज्ञान का पता लगाया था। जिसका विशद विवेचन यहाँ तो असंभव है। खेद है कि आज अपने इस गौरवपूर्ण अध्यायों से हम अपरिचित होकर उक्त तथ्यों के आविष्कार का श्रेय पश्चिमी जगत को देते हैं।  ओर जो थोडे बहुत कुछ बहुत लोग इन तथ्यों से परिचित हैं भी, वो भी अपनी अकर्मण्यता से इन अमूल्य तथ्यों को विश्व के प्रबुद्ध समाज के सामने लाने का कोई प्रयास नहीं करते।  लेकिन अगर कोई भला आदमी प्रयास करता भी है तो ये हिन्दूस्तान में बैठे पश्चिमबुद्धि काले अंग्रेज जो बैठे हैं, बिना जाने समझे इन तथ्यों को नकारने में। सबसे पहले तो इन तथाकथित विज्ञानबुद्धियों से ही निपटने में बेचारे का हौंसला पस्त हो चुका होता है--- शेष दुनिया को कोई क्या खाक समझाएगा।
यह निर्विवाद तथ्य है कि प्राचीन भारतीय ऋषि महर्षियों नें केवल धर्मव्यवस्था, दर्शन, ज्योतिष तथा कर्मकांड में ही नहीं बल्कि स्थापत्य कला, चिकित्साविज्ञान, खगोलविज्ञान, यन्त्रनिर्माण इत्यादि वैज्ञानिक क्षेत्र में भी विश्व का सफल नेतृ्त्व किया था।

महर्षि भारद्वाज प्रणीत "यन्त्र सर्वस्व" नामक ग्रन्थ मननीय है।
उक्त ग्रन्थ के वैमानिक प्रकरण में सामरिक एवं नागरिक दोनों प्रकार के विमानों के निर्माण का इतिहास  यन्त्र, उपयन्त्र, शत्रु के साथ युद्ध करने की विधि, अपने निर्माण की रक्षा, शत्रु के ऊपर धुँआ छोडना, उनको डराने के लिए भीषण आवाज करना, आग्नेयास्त्रों का प्रयोग करना इत्यादि विभिन्न विषयों का सांगोपांग वर्णन है। महर्षि भारद्वाज के शब्दों में पक्षियों की भान्ती उडने के कारण वायुयान को विमान कहते हैं। वेगसाम्याद विमानोण्डजानामिति ।।
विमानों के प्रकार:- शकत्युदगमविमान अर्थात विद्युत से चलने वाला विमान, धूम्रयान(धुँआ,वाष्प आदि से चलने वाला), अशुवाहविमान(सूर्य किरणों से चलने वाला), शिखोदभगविमान(पारे से चलने वाला), तारामुखविमान(चुम्बक शक्ति से चलने वाला), मरूत्सखविमान(गैस इत्यादि से चलने वाला), भूतवाहविमान(जल,अग्नि तथा वायु से चलने वाला)।
इतना ही नहीं इसी वैमानिक प्रकरण के "अहाराधिकरण" नामक खण्ड में विमानयात्रियों एवं चालकों के आहार अर्थात भोजन व्यवस्था का पूर्ण विवेचन किया गया है। उक्त आहाराधिकरण का पहला सूत्र है "आहार कल्पभेदात"  अर्थात वायुयान यात्रियों को आशानकल्प नामक कहे ग्रन्थ में कहे गए अनुसार ही भोजन व्यवस्था करनी चाहिए। यहाँ जिस आशानकल्प नामक ग्रन्थ का जिक्र किया गया है, दुर्भाग्य से वो ग्रन्थ आज लुप्त हो गया है। लेकिन जब महर्षि भारद्वाज नें अपने ग्रन्थ में इसका जिक्र किया है तो इतनी बात तो अवश्य स्पष्ट हो जाती है कि वो ग्रन्थ उनसे भी पूर्वकालीक तथा अत्यन्त प्राचीन है और साथ ही प्रमाणिक एवं शिष्ट सम्मत भी।
आगे महर्षि लिखते हैं कि विमान में भोजन व्यवस्था सर्वदा समयानुसार होनी चाहिए साथ ही भोजन को आकाश के दूषित वातावरण एवं विमान के विषैले गैस के प्रभाव से भी बचाना चाहिए।  यदि विमान में किसी कारणवश  स्थूल भोजन न मिले या असुविधा हो अथवा अरूचिकर हो तो हल्का एवं सूखा भोजन भी ग्रहण किया जा सकता है। रूचि के अनुसार कन्दमूल फल इत्यादि भी ग्राह्य हैं ।
महर्षि अगस्तय कृ्त "अगस्त्यविमानसंहिता" मे भी यह सिद्धान्त स्थिर किया गया है कि जिस प्रकार जल में नौकाएं तैरती हैं, उसी प्रकार अन्तरिक्ष में वायुभार आदि के सन्तुलन से जो यान गमनागमन करे ---वह विमान है। जले नौकेव यदयान विमान व्योम्नि कीर्तीतम ।।


खैर ये तो बात हुई अति प्राचीन काल की लेकिन यदि मैं आप लोगों से ये कहूँ कि इसी आधुनिक युग में जब 17 दिसंबर सन 1903 में राईट बन्धुओं द्वारा विमान का आविष्कार किया गया तो उससे 8 वर्ष पूर्व ही भारत में विमान का आविष्कार हो चुका था तो शायद आप लोग विश्वास नहीं करेंगें। आप में से कुछ लोग इसे शायद निरा झूठ या "गप्प" भी कह दें तो कोई अतिश्योक्ति न होगी । लेकिन ये बिल्कुल सच है । जी हाँ, सन 1895 में भारतवर्ष में मुम्बई के चौपाटी बीच पर पंडित श्री शिवकर बापू तलपदे जी(जो कि आजीवन भारतीय पद्धति से विमान निर्माण में लगे रहे) ने सम्पूर्ण भारतीय तकनीक से निर्मित " मरूत्सखा" नामक विमान बनाकर उसे 18 फिट ऊपर आकाश में उडाया भी था । महाराज सयाजीराव गायकवाड तथा श्रीरानाडे आदि विशिष्ट व्यक्तियों के समक्ष सम्पन इस कार्यक्रम का सम्पूर्ण सचित्र विवरण तात्कालिक केशरी न.भा.टा. तथा धर्मयुग के प्रथम अंक में प्रकाशित हुआ था । महाराजा बदौडा ने इस को आगे बढाने के लिए आर्थिक सहायता की भी घोषणा की थी...लेकिन ब्रिटिश सरकार के चलते यह संभव नहीं हो पाया। बाद में ब्रिटेन की "रेले" नाम की एक कम्पनी नें उस विमान का  ढाँचा मय सभी अधिकार खरीद लिए । 

अन्त में मैं आप लोगों से जानना चाहूँगा कि क्या उपरोक्त विवरण आपको ये विश्वास नहीं दिलाता कि प्राचीन काल में विमान विद्या कपोल कल्पना न होकर एक यथार्थ था। बेशक कुछ लोग मरते दम तक भारतीय ज्ञान-विज्ञान की सर्वोच्चता को अस्वीकार कर इन्हे कपोल कल्पना ही मानते रहें,लेकिन वास्तविकता तो ये है कि   ये सच है ओर ऎसे ही न जाने कितने अगिणित विश्वासों को सार्थक करने एवं अपनी सत्यता की सिद्धी हेतु हमारे सैंकडों हजारों ग्रन्थ आज भी सत्यन्वेषियों की राह देख रहे हैं।




विमान्सस्त्र से कुछ चित्र आपके लिए -








Monday, January 23, 2012

इन महाशय ने विवेकानन्द स्मारक न बनने देने, एवं रामसेतु को तोड़ने की योजना के लिए जी-तोड़ प्रयास किये थे

केरल के मूल निवासी 66 वर्षीय आर्चबिशप जॉर्ज एलेंचेरी को गत सप्ताह पोप ने कार्डिनल की पदवी प्रदान की। वेटिकन में की गई घोषणा के अनुसार सोलहवें पोप बेनेडिक्ट ने 22 नए कार्डिनलों की नियुक्ति की है। रोम (इटली) में 18 फ़रवरी को होने वाले एक कार्यक्रम में एलेंचेरी को कार्डिनल के रूप में आधिकारिक शपथ दिलाई जाएगी।

जॉर्ज एलेंचेरी, कार्डिनल नियुक्त होने वाले ग्यारहवें भारतीय हैं। वर्तमान में भारत में पहले से ही दो और कार्डिनल कार्यरत हैं, जिनका नाम है रांची के आर्चबिशप टेलीस्पोर टोप्पो एवं मुम्बई के आर्चबिशप ओसवाल्ड ग्रेसियस। हालांकि भारत के ईसाईयों के लिये यह एक गौरव का क्षण हो सकता है, परन्तु इस नियुक्ति (और इससे पहले भी) ने कुछ तकनीकी सवाल भी खड़े कर दिये हैं।

जैसा कि सभी जानते हैं, "वेटिकन" अपने आप में एक स्वतन्त्र राष्ट्र है, जिसके राष्ट्र प्रमुख पोप होते हैं। इस दृष्टि से पोप सिर्फ़ एक धर्मगुरु नहीं हैं, बल्कि उनका दर्जा एक राष्ट्र प्रमुख के बराबर है, जैसे अमेरिका या भारत के राष्ट्रपति। अब सवाल उठता है कि पोप का चुनाव कौन करता है? जवाब है दुनिया भर में फ़ैले हुए कार्डिनल्स…। अर्थात पोप को चुनने की प्रक्रिया में कार्डिनल जॉर्ज एलेंचेरी भी अपना वोट डालेंगे। यह कैसे सम्भव है? एक तकनीकी सवाल उभरता है कि कि, क्या भारत का कोई मूल नागरिक किसी अन्य देश के राष्ट्र प्रमुख के चुनाव में वोटिंग कर सकता है? इसके पहले भी भारत के कार्डिनलों ने पोप के चुनाव में वोट डाले हैं परन्तु इस सम्बन्ध में कानून के जानकार क्या कहते हैं यह जानना दिलचस्प होगा कि भारत के संविधान के अनुसार यह कैसे हो सकता है? यदि पोप "सिर्फ़ धर्मगुरु" होते तो शायद माना भी जा सकता था, लेकिन पोप एक सार्वभौम देश के राष्ट्रपति हैं, उनकी अपनी मुद्रा और सेना भी है…

क्या सलमान रुशदी भारत में वोटिंग के अधिकारी हैं? क्या चीन का कोई नागरिक भारत के चुनावों में वोट डाल सकता है? यदि नहीं, तो फ़िर कार्डिनल एलेंचेरी किस हैसियत से वेटिकन में जाकर वोटिंग करेंगे?

नोट : जिस प्रकार किसी सेल्समैन को 100% टारगेट प्राप्त करने पर ईनाम मिलता है, उसी प्रकार आर्चबिशप एलेंचेरी को कार्डिनल पद का ईनाम इसलिए मिला है, क्योंकि उन्होंने पिछले दो दशकों में कन्याकुमारी एवं नागरकोविल इलाके में धर्म परिवर्तन में भारी बढ़ोतरी की है। ज्ञात रहे कि एलेंचेरी महोदय वही "सज्जन" हैं जिन्होंने कन्याकुमारी में स्वामी विवेकानन्द स्मारक नहीं बनने देने के लिए जी-तोड़ प्रयास(?) किये थे, इसी प्रकार रामसेतु को तोड़कर "सेतुसमुद्रम" योजना को सिरे चढ़ाने के लिए करुणानिधि के साथ मिलकर एलेंचेरी महोदय ने बहुत "मेहनत"(?) की। हालांकि डॉ सुब्रह्मण्यम स्वामी के प्रयासों तथा हिन्दू संगठनों के कड़े विरोध के कारण वह दोनों ही "दुष्कृत्य" में सफ़ल नहीं हो सके।

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FROM - IBTL 
सुरेश चिपलूनकर ( लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं ) एवं यह उनके व्यक्तिगत विचार हैं

 

जम्मू और कश्मीर विधानसभा की अवधि ६ साल और अन्य राज्यों की ५ साल क्यों ?

ShreshthBharat द्वारा 21 अगस्त 2011 को 09:33 बजे पर
सच जो आप जानना चाहते है ! http://www.blog.shreshthbharat.in/nl/9-11/list.html
  1. केरल में विधायक, संसद और मंत्री अल्लाह,यीशु के नाम से सपथ लेते है | अगर हिंदू राम या कृष्ण के नाम से ले तो संबिधान के खिलाफ है ?
  2. अरबी भाषा को प्रमोट करने के लिए सरकार पैसे खर्च कर रही है | लेकिन संस्कृत पर क्यों नही ? क्या अरबी भाषा, संस्कृत के तुलना में अधिक राष्ट्रीय है ?
  3. IMTD Act क़ानूनी अधिकार से असम में बंगलादेशियो को भारत में बसने और नागरिक बनने का अधिकार देता है | तो जम्मू और कश्मीर में शेष भारतीय को बसने का अशिकर क्यों नही ? यह दोगली निति क्या है ?
  4. जम्मू और कश्मीर कि जनसंख्या लगभग एक करोड है जिन्हें २४००० करोड रुपये कि सहायता दी गयी है | यानी कि पर हेड २४००० रुपये | जबकि शेष राज्यों को इनसे ५% कम कि सहायता दी जाती है |क्या यह राष्ट्र विरोशियो के लिए इनाम नही है ?
  5. यदि पेंटिंग करना गैर- इस्लामिक है तो मुसलमानों ने एम् एफ हुसैन के खिलाफ कितने फतवे जारी किये गए थे ? क्या वो गैर- इस्लामिक कार्य नही किया था ?
  6. यदि इस्लाम में गायन, संगीत और नृत्य गैर- इस्लामिक है ( क्योकि इस्लाम एक गंभीर धर्म है ) तो बहुत “खान” फिल्म में अभिनय करते है | इनके खिलाफ फतवा क्यों नही जारी किया गया ?
  7. क्या आप को लगता है कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक देश रहेगा यदि मुसलमानों का बहुमत हो जाय तो ?
  8. हॉउस आफ कामंस, आस्ट्रेलिया संसद और ह्वाईट हॉउस आदि में जब दीपावली और जन्माष्टमी मनाया जाता है तो भारत के संसद में क्यों नही मनाया जाता है ? क्या हम संयुक्त राष्ट्र, अमेरिका, ब्रिटेन और आस्ट्रेलिया कि तुलना में अधिक धर्मनिरपेक्ष है ?
  9. यदि सांप्रदायिक दंगे भारत में आर एस एस, विहिप, बजरंग दल आदि के कारन होता है तो “ पाकिस्तान, तुर्की, अफगानिस्तान, इंडोनेशिया, चेचन्या, चीन, रूस, ब्रिटेन, स्पेन, साईप्रस आदि में किसकी वजह से दंगे होते है ?” जब कि वहाँ पर आर एस एस / विहिप नही है |
  10. एक पूर्व राष्ट्रपति, दो पूर्व प्रधानमंत्रियों, साधुओ,और संतो द्वारा कांची के संकराचार्य कि गिरफ्तारी के खिलाफ प्रदर्शन किया है | लेकिन मिडिया का कहना है कि “वहाँ बिलकुल कोई विरोध नही हुआ है”| क्या आप को लगता है कि केवल हिन्=हिंसा ही लोगो की [पीड़ा मापने का पैमाना है ?
  11. क्या आप को विश्वास है कि इस्लाम और ईसाईयत को सर्वधर्म समभाव में विश्वास है ? यदि हाँ, तो धर्म रूपांतरण में विश्वास क्यों करते है ?
  12. ईश्वर अल्लाह तेरे नाम – आप मुझे एक मुसलमान दिखाए जो इससे सहमत हो ?
  13. क्या आप को नही लगता है कि “ सेक्युलर मुस्लिम एक मिथ्या नाम है ? एक व्यक्ति या तो सेक्युलर या मुसलमान हो सकता है, दोनों नही ? एक मुस्लिम ( जो केवल अल्लाह में विश्वास करता है) धर्म-निरपेक्ष(कई परमेश्वर में विश्वास) नही हो सकता है |
  14. क्या आप जानते है कि “ तथाकथित धर्मनिरपेक्ष मौलाना वहीदुद्दीन, जब भारतीय सैनिक कारगिल में लड़ रहे थे तो, उनसे सैनिको के लिए प्रार्थना करने को कहा गया तो इंकार कर दिया ? क्योकि भारतीय सैनिक मुसलमानों से लड़ रहे थे ?” ( बाद में सोनिया और प्रियंका ने उसके अंतिम संस्कार में भाग ली थी )
  15. संयुक्त राष्ट्र चार्टर का कहना है कि “ अल्पसंख्यक का मतलब पूरी आबादी का अधिक से अधिक १०% होता है | मुसलमान, जो लगाभाग १८% से ऊपर है को एक अल्पसंख्यक कैसे कहा जा सकता है ?
  16. क्या आप को विश्वास है कि “कम्युनिस्टों को भारत से प्यार है ?”, जब कि वे स्वीकार करने से मना करते है कि १९६२ में चीन भारत पर हमलावर था ?
  17. ये कैसे होता है कि “ एक मुस्लिम परिवार मुख्य रूप से हिंदू इलाके में शांति से रहता है, जबकि एक मुस्लिम बस्ती में एक हिंदू परिवार ऐसा करने में सक्षम नही है ?
  18. मुस्लिम बहुत क्षेत्रो में ईसाई मिशिनारिज क्यों नही सामाजिक सेवाए शुरू कराती है ? क्योकि वहाँ निवेश पर पर्याप्त फल नहीं मिलेगा |
  19. क्या आप जानते है कि “ भारत एक मात्र देश है जो खुले तौर पर बंगलादेश के घुसपैठियों को आमंत्रित किया है | बिहार, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल के सरकारों ने तत्काल उन्हें रासन कार्ड उपलब्ध कराके मतदाता बना दिया |”
  20. दंगे शुक्रवार की नमाज के बाद ही ज्यादातर हुए है ( जैसे मरद, केरल) | क्या यह इमामों के ज्वलंत उपदेशो की वजह से नही है ?
  21. सभी हिंदू बहुल क्षेत्र शांतिपूर्ण है, लेकिन सभी हिंदू अल्पसंख्यक क्षेत्र समस्याग्रस्त है – जम्मू और कश्मीर, उत्तर – पूर्वी भारत आदि | क्या आप इसकी व्याख्या कर सकते है कि ऐसा क्यों ?
  22. एक विधायक, सी. पी. शाजी ने केरल विधानसभा में कहा कि “ वो हाथ काट दिया जायेगा, जो शरियत के एक अक्षर को छुयेगा” | क्या आप इससे सहमत है ?
  23. क्या आप जानते है कि “भारत में अवैध रूप से आये मुस्लिम अप्रवाशी २५ लोकसभा और १२० विधानसभा सीटों के चुनाव में एक निर्णायक कारक बन गए है ? और वे एक विशेष पार्टी के लिए एकजुट हो के मतदान करते है – कंग्रस, राजद, सपा, एमएल, या साम्यवादी |”
  24. एक पाकिस्तानी भारतीय हो सकता है ? जब वह जम्मू और कश्मीर के किसी एक लडकी से शादी कर ले, लेकिन इसके विपरीत जब वही लड़की भारत के किसी भी हिस्से के एक हिंदू से शादी करे तो वह जम्मू और कश्मीर की नागरिक नहीं हो सकते है, जम्मू और कश्मीर कि नागरिकाता खो देती है ? यह किस तरह का कानून है ?
  25. अयोध्या मामले में, सुप्रीम कोर्ट ने विश्व हिंदू परिषद पूछताछ की लेकिन बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी या आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड से सवाल नही की? क्या यह सुप्रीम कोर्ट का दुहरा मापदंड नही है ?
  26. जब आप नरेन्द्र मोदी जैसे लोगो से तुच्छ आधार पर मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा मांग रहे है तो आप क्यों नही जम्मू और कश्मीर के मुख्यमंत्री से इस्तीफा माँगते है ? जहां पर हजारों सैनिक आतंकवादियों द्वारा मार दिए गए है और तो और ४ लाख हिन्दुओ का सफाया कर दिया गया है |
  27. लोकपाल कश्मीर मे नहीं लागू होगा 
  28. जम्मू और कश्मीर का पूर्व मुख्यमंत्री फारुख अब्दुल्ला एक ईसाई से शादी किया और वर्तमान मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला एक हिंदू लडकी से शादी करके आनंदित थे, लेकिन जब उसकी बेटी एक हिंदू लड़के से शादी कर ली तो उसका परित्याग कर दिया गया | क्या यही धर्मनिरपेक्षता का पहचान है ?
  29. कश्मीर मे सोनिया का सांप्रदायिक हिंसा बिल कानून लागू नहीं होगा क्योंकि वहाँ अल्प संख्यक हिन्दू - सिख है वे भी मात्र 2-3 हजार
  30. भारतीय कानून के अनुसार “ मानव अंगों को किसी भी पार्टी के चुनाव चिन्ह के रूप में नही लिया जा सकता है” तो कैसे कांग्रेस पार्टी को ‘हाथ’ का प्रतिक आवंटित किया गया है ? यह कानून के खिलाफ नही है ?
  31. दिल्ली इमाम सैयद बुखारी के घोषणा थी कि तालिबान सभी मुसलमानों के लिए आदर्श है और ओसामा बिन लादेन नायक ? क्या आप इस धर्मनिरपेक्षता पर विचार करेंगे ?
  32. जम्मू और कश्मीर के संसदीय चुनाव के लिए २ लाख हिंदू वयस्क मतदाता है | लेकिन विधानसभा के लिए नही ? क्यों ?
  33. जम्मू और कश्मीर विधानसभा की अवधि ६ साल और अन्य राज्यों की ५ साल क्यों ?
  34. बंगलादेश में हिंदू लड़किया पीटी जाती है, उनके साथ गैंग रैप किया जाता है | प्रतिदिन मंदिरों को जलने या नष्ट करने कि खबरे पढैते होंगे | क्या हमारे धर्मनिरपेक्षतावादी और मानवाधिकारी कार्यकर्ताओ को इनके लिए आवाज़ नही उठानी चाहिए ? क्या सिर्फ मुसलमानों के लिए ही मानवाधिकार है ?
  35. क्या आप जानते है कि “ इस्लाम राष्ट्रवाद और राष्ट्रिय सीमाओ में विश्वास नही करता है | यह पूरी दुनिया को इस्लाम के तहत दारुल हरब से दारुल इस्लाम तक लाना चाहते है ?”
  36. क्यों मुस्लिम मस्जिद और मदरसे में जाते है न कि स्कूल और कालेज में ? क्या मदरसा भी वैज्ञानिक और इंजिनियर तैयार करता है ? (सेक्युलर नेताओ द्वारा मुसलमानों को अलग से आरक्षण के लिए अपना सर पिटने के सन्दर्भ में )
  37. मुहर्रम जुलूस हिंदू बाहुल्य क्षेत्रो से लाया जारहा है लेकिन हिंदू धार्मिक जुलूस मुस्लिम इलाको से अनुमति नही है क्यों ? क्या यह सम्रदायिक बटवारे को स्थायी नही करता है ?
  38. क्या आपको लगता है कि नेहरू परिवार ही एक परिवार है जो आजादी के लिए लड़े या अन्य स्वतंत्रता सेनानियों ke भी थे? जैसे भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, मदनलाल धींगरा ,वन्शिनाथान, चापेकर ब्रदर्स, वीर सावरकर, राज गुरु, सुभाष चंद्र बोस, उधम सिंह आदि |
  39. मल्लापुरम ( केरल) में , एक डाक्टर ने पाया कि मुस्लिम महिलाओ कि तीन पीढियां बेटी-१३, माँ-२६ और दादी – ३९ सभी गर्भवती है तथा प्रसव के लिए भारती कराया | क्या आप को भी लगता है कि मुसलमानों के लिए परिवार नियोजन अनावश्यक है ?
  40. रामायण के लेखक ऋषि वाल्मीकि एक डाकू थे, उसी तरह महाभारत के लेखक वेड व्यास एक मछुवारे थे | दोनों महाकाव्यो और लेखक हिन्दुओ द्वारा प्रतिष्ठित है | क्या अब भी लगता है कि हिंदू धर्म जातिवाद का समर्थन करता है ?
  41. २००२ में कर्नाटक सरकार मंदिरों द्वारा प्राप्त ७२ करोड रुपयों में से ५० करोड मदरसों को, १० करोड चर्च को, १० करोड मंदिरों को दिया गया | मदरसो (आतंकवादी कारखाना ) और चर्चो के विकास के लिए हिन्दुओ का पैसा क्या देना चाहिए ?
  42. जब अफगानिस्तान में तालिबान, बुद्ध प्रतिमा को ध्वस्त कर दिया, तो टाइम्स ऑफ इंडिया ने लिखा है कि यह बाबरी मस्जिदके विध्वंस की प्रतिक्रिया में था. क्या आप टाइम्स ऑफ इंडिया द्वारा के इस औचित्य से सहमत? जैसे को तैसा के लिए ठीक है? तो फिर तुम क्यों गोधरा कांड की प्रतिक्रिया में गुजरात दंगों की आलोचना करते हो ?
  43. पांडिचेरी में एक मुस्लिम को दफनाने से इनकार कर दिया गया था क्योंकि वह प्रभु मुरुगा के लिए एक मंदिर का निर्माण किया था क्या आप को भी लगता है कि "धर्म एक दूसरे से नफरत नहीं सिखाते हैं"?
  44. १९८९ में कांग्रेस के चुनावी घोषणापत्र में राजीव गाँधी ने घोषणा की कि “ अगर मिजोरम में कांग्रेस सत्ता में आई तो यहाँ बाईबल के अधर पर शिक्षाए दी जायेगी (?)” यदि यह सांप्रदायिक नही है तो क्या है ?
  45. वर्ल्ड मुस्लिम अल्पसंख्य समुदाय के अध्यक्ष, कुवैत के शेख अल सईद युसूफ सयेद हासिम रिफाई को केरल में बिना वीजा के आने कि अनुमति दी गयी थी और उन्हें गिर्गिराफ्तर नही किया गया बल्कि केरल सर्कार के सरकारी दामाद की तरह खातिरदारी कि गयी और लेजाने लाने के लिए सरकारी कार कि व्यवस्था कि गयी थी | क्या यह राष्ट्रवाद को बढ़ावा देने वाला कार्य है ?
  46. यदि ब्रिटेन और अमेरिका( एक धर्म निरपेक्ष देश) में एक से अधिक महिला से शादी करने कि अनुमति नही है तो क्या भारत में एक से अधिक औरतो से शादी करने कि अनुमति देनी चाहिए ?
  47. पोप को भारत कि यात्रा को आमंत्रित किया गया था लेकिन नेपाल के राजा महेंद्र को नागपुर में १९६५ में मकरसंक्रांति समारोह में भाग लेने के लिए अनुमति नही दी गयी थी | क्या यही धर्म निरपेक्षता है ?
  48. अशोक और कनिष्क अफगानिस्तान पर शासन किया. कंधारी जो की दुर्योधन की माँ, कंधार से आया है ( अब अफगानिस्तान में )| क्या आप मानते हैं कि अफगानिस्तान एकबार भारत का अभिन्न हिस्सा था?
  49. त्रिपुरा में बैप्टिस्ट चर्च को न्यूजीलैंड से 60 साल पहले मिशनरियों द्वारा स्थापित किया गया था | क्या आपको लगता है कि चर्च राष्ट्रवाद को बढ़ावा देंगे?
  50. पाकिस्तान में छात्रों को शुरू से ही सिखाया जाता है कि हिंदु हमारे दुश्मन हैं, हिंदू से मित्रता कभी नहीं किया जा सकता है काफिरो (हिंदुओं) को मार देना चाहिए. क्या आप को अब भी लगता है कि दोस्ती पाकिस्तान के साथ संभव है?
  51. पाकिस्तान इस्लामी देश है,बायीं-पास सर्जरी या कैंसर के इलाज के लिए भारत आते है | पाकिस्तान कैसा एक देश है जिसके पास परमाणु विकशित करने की क्षमता है लेकिन एक अच्छे अस्पताल कि नही ?इसका मतलब है कि पाकिस्तानी सिर्फ ट्रिगर से खुश है विकास और स्वास्थ्य सीवाओ की कीमत पर |
  52. कम्युनिस्ट नेता स्टालिन की बेटी, स्वेतलाना, दिनेश सिंह के भाई से शादी करने के लिए और भारत में बसने की कामना की | हमारे साम्यवादियों और इंदिरा गांधी ने इस का विरोध किया | वे अब कैसे एक इतालवी महिला का समर्थन करे ?
  53. जब योगा संयुक्त राज्य अमेरिका में एक करोड़ों डॉलर का उद्योग है, हमारी सरकार क्यों अंधी बन गयी है इस तकनीक मानवविकास के लिए ? क्या इसलिए कि यह हिंदू संस्कृति का एक हिस्सा है ?
  54. पूजा में 'संकल्प' "भारत वर्षे , भारत कंडे......... के साथ शुरू होता है ...". ये क्या हैं? क्या आप को अभी भी लगता है कि अध्यात्मवाद और राष्ट्रवाद अलग कर रहे हैं ? ये राष्ट्र की दो आंखें है?
  55. अध्यात्मवाद और राष्ट्रवाद भारत में अविभाज्य हैं.क्या आपको नहीं लगता कि अध्यात्मवाद के बिना भारत बिना आत्मा के एक शरीर की तरह हो जाएगा?
  56. हिंदू धर्म में आप को सुधारको कि संख्या बहुत मिल जायेगी | अन्य धर्मो में क्यों नही पाई जाती है ? क्या इन्हें सुधारने कि जरुरत नही है कि सुधारे हुए है ?



सोनिया गांधी ने अपनी जन्म दिनांक 1944 बताई है लेकिन सुचनाए कहती है की उसके पिताजी सिग्नोर स्टेफनो माइनो 1942 से 1945 के बीच रूस मे केदी थे !