Friday, February 3, 2012

जम्मू-कश्मीर राज्य : एक परिचय


तत्कालीन जम्मू-कश्मीर रियासत का विलय 26 अक्तूबर 1947 को भारतीय संघ में हुआ था। वह आज के भारत द्वारा शासित जम्मू-कश्मीर राज्य से कहीं अधिक विशाल था। इसके निम्न हिस्से हैं-

जम्मू - इसका क्षेत्रफल कुल 36,315 वर्ग कि.मी. है जिसमें से आज हमारे पास लगभग 26 हजार वर्ग कि.मी. है। दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों से युक्त पीर पंजाल पर्वत के दक्षिण में इस क्षेत्र में तवी और चेनाब जैसी बारहमासी नदियां बहती हैं। यहां की वर्तमान जनसंख्या का लगभग 67 प्रतिशत हिन्दू हैं। मुख्य भाषा डोगरी व पहाड़ी है।

कश्मीर- लगभग 22 हजार वर्ग कि.मी. क्षेत्रफल, जिसमें से लगभग 16 हजार वर्ग कि.मी. ही हमारे पास है। वर्तमान में अधिकांश जनसंख्या मुस्लिम है, लगभग 4 लाख हिन्दू वर्तमान में कश्मीर घाटी से विस्थापित हैं। जेहलम और किशनगंगा नदियों में जाने वाली जलधाराओं से बना यह क्षेत्र दो घाटियों जेहलम घाटी एवं लोलाब घाटी से मिलकर बना है। मुख्यत: कश्मीरी भाषा बोली जाती है, परन्तु एक तिहाई लोग पंजाबी-पहाड़ी बोलते हैं।

लद्दाख- कुल 1,01,000 वर्ग कि.मी. क्षेत्र, जिसमें से लगभग 59 हजार वर्ग कि.मी. भारत के अधिकार में है। प्रकृति की अनमोल धरोहर के साथ ही बड़ी संख्या में बौद्ध मठ यहां हैं जहां दुनिया के कोलाहल से दूर शांति का अनुभव किया जा सकता है।

गॉडविन आस्टिन (K 28611 मीटर) और गाशरब्रूम I (8068 मीटर) सर्वाधिक ऊँची चोटियाँ हैं। यहाँ की जलवायु अत्यंत शुष्क एवं कठोर है। वार्षिक वृष्टि 3.2 इंच तथा वार्षिक औसत ताप 5 डिग्री सें. है। नदियाँ दिन में कुछ ही समय प्रवाहित हो पाती हैं, शेष समय में जमी रहती है। सिंधु मुख्य नदी है। उत्तर में कराकोरम पर्वत तथा दर्रा है। कारगिल में 9000 फुट से लेकर कराकोरम में 25000 फुट ऊंचाई तक की पर्वत श्रंखलायें है।

01 जुलाई 1979 को लद्दाख का विभाजन कर लेह और करगिल; दो जिलों का गठन किया गया। पश्चिम बंगाल के गोरखालैंड की तर्ज पर दोनों जिलों का संचालन ‘स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषद’ द्वारा किया जाता है। वर्ष 2001 की जनगणना के अनुसार, लद्दाख की कुल जनसंख्या 236539 और क्षेत्रफल 59146 वर्ग कि.मी. है। यह भारत के सबसे विरल जनसंख्या वाले भागों में से एक है।

राज्य में लोकसभा की 6 और विधानसभा की 87 सीटें हैं जिसमें लद्दाख में लोकसभा की एक और विधानसभा की 4 सीटें हैं। करगिल और लेह जिले में विधानसभा की दो-दो सीटें है; जिनके नाम क्रमशः जांस्कर व कारगिल और नोब्रा व लेह है। दोनों जिले करगिल और लेह लद्दाख लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आते हैं। राज्य में मतदाताओं की कुल संख्या 65 लाख से ज्यादा है; जिसमें करीब 1,52,339 मतदाता लद्दाख में हैं।

करगिल के मुसलमान पक्के देशभक्त माने जाते हैं और 1999 में पाकिस्तान द्वारा कारगिल घुसपैठ के दौरान उन्होंने भारतीय सेना का खुलकर साथ दिया था। लद्दाख को चीन पश्चिम तिब्बत कहता है और सिन्धु नदी तक अपनी सीमा को बढ़ाना चाहता है। 1950 से ही इस क्षेत्र पर उसकी नजर है। लेह, जंस्कार, चांगथांग, नुब्रा, यह चार घाटियां बौध्दबहुल व सुरू घाटी पूर्णतया मुस्लिमबहुल है।

गिलगित-वाल्टिस्तान- जम्मू-कश्मीर के इस क्षेत्र को पाकिस्तान ने विधिवत अपना प्रांत घोषित कर उसका सीधा शासन अपने हाथ में ले लिया है। यह लगभग 63 हजार वर्ग किमी. विस्तृत भू-भाग है जिसमें गिलगित लगभग 42 हजार वर्ग किमी. और वाल्टिस्तान लगभग 21 हजार वर्ग किमी. है। गिलगित का सामरिक महत्व है। यह वह क्षेत्र है जहां 6 देशों की सीमाएं मिलती हैं- पाकिस्तान, अफगानिस्तान, तजाकिस्तान, चीन, तिब्बत एवं भारत। यह मध्य एशिया को दक्षिण एशिया से जोड़ने वाला दुर्गम क्षेत्र है जो सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है तथा जिसके द्वारा पूरे एशिया में प्रभुत्व रखा जा सकता है।

अमेरिका भी पहले गिलगित पर अपना प्रभाव रखना चाहता था और एक समय चीन के बढ़ते प्रभुत्व को रोकने के लिये सोवियत रूस की भी ऐसी ही इच्छा थी, इसलिये 60 के दशक में रूस ने पाकिस्तान का समय-समय पर समर्थन कर गिलगित को अपने प्रभाव क्षेत्र में लाने का प्रयास किया था। वर्तमान में गिलगित में चीन के 11000 सैनिक तैनात हैं। पिछले वर्षों में इस क्षेत्र में चीन ने लगभग 65 हजार करोड़ रूपये का निवेश किया व आज अनेक चीनी कम्पनियां व कर्मचारी वहां पर काम कर रहे हैं।

1935 में जब सोवियत रूस ने तजाकिस्तान को रौंद दिया तो अंग्रेजों ने गिलगित के महत्व को समझते हुये महाराजा हरिसिंह से समझौता कर वहां की सुरक्षा व प्रशासन की जिम्मेदारी अपने हाथ में लेने के लिये 60 वर्ष के लिये इसे पट्टे पर ले लिया। 1947 में इस क्षेत्र को उन्होंने महाराजा को वापिस कर दिया। इसकी सुरक्षा के लिये अंग्रेजों ने एक अनियमित सैनिक बल गिलगित स्काउट का भी गठन किया।

पाकिस्तान के कब्जे में जम्मू-कश्मीर- लगभग 10 हजार वर्ग किमी. जम्मू क्षेत्र एवं 6 हजार वर्ग किमी. कश्मीर क्षेत्र पाकिस्तान के अनधिकृत कब्जे में है। प्रमुख रूप से यहा पंजाबी एवं पहाड़ी भाषी जनसंख्या है। आज यह क्षेत्र पूर्णतया मुस्लिम हो चुका है परन्तु 1947 में यहां से विस्थापित हुए लगभग दस लाख हिन्दू शरणार्थी जम्मू-कश्मीर एवं भारत के अन्य भागों में रहते हैं।

चीन अधिगृहीत जम्मू-कश्मीर- लद्दाख के लगभग 36,500 वर्ग किमी. पर 1962 में चीन ने आक्रमण कर अवैध कब्जा कर लिया। बाद में पाकिस्तान ने 5500 वर्ग किमी. जमीन चीन को भेंटस्वरूप दे दी।
(जम्मू-कश्मीर : तथ्य, समस्याएं एवं समाधान पुस्तक से साभार)

Monday, January 30, 2012

नेहरू - गांधी वंश के बारे में कुछ छिपा तथ्य

 नेहरू - गांधी वंश मुग़ल Ghiyasuddin गाजी नाम के एक आदमी के साथ शुरू होता है. वह शहर कोतवाल यानी पुलिस अधिकारी दिल्ली 1857 के विद्रोह से पहले मुगल शासन के अधीन था,. गदर के वर्ष में, 1857 में दिल्ली पर कब्जा करने के बाद, ब्रिटिश सभी मुगलों हर जगह कत्लेआम कर रहे थे. ब्रिटिश एक गहन खोज की है और हर मुग़ल मार डाला इतना है कि दिल्ली के सिंहासन के लिए कोई भविष्य दावेदार थे. दूसरे हाथ पर हिंदुओं ब्रिटिश द्वारा लक्षित नहीं जब तक पृथक हिंदुओं मुगलों, पिछले संघों के कारण के साथ साइडिंग हो पाए गए थे. इसलिए, यह कई मुसलमान के लिए प्रथागत बने हिंदू नाम को अपनाने. तो, आदमी Ghiyasuddin गाजी (काफिर का हत्यारा शब्द का मतलब है) एक हिंदू नाम गंगाधर नेहरू अपनाया और इस प्रकार छल द्वारा उसकी जान बचाई. Ghiyasuddin गाजी जाहिरा तौर पर (या Nehr) लाल किले के पास एक नहर के किनारे पर रहते थे. इस प्रकार, वह नाम 'नेहरू' परिवार के नाम के रूप में अपनाया. दुनिया से बाहर के माध्यम से, हम किसी भी गंगाधर की तुलना में अन्य वंशज नहीं मिल रहा है, उपनाम नेहरू वाले. "भारतीय आजादी के युद्ध के विश्वकोश" की 13 वीं मात्रा एम.के. द्वारा (ISBN :81-261-3745-9) सिंह अलंकृत राज्यों. भारत सरकार इस तथ्य को छुपा रही है.

सिटी कोतवाल आज पुलिस आयुक्त की तरह एक महत्वपूर्ण पद था. यह मुगल रिकॉर्ड से प्रतीत होता है कि वहाँ कोई हिंदू कोतवाल नियुक्त किया गया था. यह एक हिंदू के लिए बहुत संभावना नहीं थी कि पद के लिए काम पर रखा जा. विदेशी वंश के अनिवार्यतः केवल मुसलमान जैसे महत्वपूर्ण पदों के लिए काम पर रखा गया.

जवाहरलाल नेहरू की दूसरी बहन कृष्णा Hutheesing भी अपने संस्मरण में उल्लेख है कि उसके दादा दिल्ली शहर कोतवाल 1857 के विद्रोह से पहले किया गया था जब बहादुर शाह जफर अब भी दिल्ली के सुल्तान था. जवाहरलाल नेहरू ने अपनी आत्मकथा में राज्यों, कि वह अपने दादा है जो उसे एक मुगल ठाकुर की तरह चित्रण के एक चित्र देखा है. यह है कि चित्र में दिखाई देता है कि वह लंबी और बहुत मोटी दाढ़ी रहा था, एक मुस्लिम टोपी पहने हुए था और उसके हाथ में दो तलवारें. जवाहरलाल नेहरू भी अपनी आत्मकथा में कहा गया है कि दिल्ली से आगरा (मुगल प्रभाव की एक सीट) को अपने रास्ते पर, अपने भव्य पिता के परिवार के सदस्यों को अंग्रेजों द्वारा हिरासत में थे. निरोध का कारण उनके मुग़ल सुविधाओं था. लेकिन वे वकालत की कि वे कश्मीरी पंडित थे और इस तरह दूर मिला. 19 वीं सदी के उर्दू साहित्य, विशेष रूप से ख्वाजा हसन निज़ामी का काम करता है, दुख से भरा है कि मुगलों और मुसलमान तो सामना करना पड़ता है. उन्होंने यह भी वर्णन कैसे मुगलों अन्य शहरों के लिए बच करने के लिए अपनी जान बचाने के. सभी संभावना में, जवाहर नेहरू मुग़ल दादा और उनके परिवार को उन के बीच में थे.

जवाहर लाल नेहरू एक व्यक्ति है कि भारत प्यार करते हैं. वह निस्संदेह एक बहुत ही ध्वनि राजनीतिज्ञ और एक प्रतिभाशाली व्यक्ति था. लेकिन, भारत सरकार उनके जन्म इलाहाबाद में जगह 77 Mirganj पर जवाहरलाल नेहरू के स्मारक नहीं बनाया है, क्योंकि यह एक वेश्यालय है. पूरे इलाके में लंबे समय के बाद से एक प्रसिद्ध रेड लाइट एरिया है. यह हाल ही में एक वेश्यालय बन गया है, लेकिन यह जवाहरलाल नेहरू के जन्म से पहले भी एक वेश्यालय है. एक ही घर के एक हिस्से को अपने पिता मोतीलाल नेहरू ने एक वेश्या का नाम लाली जान बेच दिया गया था और यह करने के लिए "Imambada" के रूप में जाना जाने लगा. यदि आप कुछ संदेह है, तो आप जगह की यात्रा कर सकते हैं. कई भरोसेमंद सूत्रों और भी encyclopedia.com और विकिपीडिया यह कहना है. मोतीलाल नेहरू अपने परिवार के साथ साथ बाद में आनंद भवन में स्थानांतरित कर दिया. याद रखें कि आनंद भवन जवाहर लाल नेहरू के पैतृक घर और जन्म नहीं जगह अपने.

भारतीय सिविल सेवा की एमओ मथाई प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को निजी सचिव के रूप में सेवा की. मथाई एक पुस्तक "नेहरू आयु के Reminiscences" (ISBN: 13-9780706906219) पुस्तक में लिखा है मथाई पता चलता है कि जवाहर लाल नेहरू और Edwina माउंटबेटन (भारत के अंतिम वायसराय, लुई माउंटबेटन की पत्नी) के बीच गहन प्रेम प्रसंग था. रोमांस इंदिरा गांधी, जो उसके पिता को राजी करने के लिए उनके रिश्ते के बारे में थोड़ा सावधानी बरतनी में मौलाना अबुल कलाम आजाद की मदद लेनी लिए बहुत शर्मिंदगी का एक स्रोत था.

इसके अलावा नेहरू सरोजिनी नायडू की बेटी पद्मजा नायडू, जिसे नेहरू बंगाल के राज्यपाल के रूप में नियुक्त किया गया के साथ प्रेम प्रसंग था. यह पता चला है कि वह अपने बेड रूम में उसके चित्र, जो इंदिरा अक्सर दूर होता है रखने के लिए किया. यह पिता और बेटी के बीच कुछ तनाव के कारण है.

इन महिलाओं के अलावा, पंडित नेहरू श्रद्धा माता का नाम बनारस से एक संन्यासिन के साथ एक चक्कर था. वह एक आकर्षक संस्कृत अच्छी तरह से प्राचीन भारतीय शास्त्र और पौराणिक कथाओं में निपुण विद्वान था. जब वह उनके अवैध संबंध के बाहर 1949 में, कल्पना, बंगलौर में एक कॉन्वेंट में, वह जोर देकर कहा कि नेहरू उसे शादी कर लेनी चाहिए. लेकिन, नेहरू कि मना कर दिया है, क्योंकि यह उनके राजनीतिक कैरियर को प्रभावित कर सकता है. एक बेटे का जन्म हुआ था और एक ईसाई मिशनरी बोर्डिंग स्कूल में वह रखा गया था. की उनकी जन्म तिथि 30 मई, 1949 होने का अनुमान है. अब वह अपने प्रारंभिक साठ के दशक में किया जा सकता है. ऐसे मामलों में convents बच्चे का अपमान को रोकने के लिए गोपनीयता बनाए रखने के. हालांकि मथाई बच्चे के अस्तित्व की पुष्टि की, कोई प्रयास कभी उसे ढूँढने किया गया. वह बड़े हो गए हैं चाहिए के रूप में एक कैथोलिक ईसाई blissfully उसका पिता कौन था से अनभिज्ञ है.

नेताजी सुभाष चन्द्र बोस और डा. श्यामा प्रसाद मुखर्जी भारत के प्रधानमंत्री के पद के लिए जवाहर लाल नेहरू के प्रतियोगियों के थे और उन दोनों को रहस्यमय परिस्थितियों में मृत्यु हो गई.

इन सभी तथ्यों को जानने का, नेहरू का जन्मदिन बाल दिवस के रूप में मनाने का कोई अर्थ है? उसे अपने बच्चों को एक अलग व्यक्ति के रूप में पेश करने और सच छुपा है, उन्हें शिक्षा को नकार के लिए बराबर है.

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अनुसूचित जाति भट्ट जवाहरलाल नेहरू की बहन विजया लक्ष्मी उसके पिता कर्मचारी Syud हुसैन के साथ भाग द्वारा: (ISBN 9788121205917 13): जैसा कि "मुस्लिम अलगाववाद और विभाजन महान डिवाइड" पुस्तक के प्रति. तब मोतीलाल नेहरू जबरदस्ती उसे वापस ले लिया गया और उसे एक और रंजीत पंडित नाम के एक आदमी के साथ शादी की.

इंदिरा प्रियदर्शिनी नेहरू राजवंश में अनैतिकता perpetuated. बौद्धिक इंदिरा ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में भर्ती कराया गया था, लेकिन वहाँ से बाहर गैर - प्रदर्शन के लिए प्रेरित. वह तो शांतिनिकेतन विश्वविद्यालय में भर्ती कराया गया था, लेकिन, गुरु देव रवीन्द्रनाथ टैगोर उसे बुरा आचरण के लिए पीछा किया.

शान्तिनिकेतन के बाहर संचालित करने के बाद, इंदिरा अकेला हो गया है के रूप में पिता राजनीति के साथ व्यस्त था और माँ तपेदिक के स्विट्जरलैंड में मर रहा था. उसे अकेलापन, फिरोज खान, नवाब खान नाम पंसारी जो इलाहाबाद में मोतीलाल नेहरू घरेलू वाइन आदि की आपूर्ति के बेटे के साथ खेलना, उसके करीब आकर्षित करने में सक्षम था. महाराष्ट्र के तत्कालीन राज्यपाल डा. श्रीप्रकाश नेहरू ने चेतावनी दी है कि इंदिरा फिरोज खान के साथ अवैध संबंध रहा था. फिरोज खान इंग्लैंड में तो था और वह काफी इंदिरा के लिए सहानुभूति था. जल्द ही वह अपने धर्म बदल, एक मुस्लिम महिला बनीं और लंदन के एक मस्जिद में फिरोज खान से शादी कर ली. इंदिरा प्रियदर्शिनी नेहरू Maimuna बेगम के लिए उसका नाम बदल दिया है. उनकी मां कमला नेहरू कि शादी के खिलाफ पूरी तरह से किया गया था. नेहरू मुस्लिम रूपांतरण के रूप में प्रधानमंत्री बनने की उसकी संभावना को ख़तरे में डालना होगा खुश नहीं था.

तो, नेहरू युवा आदमी फिरोज खान से पूछा खान से गांधी के लिए अपने उपनाम बदल. यह इस्लाम से हिंदू धर्म के लिए धर्म के परिवर्तन के साथ कुछ नहीं करना था. यह सिर्फ एक हलफनामा द्वारा नाम का एक परिवर्तन का एक मामला था. और इसलिए फिरोज खान फिरोज गांधी बन गया है, हालांकि यह बिस्मिल्लाह सरमा की तरह एक असंगत नाम है. दोनों अपने नाम करने के लिए भारत की जनता मूर्ख बदल दिया है. जब वे भारत लौटे, एक नकली वैदिक विवाह सार्वजनिक उपभोग के लिए स्थापित किया गया था. इस प्रकार, इंदिरा और उसके वंश काल्पनिक नाम गांधी मिला. नेहरू और गांधी दोनों फैंसी नाम हैं. के रूप में एक गिरगिट अपने रंग बदलता है, इस राजवंश ने अपनी असली पहचान छिपाने के लिए कोई नाम बदल गया है.

इंदिरा गांधी अर्थात् दो बेटों राजीव गांधी और संजय गांधी था. संजय मूल संजीव कि राजीव अपने बड़े भाई के नाम के साथ तुकांतवाला के रूप में नामित किया गया था. संजीव ब्रिटेन में एक कार चोरी के लिए ब्रिटिश पुलिस द्वारा गिरफ्तार किया गया था और उसका पासपोर्ट जब्त किया गया था. इंदिरा गांधी की दिशा में तत्कालीन भारतीय राजदूत ब्रिटेन, कृष्ण मेनन अपनी शक्ति का दुरुपयोग, संजय के लिए उसका नाम बदल दिया और एक नया पासपोर्ट खरीद. इस प्रकार संजीव गांधी संजय गांधी के रूप में जाना जाने लगा.

यह एक ज्ञात तथ्य यह है कि जन्म के बाद राजीव, इंदिरा गांधी और फिरोज गांधी के अलग - अलग रहते थे, लेकिन वे नहीं तलाक ले रहे थे. पुस्तक के.एन. राव राज्यों द्वारा "नेहरू राजवंश" (10:8186092005 ISBN) है कि इंदिरा (या श्रीमती फिरोज खान) के दूसरे बेटे संजय गांधी के रूप में जाना जाता फिरोज गांधी के पुत्र नहीं था. वह एक और मुस्लिम मोहम्मद यूनुस नाम सज्जन का बेटा था.

दिलचस्प सिख लड़की मेनका के साथ संजय गांधी की नई दिल्ली में मोहम्मद यूनुस के घर में शादी जगह ले ली. जाहिर यूनुस शादी से नाखुश था के रूप में वह अपनी पसंद की एक मुस्लिम लड़की के साथ उसकी शादी करना चाहता था. मोहम्मद यूनुस जो सबसे अधिक रोया जब संजय गांधी की विमान दुर्घटना में निधन हो गया था. 'यूनुस की पुस्तक में, "व्यक्तियों, जुनून और राजनीति" (ISBN-10: 0706910176) एक खोज कर सकते हैं कि बच्चे संजय खतना निम्नलिखित इस्लामी कस्टम था.

यह एक तथ्य है कि संजय गांधी को लगातार अपनी मां इंदिरा गांधी का रहस्य उसका असली पिता कौन है के साथ, ब्लैकमेल किया है. संजय उसकी माँ पर एक गहरा भावनात्मक नियंत्रण, जो वह अक्सर दुरुपयोग का प्रयोग किया. इंदिरा गांधी अपने कुकर्मों की अनदेखी करने का फैसला किया और वह परोक्ष रूप से सरकार नियंत्रित किया गया था.

जब संजय गांधी की मृत्यु की खबर इंदिरा गांधी पर पहुंच गया, उसे पहला सवाल था, "उसकी कुंजी और उसकी कलाई घड़ी कहाँ हैं?". नेहरू - गांधी वंश के बारे में कुछ गहरे रहस्य उन objects.The विमान दुर्घटना में छिपा हो लगता है भी रहस्यमय था. यह एक नया है कि एक दुर्घटना में ग़ोता मारना और अभी तक विमान के प्रभाव पर विस्फोट नहीं था विमान था. ऐसा होता है जब वहाँ कोई ईंधन नहीं है. लेकिन उड़ान रजिस्टर से पता चलता है कि ईंधन टैंक लेने से पहले पूरा किया गया था. इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुचित प्रभाव का उपयोग कर जगह ले जाने से किसी भी जांच निषिद्ध. तो, जो संदिग्ध है?

इंदिरा नेहरू गांधी की पुस्तक "लाइफ" (ISBN: 9780007259304) कैथरीन फ्रैंक ने इंदिरा गांधी के अन्य प्रेम संबंधों के कुछ पर प्रकाश डालता है. यह लिखा है कि इंदिरा पहला प्यार शान्तिनिकेतन में उसे जर्मन शिक्षक के साथ था. बाद में वह एमओ मथाई (पिता के सचिव), तो धीरेंद्र ब्रह्मचारी (उसे योग शिक्षक) और दिनेश सिंह (विदेश मंत्री) के साथ पिछले चक्कर था.

पूर्व विदेश मंत्री नटवर सिंह ने अपनी पुस्तक "प्रोफाइल और पत्र" (ISBN 8129102358) में मुगलों के लिए इंदिरा गांधी आत्मीयता के बारे में एक दिलचस्प रहस्योद्घाटन किया. यह कहा गया है कि 1968 में इंदिरा गांधी ने भारत के प्रधानमंत्री के रूप में अफगानिस्तान के लिए एक सरकारी यात्रा पर चला गया. नटवर गाओ उसे कर्तव्य में एक आईएफएस अधिकारी के रूप में साथ है. दिन भर सगाई पूरा करने के बाद, इंदिरा गांधी शाम में एक सवारी के लिए बाहर जाना चाहता था. कार में एक लंबी दूरी जाने के बाद इंदिरा गांधी बाबर दफन जगह यात्रा करना चाहता था, हालांकि इस कार्यक्रम में शामिल नहीं किया गया. अफ़ग़ान सुरक्षा अधिकारियों ने उसे परहेज करने की कोशिश की, लेकिन वे अडिग रहीं. अंत में वह उस दफन जगह पर चला गया. यह एक सुनसान जगह थी. वह बाबर की कब्र से पहले चला गया, श्रद्धा में नीचे तुला सिर के साथ एक कुछ मिनट के लिए वहाँ खड़ा था. नटवर सिंह उसके पीछे खड़ा था. जब इंदिरा ने उसकी प्रार्थना को समाप्त किया था, वह वापस कर दिया और सिंह "आज हम इतिहास के साथ हमारे ब्रश. पड़ा है" कहा था उल्लेख है कि बाबर भारत में मुगल शासन के संस्थापक, जिसमें से नेहरू - गांधी वंश का वंशज है वॉर्थ.

यह मुश्किल है कि गिनती कितने संस्थानों में उच्च शिक्षा के राजीव गांधी के नाम कर रहे हैं, लेकिन राजीव गांधी खुद कम क्षमता का एक व्यक्ति था. 1962 से 1965 तक, वह ट्रिनिटी कॉलेज, कैम्ब्रिज में एक यांत्रिक अभियांत्रिकी पाठ्यक्रम के लिए दाखिला लिया था. लेकिन, वह एक डिग्री के बिना छोड़ दिया कैम्ब्रिज, क्योंकि वह परीक्षा पारित नहीं कर सका. अगले साल 1966 में, वह इंपीरियल कॉलेज, लंदन में शामिल हो गए, लेकिन इसे फिर से एक डिग्री के बिना छोड़ दिया.

इसके बाद के संस्करण में के.एन. राव ने कहा कि पुस्तक का आरोप है कि राजीव गांधी एक कैथोलिक बने सानिया माइनो शादी. राजीव रॉबर्टो बन गया. उनके बेटे का नाम राउल और बेटी का नाम Bianca है. काफी बड़ी चतुराई से एक ही नाम राहुल और प्रियंका के रूप में भारत के लोगों के लिए प्रस्तुत कर रहे हैं.

प्रेस कॉन्फ्रेंस कि राजीव गांधी भारत के प्रधानमंत्री के रूप में पदभार संभालने के बाद लंदन में दिया बहुत जानकारीपूर्ण गया था. इस पत्रकार सम्मेलन में राजीव दावा है कि वह एक हिंदू लेकिन एक पारसी नहीं है. फिरोज खान के पिता और राजीव गांधी के पैतृक दादा गुजरात के जूनागढ़ क्षेत्र से एक मुस्लिम सज्जन था. नवाब खान के नाम से यह मुस्लिम पंसारी उसे इस्लाम धर्म के बाद एक पारसी महिला से शादी की थी. इस स्रोत है जहां राजीव एक पारसी होने के मिथक से निकाली थी. मन है कि वह सब पर कोई पारसी पूर्वज था. उनके पैतृक दादी पारसी धर्म नवाब खान शादी परित्यक्त के बाद मुस्लिम बदल दिया था. हैरानी की बात है, पारसी राजीव गांधी वैदिक संस्कार के अनुसार भारतीय जनता के पूर्ण दृश्य में अंतिम संस्कार किया गया.

व्यक्तिगत आचरण में राजीव बहुत एक मुगल था. 15 अगस्त 1988 को वह लाल किले की प्राचीर से गरजा, "हमारा प्रयास हाइट्स करने के लिए जो इसे 250-300 साल पहले के बारे में संबंधित देश लेने के लिए किया जाना चाहिए. यह तो औरंगजेब के शासनकाल 'jeziya' मास्टर और नंबर एक मंदिर विध्वंसक था.

डॉ. सुब्रमण्यम स्वामी लिखते हैं कि सोनिया गांधी के नाम Antonia Maino था. उसके पिता एक मेसन था. उन्होंने इटली के कुख्यात फासीवादी शासन के एक कार्यकर्ता था और वह रूस में पांच साल की कैद की सेवा. सोनिया गांधी को उच्च विद्यालय से परे नहीं अध्ययन किया है. वह कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय परिसर में लेनोक्स स्कूल का नाम अंग्रेजी शिक्षण की दुकान से कुछ अंग्रेजी सीखा. इस तथ्य से वह प्रतिष्ठित कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में अध्ययन के समेटे हुए है. कुछ अंग्रेजी सीखने के बाद, वह कैम्ब्रिज शहर में एक रेस्तरां में एक वेट्रेस था.

सोनिया गांधी ब्रिटेन में माधवराव सिंधिया, जो उसकी शादी के बाद भी जारी रखा के साथ तीव्र दोस्ती थी.

2 AM में एक रात 1982 में माधवराव सिंधिया और सोनिया गांधी के साथ अकेले पकड़े गए थे जब उनकी कार आईआईटी दिल्ली मुख्य गेट के पास एक दुर्घटना की.

जब इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के प्रधानमंत्रियों थे, प्रधानमंत्री की सुरक्षा के लिए नई दिल्ली और चेन्नई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर जाने के लिए मंदिर की मूर्तियों की तरह भारतीय खजाने के बक्से भेजने के लिए इस्तेमाल किया, प्राचीन वस्तुएँ, पेंटिंग्स रोम करने के लिए आदि. मुख्यमंत्री के रूप में अर्जुन सिंह और संस्कृति प्रभारी मंत्री लूट का आयोजन किया के रूप में बाद में. सीमा से अनियंत्रित, वे इटली के लिए ले जाया गया और दो Etnica एवं गणपति, सोनिया गांधी की बहन एलेसैंड्रा माइनो विंची द्वारा स्वामित्व नाम दुकानों में बेचा .

इंदिरा गांधी क्योंकि उसके दिल या मस्तिष्क गोलियों से छेदा गया, नहीं मृत्यु हो गई, लेकिन वह खून की कमी की मृत्यु हो गई. के बाद इंदिरा गांधी पर निकाल दिया गया था, सोनिया गांधी अजीब जोर देकर कहा है कि खून बह रहा इंदिरा गांधी डा. राम मनोहर लोहिया अस्पताल ले जाया जाना चाहिए एम्स जो ठीक इस तरह की घटनाओं के साथ सौदा करने के लिए एक आपात प्रोटोकॉल था के विपरीत दिशा में. डा. राम मनोहर लोहिया अस्पताल तक पहुँचने के बाद, सोनिया गांधी ने उसके मन और मांग है कि इंदिरा गांधी एम्स के लिए लिया जाना चाहिए बदल गया है, इस प्रकार 24 बहुमूल्य मिनट बर्बाद कर. यह संदिग्ध है कि चाहे वह सोनिया गांधी की अपरिपक्वता या एक चाल के लिए तेजी से उसके पति को सत्ता में लाने था.

राजेश पायलट और माधव राव सिंधिया के प्रधानमंत्री पद के लिए मजबूत दावेदार थे और वे सोनिया गांधी के सत्ता में रास्ते में सड़क ब्लॉक थे. उन दोनों रहस्यमय दुर्घटनाओं में मृत्यु हो गई.

प्रथम दृष्टया संभावना है कि माइनो परिवार लिट्टे अनुबंधित किया है राजीव गांधी की हत्या की ओर इशारा करते हुए परिस्थितिजन्य सबूत हैं. आजकल, सोनिया गांधी एमडीएमके, पीएमके और द्रमुक जैसे जो राजीव गांधी के हत्यारों प्रशंसा के साथ राजनीतिक गठबंधन होने में काफी अडिग है. कोई भारतीय विधवा कभी करना होगा कि. ऐसे हालात कई हैं, और एक शक बढ़ा. राजीव की हत्या में सोनिया की भागीदारी में एक जांच आवश्यक है. (ISBN 81-220-0591-8) - तुम डॉ. सुब्रह्मण्यम स्वामी पुस्तक "आशातीत प्रश्न और अनुत्तरित प्रश्न राजीव गांधी की हत्या" पढ़ सकते हैं. यह ऐसी साजिश के संकेत हैं.

1992 में, सोनिया गांधी इतालवी नागरिकता कानून के अनुच्छेद 17 के तहत इटली की उसकी नागरिकता पुनर्जीवित. इतालवी कानून के तहत, राहुल और प्रियंका इतालवी नागरिक हैं क्योंकि सोनिया ने एक इतालवी नागरिक था जब वह उन्हें जन्म दिया. राहुल गांधी इतालवी उसकी हिंदी की तुलना में बेहतर है. राहुल गांधी एक इतालवी नागरिक तथ्य यह है कि 27 सितंबर 2001 को वह बोस्टन हवाई अड्डे, संयुक्त राज्य अमेरिका में एफबीआई द्वारा एक इतालवी पासपोर्ट पर यात्रा करने के लिए हिरासत में था से प्रासंगिक है. यदि कोई कानून भारत में किया जाता है कि कि राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के जैसे महत्वपूर्ण पदों पर विदेशी मूल के एक व्यक्ति द्वारा आयोजित नहीं किया जाना चाहिए, तो राहुल गांधी स्वचालित रूप से प्रधानमंत्री के पद के लिए disqualifies ho jayenge .

स्कूली शिक्षा खत्म करने के बाद, राहुल गांधी योग्यता के आधार पर नहीं बल्कि राइफल शूटिंग के खेल कोटे पर नई दिल्ली में सेंट स्टीफंस कॉलेज में दाखिला मिल गया. 1989-90 में एक संक्षिप्त रहने के बाद, वह 1994 में, फ्लोरिडा के रोलिंस कालेज से बी.ए. किया. बीए कर के लिए बस एक अमेरिका के लिए जाने की जरूरत नहीं है. अगले ही वर्ष, 1995 में उन्होंने एम. फिल. ट्रिनिटी कॉलेज, कैम्ब्रिज से डिग्री. इस डिग्री की वास्तविकता के रूप में वह एम. फिल किया है पूछताछ की है. एमए के बिना. Amaratya सेन की मदद माना जाता है. आप में से कई मशहूर फिल्म 'मुन्नाभाई एमबीबीएस "देखा है

2008 में राहुल गांधी को कानपुर में चन्द्र शेखर आजाद विश्वविद्यालय के छात्रों की रैली के लिए एक सभागार का उपयोग करने से रोका था. बाद में, विश्वविद्यालय के कुलपति वी.के. सूरी, उत्तर प्रदेश के राज्यपाल द्वारा अपदस्थ किया गया था. 26/11 जब पूरे देश के बारे में कैसे से निपटने के लिए मुंबई आतंकी के तनाव में था के दौरान राहुल गांधी आराम से 5 AM तक अपने दोस्तों के साथ जश्न मना रहा था. राहुल गांधी कांग्रेस के सभी सदस्यों के लिए तपस्या की सलाह है. वे कहते हैं, यह सभी के लिए तपस्या होना राजनेताओं के कर्तव्य है. दूसरी ओर वह एक पूरी तरह सुसज्जित जिम के साथ एक मंत्री बंगला है. वह कम से कम दिल्ली के poshest जिम के दो, जिनमें से 5 सितारा दर्ज़ा दिया गया है की एक नियमित सदस्य है. राहुल गांधी चेन्नई यात्रा 2009 में मितव्ययिता अभियान के लिए पार्टी के 1 करोड़ रुपये से अधिक लागत. इस तरह की विसंगतियों को बताते हैं कि राहुल गांधी द्वारा उठाए गए कदमों के अपने ही है, लेकिन उनकी पार्टी केवल पुरुषों की कसरत नहीं कर रहे हैं.

2007 उत्तर प्रदेश में चुनाव अभियान के दौरान राहुल गांधी ने कहा कि "अगर नेहरू - गांधी परिवार से किसी को भी राजनीति में सक्रिय किया गया था तो, बाबरी मस्जिद गिर नहीं होगा". यह doubtlessly अपने पूर्वजों के लिए एक वफादारी के रूप में अपने मुसलमान संबद्धता से पता चलता है. 31 दिसम्बर, 2004 में, जॉन एम. itty, केरल के अलाप्पुझा जिले में एक सेवानिवृत्त कॉलेज के प्रोफेसर, तर्क है कि राहुल गांधी और केरल में एक रिसॉर्ट में तीन दिनों के लिए एक साथ रहने के लिए प्रेमिका Juvenitta उर्फ वेरोनिका के खिलाफ कार्रवाई लिया जाना चाहिए कि. यह अनैतिक अधिनियम के तहत एक अपराध के रूप में वे शादी नहीं कर रहे हैं. वैसे भी, एक और अधिक विदेशी बहू सहिष्णु भारतीयों नियम इंतज़ार कर रही है.

स्विस पत्रिका Schweizer Illustrierte 11 वीं नवंबर 1991 मुद्दे से पता चला है कि राहुल गांधी ने 2 बिलियन अमरीकी डॉलर के लायक अपनी मां सोनिया गांधी द्वारा नियंत्रित खातों के लाभार्थी था. 2006 में स्विस बैंकिंग एसोसिएशन से एक रिपोर्ट से पता चला है कि भारतीय नागरिकों की संयुक्त जमा अभी तक किसी भी अन्य देश, 1.4 खरब अमरीकी डॉलर का एक कुल, एक भारत के सकल घरेलू उत्पाद से अधिक आंकड़ा से अधिक कर रहे हैं. इस राजवंश भारत के आधे से अधिक नियम. केंद्र की उपेक्षा, 28 राज्यों और 7 संघ शासित प्रदेशों से बाहर समय के किसी भी बिंदु पर, उनमें से आधे से भी कांग्रेस सरकार है. राजीव गांधी तक भारत में मुग़ल सोनिया गांधी के साथ शासन था, भारत पर रोम शासन शुरू कर दिया है.

मोतीलाल और शादी अपनी पहली पत्नी और बेटे को प्रसव में निधन हो गया.

मोतीलाल और उनकी दूसरी पत्नी THUSSU (नाम स्वरूप रानी के लिए बदल) तीन बच्चों की थी

THUSSU MOBARAK अली (मोतीलाल बॉस) के साथ पहले बेटे जवाहर लाल नेहरू (वह खतना था)

मोतीलाल और THUSSU नाम (भी बुलाया विजया लक्ष्मी) नेन और कृष्णा द्वारा दो बेटियां थी

मोतीलाल भी था दो कमीने बेटों के नाम शेख़ अब्दुल्ला और SYUD हुसैन द्वारा मुस्लिम महिलाओं की

__________

विजया लक्ष्मी SYUD हुसैन (आधा भाई और बहन) के साथ भागकर एक लड़की चंद्रलेखा था

विजयलक्ष्मी शादी आर.एस. पंडित था और दो लड़कियों नयनतारा और रीता

जवाहरलाल नेहरू विवाहित कमला कौल (consummated कभी नहीं शादी)

जवाहर लाल SARADDHA माता (कल्पित नाम) के साथ एक चक्कर था और बंगलूरू में एक अनाथालय को दे दिया बेटा था

जवाहर लाल लेडी माउंटबेटन के साथ एक चक्कर है, लेकिन बच्चों को नहीं था

जवाहर कई विदेश था और अंत में गरमी की मृत्यु हो गई

कमला कौल MANZUR अली (जो Mobark अली के बेटे जो नेहरू भी जन्मा है) और उनकी बेटी के साथ एक चक्कर था इंदिरा PRIYADARSINI नेहरू

कमला कौल फिरोज खान (नवाब खान ने अपने घर के लिए शराब की आपूर्ति के बेटे), लेकिन कोई बच्चों के साथ एक चक्कर था

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इंदिरा बिस्तर में उसे जर्मन अध्यापक के साथ शान्तिनिकेतन में पाया गया था

इंदिरा PRIYADARSINI खुद इस्लाम में परिवर्तित करने के बाद इस्लामी संस्कार फिरोज खान के अनुसार nikhahed. उसका नया नाम MAIMUNA बेगम था और दोनों उनके नाम बदल गांधी की सलाह पर एक अदालत में एक हलफनामा द्वारा इंदिरा गांधी और फिरोज गांधी भारत की जनता मूर्ख था

इंदिरा और फिरोज नाम राजीव गांधी (इस्लामी संस्कार के अनुसार वह खतना किया गया था) द्वारा एक बेटा था

इंदिरा मोहम्मद यूनुस के साथ एक चक्कर था और एक दूसरे बेटे संजीव गांधी था (बाद में संजय गांधी को बदल कार चोरी के लिए ब्रिटेन में अभियोजन पक्ष से बचने के नाम उन्होंने इस्लामी संस्कार के अनुसार खतना किया गया था.)

इंदिरा प्रसूतिविज्ञान निष्णात साथ एक चक्कर था मथाई (नेहरू स्टेनो) और एक बेटा निरस्त कर दिया गया

इंदिरा धीरेन्द्र BRAMMACHARI के साथ एक चक्कर है लेकिन बच्चों को नहीं था

इंदिरा DHINESH सिंह के साथ एक चक्कर है, लेकिन बच्चों को नहीं था

फिरोज TARAKESWARI सिन्हा के साथ एक चक्कर था

फिरोज MEHMUNA सुल्ताना के साथ एक चक्कर था

फिरोज सुभद्रा जोशी और कई दूसरों के साथ एक चक्कर था

Saturday, January 28, 2012

इस्लाम न तो धर्म है औऱ न ही संप्रदाय


इस्लाम न तो धर्म है औऱ न ही संप्रदाय ,इसके पूरे संदर्भ मैं ये एक संपूर्ण 100 प्रतिशत जीवन जीने का एक तरीका है.इस्लाम मैं धार्मिक,कानूनी,राजनीतिक,आर्थिक सामाजिक व सामरिक पहलू है.

किसी भी देश मैं इस्लामी करण का प्रारंभ होता है जब पर्याप्त मात्रा मैं मुस्लिम जनसंख्या होती है और वे इसके लिए उग्रता दिखाने की स्थिति मैं होते हैं और जब राजनीतिक रूप से जागरूक और सहनशील समाज मुस्रलिमों की कुछ धार्मिक बातों को मान लेते हैं तब उनकी कुछ और मांगें धीरे से आगे आजाती है…….ये किस तरह काम करता है…. उस देश मैं हो जब तक मुस्लिम जनसंख्या 2 प्रतिशत या कम हो तो मुस्लिम समाज एक शांतिप्रिय समाज है जो किसी भी प्रकार से अन्य नागरिकों के लिए खतरा नहीं दिखाई देता है जैसा कि ….

United States -- Muslim 0.6%,Australia -- Muslim 1.5%,,canada -- Muslim 1.9%,China -- Muslim 1.8%,Italy -- Muslim 1.5%,Norway -- Muslim 1.8%
जब ये जनसंख्या 2-5 प्रतिशत तक पहुंच जाती है तब धर्मांतरण प्रारंभ होता है,जो अक्सर अन्य धर्म के अल्पसंख्यकों और जैलों मैं अलग थलग पङे लोगों से होता है ….जैसा कि निम्नांकित है…..
Denmark -- Muslim 2%,Germany -- Muslim 3.7%,United Kingdom -- Muslim 2.7%,Spain -- Muslim 4%,Thailand -- Muslim 4.6%,प्रतिशत से ज्यादा होने पर ये अपनी जनसंख्या के अनुपात से ज्याद मांगे रखना शुरु कर देते है……जैसे वे हलाल के मांस की मांग करेंगे एक तरह से जोब सिक्यूरिटी हो गई मुस्लिमों की खाने की इंडस्ट्री मैं…..सुपरमार्केट्स पर हलाल के मांस के अलग स्टाल लगाने का दबाव बनाया जाता है अन्यथा उनके बहिष्कार की धमकियां दी जाती हैजैसा कि निम्न देशों मैं हो रहा है……
France -- Muslim 8%,Philippines -- Muslim 5%,Sweden -- Muslim 5%,Switzerland -- Muslim 4.3%,The Netherlands -- Muslim 5.5%,Trinidad & Tobago -- Muslim 5.8%

और अब समय आता है जब वे सरकार से ऐसे कानून बनाने की बात करते हैं कि उनके ऊपर सिर्फ शरियत लागू की जाये…..क्यों कि मुसलमानों का अंतिम लक्ष्य पूरे विश्व मैं शरियत लागू करना है…..

जब मुस्लिम जनसंख्या 10 प्रतिशत या ज्यादा हो जाती है तो अपनी बनाई हुई बिगङी हुई परिस्थितियों के लिये आंदोलन करना शुरू करते हैं….और यदि कोई गैर मुसलमान इस्लाम के प्रति असम्मान जताते है तो ये धमकियां देना शुरु कर देते हैं और दंगा भङकाने की कोशिश करते हैं. जैसा कि एम्सटर्डम मैं हुआ जहां मुहम्मद साहब का कार्टून बनाने के बाद धमकियां दी गई……..

Guyana -- Muslim 10%,India -- Muslim 13.4%,Israel -- Muslim 16%,Kenya -- Muslim 10%,Russia -- Muslim 15%

और जब जनसंख्या 20 प्रतिशत या उससे अधिक हो तो छोटी छोटी बात पर दंगा करना….जिहादी ग्रुप बनाना,हत्यायें करना ….मंदिर और चर्च जला देना आम बात हो जाती है जैसा कि ……
Ethiopia -- Muslim 32.8%
At 40%, nations experience widespread massacres, chronic terror attacks, and ongoing militia warfare, such as in:
Bosnia -- Muslim 40%,Chad -- Muslim 53.1%,Lebanon -- Muslim 59.7%

60 प्रतिशत से ऊपर वाली जनसंख्या वाले देशों मैं गैर मुस्लिमों को औऱ अन्य मुस्लिम समुदाय जैसे पाकिस्तान मैं अहमदिया पर स्वायंभू तरीके से मुकदमें चलाकर उन्हें परेशान किया जाता है औऱ एक तरह से उनकी सामुहिक हत्यायें आदि करके उनको खत्म किया जाता है…..औऱ इसके लिए हथियार बनाया जाता है शरिया कानून को औऱ जजिया कर जो कि काफिरों पर लगाया गया टैक्स है कि वे शांति से जी सकें…….जैसा निम्न देशों मैं हो रहा है……
Albania -- Muslim 70%,Malaysia -- Muslim 60.4%,Qatar -- Muslim 77.5%,Sudan -- Muslim 70%

औऱ 80 प्रतिशत के बाद हिंसक जिहाद औऱ हत्यायें रोजमर्रा का काम हो जाता है…..याने राज्य द्वारा प्रायोजित सामुहिक हत्यायें क्यों कि काफिरों को खत्म करना इन देशों की मूल नीति होती हैऔर 100 प्रतिशत मुस्लिम जनसंख्या लक्ष्य जैसा कि निम्न देशों मै हो रहा है….
Egypt -- Muslim 90%,Gaza -- Muslim 98.7%,Indonesia -- Muslim 86.1%,Iran -- Muslim 98%,Iraq -- Muslim 97%,Jordan -- Muslim 92%,Morocco -- Muslim 98.7%,Pakistan -- Muslim 97%,Palestine -- Muslim 99%,Syria -- Muslim 90%,Tajikistan -- Muslim 90%,Turkey -- Muslim 99.8%,United Arab Emirates -- Muslim 96%

और जहां संपूर्ण लक्ष्य प्राप्तकर लिया जाता है वहां दार –ए -सलाम के रूप मैं शांति का प्रवेश होता है…..और वहां पूरी तरह से शांति औऱ शांति ही होनी चाहिये क्यों कि हर व्यक्ति मुसलमान है…..विध्यालयों की जगह सिऱ्फ मदरसे होते हैं औऱ कोरान ही सिर्फ साहित्य होता है……..चारों और इस्लाम का बोलबाला होता है…..सिर्फ कुरान सुनाई देती है जैसा इन देशों मैं हुआ है…….

पर दुर्भाग्य से शांति कभी नहीं आती जैसा कि इन देशों मैं हुआ है…जिनमें बिना किसी अपवाद के सबसे कट्टर मुसलमान रहते हैं और जो अपनी खून की प्यास को थोङे कम कटेटर मुसलमानों के खून से बुझाते हैं…..जिसके अनेक कारण गिनाये जा सकते हैं

Afghanistan -- Muslim 100%
Saudi Arabia -- Muslim 100%
Somalia -- Muslim 100%
Yemen -- Muslim 100%'

Before I was nine I had learned the basic canon of Arab life. It was me against my brother; me and my brother against our father; my family against my cousins and the clan; the clan against the tribe; the tribe against the world, and all of us against the infidel. -- Leon Uris, 'The Haj'

ये समझना बहुत ही महत्वपूर्ण है कि जिन देशों मैं मुस्लिम जनसंख्या 100 प्रतिशत से ठीक ठाक कम होती है जैसे फ्रांस जहां अल्पसंख्यक मुस्लिम जनसंख्या अपनी ही बनाई हुई बस्तियों मैं रहती है जहां वे शरियत कानून के अनुसार रहते हैं….जहां पुलिस प्रवेश भी नहीं करती………जहां न पुलिस न न्यायालय न विध्यालय और न हीं गैर मुस्लिमों के लिए कोई धार्मिक सुविधा होती है….ऐसे मैं मुस्लिम समाज के अन्य वर्गों के साथ मिल भी नहीं सकते ……बच्चे मदरसों मैं जाते हैं और केवल कुरान सीखते हैं जिसमें वो जान पाते हैं कि काफिर की सजा केवल मौत है……………

आज 1.5 अरब मुसलमान विश्व की जनसंख्या का 22 प्रतिशत है….पर उनकी जन्म दर ईसाई,हिंदु,बौंद्ध,यहूदी और अन्य सभी धर्मों के मानने वालो से अधिक हैइस सदी के अंत तक मुसलमान विश्व की जनसंख्या के 50 प्रतिशत से ज्यादा होंगे……….

सोचो………और सोचो…………….फिर क्या होगा…..

Adapted from Dr. Peter Hammond's book: Slavery, Terrorism and Islam: The Historical Roots and Contemporary Threat.

Wednesday, January 25, 2012

इंडोनेशिया के हिन्दू इतिहास में जुड़ा नया अध्याय


पूवी ईशांत देश इंडोनेशिया आज एक ईस्लामिक देश है और यहाँ मुस्लिम जनसंख्या सर्वाधिक है, परंतु इस देश का इतिहास भी हिन्दू धर्म की गौरवगाथा का प्रमाण पेश करता है. और अब खुदाई के दौरान दिखे एक अति प्राचीन मंदिर के अवशेष इस देश के हिन्दू इतिहास में कई नए तथ्य जोड़ सकता है.

इंडोनेशिया के योगकर्ता शहर के ईस्लामिक विश्वविद्यालय में नए पुस्तकालय की नीवं डालने के लिए खुदाई शुरू की गई तो पता चला कि वहाँ की जमीन स्थिर नहीं है. मजदूरों ने सावधानीपूर्वक और अधिक खुदाई की तो एक प्राचीन मंदिर की दिवारें दिखाई दी. इसके बाद तेज वर्षा की वजह से मंदिर की पृष्ठभूमि और गर्भगृह दिखाई दिया जहाँ भगवान गणेश की मूर्ति स्थापित थी.

इसके बाद इस स्थान का कब्जा इंडोनेशिया के पुरातत्व विभाग ने ले लिया. कुछ सप्ताह की खुदाई के बाद पता चला है कि यह मंदिर करीब 1000 वर्ष पुराना है. अब पुरातत्व विभाग ने इसे अमूल्य धरोहर घोषित कर दिया है. पुरातत्व विभाग का मानना है कि यह मंदिर इंडोनेशिया में ईस्लाम के प्रवेश से पहले की संस्कृति के बारे में कई महत्वपूर्ण जानकारियाँ प्रदान कर सकता है.

क्यों है यह मंदिर महत्वपूर्ण?

अभी तक इंडोनेशिया में खुदाई के दौरान कोई साबुत मंदिर नहीं मिला था. लेकिन यह पहला मंदिर है जो अपनी वास्तविक स्थिति में है. पुरातत्व विभाग के डॉ. बुद्धि सानकोयो के अनुसार यह एक महत्वपूर्ण खोज है क्योंकि यह मंदिर अभी भी अपनी मूल स्थिति में है और सभी मूर्तियाँ भी अपने मूल स्थान पर है.

अब इस स्थान पर गणेश की मूर्ति के अलावा शिवलिंग, नंदी गाय और कई अन्य मूर्तियाँ भी मिली है.

डॉ. बुद्धि का मानना है कि 10वीं सदी में किसी ज्वालामुखी के फटने से यह मंदिर उसके लावा में दब गया होगा और उसी लावा की वजह से इतने वर्षों के बाद भी सुरक्षित रह पाया होगा.

अभी इस मंदिर की खुदाई और सरंक्षण का कार्य चल रहा है और बाद में इसे आम जनता के लिए खोला जाएगा.

इंडोनेशिया के इतिहास में हिन्दू:

इंडोनेशिया द्वीपसमूह सातवीं शताब्दी से एक महत्वपूर्ण व्यापारिक क्षेत्र रहा है. यहाँ के शासक पश्चिमी देशों के साथ व्यापार व्यवहार करते थे. सातवीं से दसवीं शताब्दी के बीच वे हिन्दू और बोद्ध धर्म के सम्पर्क में आए. श्रीविजय राजशाही ने चीन और भारत के साथ व्यापारिक संबंध स्थापित किए थे. धीरे-धीरे भारतीय सांस्कृतिक, धार्मिक और राजनीतिक असर इंडोनेशिया पर छाने लगा और कालांतर में हिंदू और बौद्ध राज्यों का उत्कर्ष हुआ.

13वीं शताब्दी में अरब के मुस्लिम व्यापारी यहाँ आए और इसके साथ ही ईस्लाम का भी आगमन हुआ. आज यहाँ मुस्लिम आबादी बहुमत में है.


साभार - तरकश

Tuesday, January 24, 2012

राईट बन्धुओं से पहले ही भारत में विमान का आविष्कार हो चुका था !


हिन्दू धर्म से संबंधित विभिन्न धार्मिक कथा कहानियों में इस प्रकार के उल्लेख मिलते हैं कि प्राचीन काल में विभिन्न देवी-देवता,यक्ष,गंधर्व,ऋषि-मुनि इत्यादि विभिन्न प्रकार के विमानों द्वारा यात्रा भ्रमण किया करते थे। जैसे कि रामायण में पुष्पक विमान का वर्णन आता है। महाभारत में भी श्री कृष्ण, जरासंध आदि के विमानों का वर्णन आता है। इसी प्रकार से श्रीमहाभागवत में कर्दम ऋषि की एक कथा आती है कि तपस्या में तल्लीनता के कारण वे अपनी पत्नी की ओर अधिक ध्यान नहीं दे पाते थे। किन्तु कुछ समय बाद जब उन्हे इसका भान हुआ तो उन्होंने अपने विमान के द्वारा उसे संपूर्ण विश्व का भ्रमण कराया। 

देखा जाए तो इन उपरोक्त वर्णित कथाओं को जब आज का तार्किक व प्रयोगशील व्यक्ति सुनता,पढ़ता है तो उसके मन में स्वाभाविक रूप से ये विचार आता है कि यें सब कपोल कल्पनाएं हैं, मानव के मनोंरंजन हेतु गढ़ी गई कहानियॉ मात्र है। ऐसा विचार आना सहज व स्वाभाविक है, क्योंकि आज देश में इस प्रकार के कहीं कोई प्राचीन अवशेष नहीं मिलते, जों ये सिद्ध कर सकें कि प्राचीनकाल में मनुष्य विमान निर्माण की तकनीक से परिचित था। किन्तु यदि भारतीय ग्रन्थों का सही तरीके से अध्ययन, मनन करें तो ये स्पष्ट हो जाता है कि युद्ध कौशल में प्रयोग होने वाले विभिन्न प्रक्षेपात्रों, अदृ्श्य अस्त्रों-शस्त्रों आदि की उपलब्धता भारत में विज्ञान के चर्मोत्कर्ष की ओर संकेत करती है। इसी क्रम में प्राचीन भारतीय विमान शास्त्र पर आज ये लेख प्रस्तुत कर रहा हूँ जिससे कि आप लोगों को प्राचीन भारतीय ज्ञान-विज्ञान की एक झलकी मिल सके।  

मैं यह दृ्डतापूर्वक कह सकता हूँ कि विभिन्न वैज्ञानिक निर्माण, आविष्कार आदि जितनी भी लोकोपयोगी विद्याएं हैं---ये सभी भारत की ही देन हैं। समुद्रतल तथा आकाशमंडल की परिधि में उडना, विभिन्न लोकों में गमन, विशाल भवन,यान, वाहन आदि का बनाना इत्यादि सम्पूर्ण यान्त्रिक संस्कृ्ति, आविष्कारों, खोजों की आदि विकासस्थली हमारी यह भारतभूमी ही है। व्यास,वशिष्ठ,विश्वामित्र,पाराशर, याज्ञवल्क्य, जैमिनी, अत्रि, वत्स, नारद, भारद्वाज, शकटायन, स्फोटायन, प्रभूति इत्यादि मन्त्रदृ्ष्टा ऋषि ही यन्त्रों के भी आविष्कारक तथा निर्माता रहे हैं । महर्षि अत्रि और वत्स तो अपने समय के तत्वान्वेषी वैज्ञानिक मनीषी थे तथा सर्वप्रथम इन्ही दो मनीषियों नें चन्द्र सूर्य ग्रहण विज्ञान और आकर्षण विज्ञान का पता लगाया था। जिसका विशद विवेचन यहाँ तो असंभव है। खेद है कि आज अपने इस गौरवपूर्ण अध्यायों से हम अपरिचित होकर उक्त तथ्यों के आविष्कार का श्रेय पश्चिमी जगत को देते हैं।  ओर जो थोडे बहुत कुछ बहुत लोग इन तथ्यों से परिचित हैं भी, वो भी अपनी अकर्मण्यता से इन अमूल्य तथ्यों को विश्व के प्रबुद्ध समाज के सामने लाने का कोई प्रयास नहीं करते।  लेकिन अगर कोई भला आदमी प्रयास करता भी है तो ये हिन्दूस्तान में बैठे पश्चिमबुद्धि काले अंग्रेज जो बैठे हैं, बिना जाने समझे इन तथ्यों को नकारने में। सबसे पहले तो इन तथाकथित विज्ञानबुद्धियों से ही निपटने में बेचारे का हौंसला पस्त हो चुका होता है--- शेष दुनिया को कोई क्या खाक समझाएगा।
यह निर्विवाद तथ्य है कि प्राचीन भारतीय ऋषि महर्षियों नें केवल धर्मव्यवस्था, दर्शन, ज्योतिष तथा कर्मकांड में ही नहीं बल्कि स्थापत्य कला, चिकित्साविज्ञान, खगोलविज्ञान, यन्त्रनिर्माण इत्यादि वैज्ञानिक क्षेत्र में भी विश्व का सफल नेतृ्त्व किया था।

महर्षि भारद्वाज प्रणीत "यन्त्र सर्वस्व" नामक ग्रन्थ मननीय है।
उक्त ग्रन्थ के वैमानिक प्रकरण में सामरिक एवं नागरिक दोनों प्रकार के विमानों के निर्माण का इतिहास  यन्त्र, उपयन्त्र, शत्रु के साथ युद्ध करने की विधि, अपने निर्माण की रक्षा, शत्रु के ऊपर धुँआ छोडना, उनको डराने के लिए भीषण आवाज करना, आग्नेयास्त्रों का प्रयोग करना इत्यादि विभिन्न विषयों का सांगोपांग वर्णन है। महर्षि भारद्वाज के शब्दों में पक्षियों की भान्ती उडने के कारण वायुयान को विमान कहते हैं। वेगसाम्याद विमानोण्डजानामिति ।।
विमानों के प्रकार:- शकत्युदगमविमान अर्थात विद्युत से चलने वाला विमान, धूम्रयान(धुँआ,वाष्प आदि से चलने वाला), अशुवाहविमान(सूर्य किरणों से चलने वाला), शिखोदभगविमान(पारे से चलने वाला), तारामुखविमान(चुम्बक शक्ति से चलने वाला), मरूत्सखविमान(गैस इत्यादि से चलने वाला), भूतवाहविमान(जल,अग्नि तथा वायु से चलने वाला)।
इतना ही नहीं इसी वैमानिक प्रकरण के "अहाराधिकरण" नामक खण्ड में विमानयात्रियों एवं चालकों के आहार अर्थात भोजन व्यवस्था का पूर्ण विवेचन किया गया है। उक्त आहाराधिकरण का पहला सूत्र है "आहार कल्पभेदात"  अर्थात वायुयान यात्रियों को आशानकल्प नामक कहे ग्रन्थ में कहे गए अनुसार ही भोजन व्यवस्था करनी चाहिए। यहाँ जिस आशानकल्प नामक ग्रन्थ का जिक्र किया गया है, दुर्भाग्य से वो ग्रन्थ आज लुप्त हो गया है। लेकिन जब महर्षि भारद्वाज नें अपने ग्रन्थ में इसका जिक्र किया है तो इतनी बात तो अवश्य स्पष्ट हो जाती है कि वो ग्रन्थ उनसे भी पूर्वकालीक तथा अत्यन्त प्राचीन है और साथ ही प्रमाणिक एवं शिष्ट सम्मत भी।
आगे महर्षि लिखते हैं कि विमान में भोजन व्यवस्था सर्वदा समयानुसार होनी चाहिए साथ ही भोजन को आकाश के दूषित वातावरण एवं विमान के विषैले गैस के प्रभाव से भी बचाना चाहिए।  यदि विमान में किसी कारणवश  स्थूल भोजन न मिले या असुविधा हो अथवा अरूचिकर हो तो हल्का एवं सूखा भोजन भी ग्रहण किया जा सकता है। रूचि के अनुसार कन्दमूल फल इत्यादि भी ग्राह्य हैं ।
महर्षि अगस्तय कृ्त "अगस्त्यविमानसंहिता" मे भी यह सिद्धान्त स्थिर किया गया है कि जिस प्रकार जल में नौकाएं तैरती हैं, उसी प्रकार अन्तरिक्ष में वायुभार आदि के सन्तुलन से जो यान गमनागमन करे ---वह विमान है। जले नौकेव यदयान विमान व्योम्नि कीर्तीतम ।।


खैर ये तो बात हुई अति प्राचीन काल की लेकिन यदि मैं आप लोगों से ये कहूँ कि इसी आधुनिक युग में जब 17 दिसंबर सन 1903 में राईट बन्धुओं द्वारा विमान का आविष्कार किया गया तो उससे 8 वर्ष पूर्व ही भारत में विमान का आविष्कार हो चुका था तो शायद आप लोग विश्वास नहीं करेंगें। आप में से कुछ लोग इसे शायद निरा झूठ या "गप्प" भी कह दें तो कोई अतिश्योक्ति न होगी । लेकिन ये बिल्कुल सच है । जी हाँ, सन 1895 में भारतवर्ष में मुम्बई के चौपाटी बीच पर पंडित श्री शिवकर बापू तलपदे जी(जो कि आजीवन भारतीय पद्धति से विमान निर्माण में लगे रहे) ने सम्पूर्ण भारतीय तकनीक से निर्मित " मरूत्सखा" नामक विमान बनाकर उसे 18 फिट ऊपर आकाश में उडाया भी था । महाराज सयाजीराव गायकवाड तथा श्रीरानाडे आदि विशिष्ट व्यक्तियों के समक्ष सम्पन इस कार्यक्रम का सम्पूर्ण सचित्र विवरण तात्कालिक केशरी न.भा.टा. तथा धर्मयुग के प्रथम अंक में प्रकाशित हुआ था । महाराजा बदौडा ने इस को आगे बढाने के लिए आर्थिक सहायता की भी घोषणा की थी...लेकिन ब्रिटिश सरकार के चलते यह संभव नहीं हो पाया। बाद में ब्रिटेन की "रेले" नाम की एक कम्पनी नें उस विमान का  ढाँचा मय सभी अधिकार खरीद लिए । 

अन्त में मैं आप लोगों से जानना चाहूँगा कि क्या उपरोक्त विवरण आपको ये विश्वास नहीं दिलाता कि प्राचीन काल में विमान विद्या कपोल कल्पना न होकर एक यथार्थ था। बेशक कुछ लोग मरते दम तक भारतीय ज्ञान-विज्ञान की सर्वोच्चता को अस्वीकार कर इन्हे कपोल कल्पना ही मानते रहें,लेकिन वास्तविकता तो ये है कि   ये सच है ओर ऎसे ही न जाने कितने अगिणित विश्वासों को सार्थक करने एवं अपनी सत्यता की सिद्धी हेतु हमारे सैंकडों हजारों ग्रन्थ आज भी सत्यन्वेषियों की राह देख रहे हैं।




विमान्सस्त्र से कुछ चित्र आपके लिए -








Monday, January 23, 2012

इन महाशय ने विवेकानन्द स्मारक न बनने देने, एवं रामसेतु को तोड़ने की योजना के लिए जी-तोड़ प्रयास किये थे

केरल के मूल निवासी 66 वर्षीय आर्चबिशप जॉर्ज एलेंचेरी को गत सप्ताह पोप ने कार्डिनल की पदवी प्रदान की। वेटिकन में की गई घोषणा के अनुसार सोलहवें पोप बेनेडिक्ट ने 22 नए कार्डिनलों की नियुक्ति की है। रोम (इटली) में 18 फ़रवरी को होने वाले एक कार्यक्रम में एलेंचेरी को कार्डिनल के रूप में आधिकारिक शपथ दिलाई जाएगी।

जॉर्ज एलेंचेरी, कार्डिनल नियुक्त होने वाले ग्यारहवें भारतीय हैं। वर्तमान में भारत में पहले से ही दो और कार्डिनल कार्यरत हैं, जिनका नाम है रांची के आर्चबिशप टेलीस्पोर टोप्पो एवं मुम्बई के आर्चबिशप ओसवाल्ड ग्रेसियस। हालांकि भारत के ईसाईयों के लिये यह एक गौरव का क्षण हो सकता है, परन्तु इस नियुक्ति (और इससे पहले भी) ने कुछ तकनीकी सवाल भी खड़े कर दिये हैं।

जैसा कि सभी जानते हैं, "वेटिकन" अपने आप में एक स्वतन्त्र राष्ट्र है, जिसके राष्ट्र प्रमुख पोप होते हैं। इस दृष्टि से पोप सिर्फ़ एक धर्मगुरु नहीं हैं, बल्कि उनका दर्जा एक राष्ट्र प्रमुख के बराबर है, जैसे अमेरिका या भारत के राष्ट्रपति। अब सवाल उठता है कि पोप का चुनाव कौन करता है? जवाब है दुनिया भर में फ़ैले हुए कार्डिनल्स…। अर्थात पोप को चुनने की प्रक्रिया में कार्डिनल जॉर्ज एलेंचेरी भी अपना वोट डालेंगे। यह कैसे सम्भव है? एक तकनीकी सवाल उभरता है कि कि, क्या भारत का कोई मूल नागरिक किसी अन्य देश के राष्ट्र प्रमुख के चुनाव में वोटिंग कर सकता है? इसके पहले भी भारत के कार्डिनलों ने पोप के चुनाव में वोट डाले हैं परन्तु इस सम्बन्ध में कानून के जानकार क्या कहते हैं यह जानना दिलचस्प होगा कि भारत के संविधान के अनुसार यह कैसे हो सकता है? यदि पोप "सिर्फ़ धर्मगुरु" होते तो शायद माना भी जा सकता था, लेकिन पोप एक सार्वभौम देश के राष्ट्रपति हैं, उनकी अपनी मुद्रा और सेना भी है…

क्या सलमान रुशदी भारत में वोटिंग के अधिकारी हैं? क्या चीन का कोई नागरिक भारत के चुनावों में वोट डाल सकता है? यदि नहीं, तो फ़िर कार्डिनल एलेंचेरी किस हैसियत से वेटिकन में जाकर वोटिंग करेंगे?

नोट : जिस प्रकार किसी सेल्समैन को 100% टारगेट प्राप्त करने पर ईनाम मिलता है, उसी प्रकार आर्चबिशप एलेंचेरी को कार्डिनल पद का ईनाम इसलिए मिला है, क्योंकि उन्होंने पिछले दो दशकों में कन्याकुमारी एवं नागरकोविल इलाके में धर्म परिवर्तन में भारी बढ़ोतरी की है। ज्ञात रहे कि एलेंचेरी महोदय वही "सज्जन" हैं जिन्होंने कन्याकुमारी में स्वामी विवेकानन्द स्मारक नहीं बनने देने के लिए जी-तोड़ प्रयास(?) किये थे, इसी प्रकार रामसेतु को तोड़कर "सेतुसमुद्रम" योजना को सिरे चढ़ाने के लिए करुणानिधि के साथ मिलकर एलेंचेरी महोदय ने बहुत "मेहनत"(?) की। हालांकि डॉ सुब्रह्मण्यम स्वामी के प्रयासों तथा हिन्दू संगठनों के कड़े विरोध के कारण वह दोनों ही "दुष्कृत्य" में सफ़ल नहीं हो सके।

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FROM - IBTL 
सुरेश चिपलूनकर ( लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं ) एवं यह उनके व्यक्तिगत विचार हैं

 

जम्मू और कश्मीर विधानसभा की अवधि ६ साल और अन्य राज्यों की ५ साल क्यों ?

ShreshthBharat द्वारा 21 अगस्त 2011 को 09:33 बजे पर
सच जो आप जानना चाहते है ! http://www.blog.shreshthbharat.in/nl/9-11/list.html
  1. केरल में विधायक, संसद और मंत्री अल्लाह,यीशु के नाम से सपथ लेते है | अगर हिंदू राम या कृष्ण के नाम से ले तो संबिधान के खिलाफ है ?
  2. अरबी भाषा को प्रमोट करने के लिए सरकार पैसे खर्च कर रही है | लेकिन संस्कृत पर क्यों नही ? क्या अरबी भाषा, संस्कृत के तुलना में अधिक राष्ट्रीय है ?
  3. IMTD Act क़ानूनी अधिकार से असम में बंगलादेशियो को भारत में बसने और नागरिक बनने का अधिकार देता है | तो जम्मू और कश्मीर में शेष भारतीय को बसने का अशिकर क्यों नही ? यह दोगली निति क्या है ?
  4. जम्मू और कश्मीर कि जनसंख्या लगभग एक करोड है जिन्हें २४००० करोड रुपये कि सहायता दी गयी है | यानी कि पर हेड २४००० रुपये | जबकि शेष राज्यों को इनसे ५% कम कि सहायता दी जाती है |क्या यह राष्ट्र विरोशियो के लिए इनाम नही है ?
  5. यदि पेंटिंग करना गैर- इस्लामिक है तो मुसलमानों ने एम् एफ हुसैन के खिलाफ कितने फतवे जारी किये गए थे ? क्या वो गैर- इस्लामिक कार्य नही किया था ?
  6. यदि इस्लाम में गायन, संगीत और नृत्य गैर- इस्लामिक है ( क्योकि इस्लाम एक गंभीर धर्म है ) तो बहुत “खान” फिल्म में अभिनय करते है | इनके खिलाफ फतवा क्यों नही जारी किया गया ?
  7. क्या आप को लगता है कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक देश रहेगा यदि मुसलमानों का बहुमत हो जाय तो ?
  8. हॉउस आफ कामंस, आस्ट्रेलिया संसद और ह्वाईट हॉउस आदि में जब दीपावली और जन्माष्टमी मनाया जाता है तो भारत के संसद में क्यों नही मनाया जाता है ? क्या हम संयुक्त राष्ट्र, अमेरिका, ब्रिटेन और आस्ट्रेलिया कि तुलना में अधिक धर्मनिरपेक्ष है ?
  9. यदि सांप्रदायिक दंगे भारत में आर एस एस, विहिप, बजरंग दल आदि के कारन होता है तो “ पाकिस्तान, तुर्की, अफगानिस्तान, इंडोनेशिया, चेचन्या, चीन, रूस, ब्रिटेन, स्पेन, साईप्रस आदि में किसकी वजह से दंगे होते है ?” जब कि वहाँ पर आर एस एस / विहिप नही है |
  10. एक पूर्व राष्ट्रपति, दो पूर्व प्रधानमंत्रियों, साधुओ,और संतो द्वारा कांची के संकराचार्य कि गिरफ्तारी के खिलाफ प्रदर्शन किया है | लेकिन मिडिया का कहना है कि “वहाँ बिलकुल कोई विरोध नही हुआ है”| क्या आप को लगता है कि केवल हिन्=हिंसा ही लोगो की [पीड़ा मापने का पैमाना है ?
  11. क्या आप को विश्वास है कि इस्लाम और ईसाईयत को सर्वधर्म समभाव में विश्वास है ? यदि हाँ, तो धर्म रूपांतरण में विश्वास क्यों करते है ?
  12. ईश्वर अल्लाह तेरे नाम – आप मुझे एक मुसलमान दिखाए जो इससे सहमत हो ?
  13. क्या आप को नही लगता है कि “ सेक्युलर मुस्लिम एक मिथ्या नाम है ? एक व्यक्ति या तो सेक्युलर या मुसलमान हो सकता है, दोनों नही ? एक मुस्लिम ( जो केवल अल्लाह में विश्वास करता है) धर्म-निरपेक्ष(कई परमेश्वर में विश्वास) नही हो सकता है |
  14. क्या आप जानते है कि “ तथाकथित धर्मनिरपेक्ष मौलाना वहीदुद्दीन, जब भारतीय सैनिक कारगिल में लड़ रहे थे तो, उनसे सैनिको के लिए प्रार्थना करने को कहा गया तो इंकार कर दिया ? क्योकि भारतीय सैनिक मुसलमानों से लड़ रहे थे ?” ( बाद में सोनिया और प्रियंका ने उसके अंतिम संस्कार में भाग ली थी )
  15. संयुक्त राष्ट्र चार्टर का कहना है कि “ अल्पसंख्यक का मतलब पूरी आबादी का अधिक से अधिक १०% होता है | मुसलमान, जो लगाभाग १८% से ऊपर है को एक अल्पसंख्यक कैसे कहा जा सकता है ?
  16. क्या आप को विश्वास है कि “कम्युनिस्टों को भारत से प्यार है ?”, जब कि वे स्वीकार करने से मना करते है कि १९६२ में चीन भारत पर हमलावर था ?
  17. ये कैसे होता है कि “ एक मुस्लिम परिवार मुख्य रूप से हिंदू इलाके में शांति से रहता है, जबकि एक मुस्लिम बस्ती में एक हिंदू परिवार ऐसा करने में सक्षम नही है ?
  18. मुस्लिम बहुत क्षेत्रो में ईसाई मिशिनारिज क्यों नही सामाजिक सेवाए शुरू कराती है ? क्योकि वहाँ निवेश पर पर्याप्त फल नहीं मिलेगा |
  19. क्या आप जानते है कि “ भारत एक मात्र देश है जो खुले तौर पर बंगलादेश के घुसपैठियों को आमंत्रित किया है | बिहार, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल के सरकारों ने तत्काल उन्हें रासन कार्ड उपलब्ध कराके मतदाता बना दिया |”
  20. दंगे शुक्रवार की नमाज के बाद ही ज्यादातर हुए है ( जैसे मरद, केरल) | क्या यह इमामों के ज्वलंत उपदेशो की वजह से नही है ?
  21. सभी हिंदू बहुल क्षेत्र शांतिपूर्ण है, लेकिन सभी हिंदू अल्पसंख्यक क्षेत्र समस्याग्रस्त है – जम्मू और कश्मीर, उत्तर – पूर्वी भारत आदि | क्या आप इसकी व्याख्या कर सकते है कि ऐसा क्यों ?
  22. एक विधायक, सी. पी. शाजी ने केरल विधानसभा में कहा कि “ वो हाथ काट दिया जायेगा, जो शरियत के एक अक्षर को छुयेगा” | क्या आप इससे सहमत है ?
  23. क्या आप जानते है कि “भारत में अवैध रूप से आये मुस्लिम अप्रवाशी २५ लोकसभा और १२० विधानसभा सीटों के चुनाव में एक निर्णायक कारक बन गए है ? और वे एक विशेष पार्टी के लिए एकजुट हो के मतदान करते है – कंग्रस, राजद, सपा, एमएल, या साम्यवादी |”
  24. एक पाकिस्तानी भारतीय हो सकता है ? जब वह जम्मू और कश्मीर के किसी एक लडकी से शादी कर ले, लेकिन इसके विपरीत जब वही लड़की भारत के किसी भी हिस्से के एक हिंदू से शादी करे तो वह जम्मू और कश्मीर की नागरिक नहीं हो सकते है, जम्मू और कश्मीर कि नागरिकाता खो देती है ? यह किस तरह का कानून है ?
  25. अयोध्या मामले में, सुप्रीम कोर्ट ने विश्व हिंदू परिषद पूछताछ की लेकिन बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी या आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड से सवाल नही की? क्या यह सुप्रीम कोर्ट का दुहरा मापदंड नही है ?
  26. जब आप नरेन्द्र मोदी जैसे लोगो से तुच्छ आधार पर मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा मांग रहे है तो आप क्यों नही जम्मू और कश्मीर के मुख्यमंत्री से इस्तीफा माँगते है ? जहां पर हजारों सैनिक आतंकवादियों द्वारा मार दिए गए है और तो और ४ लाख हिन्दुओ का सफाया कर दिया गया है |
  27. लोकपाल कश्मीर मे नहीं लागू होगा 
  28. जम्मू और कश्मीर का पूर्व मुख्यमंत्री फारुख अब्दुल्ला एक ईसाई से शादी किया और वर्तमान मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला एक हिंदू लडकी से शादी करके आनंदित थे, लेकिन जब उसकी बेटी एक हिंदू लड़के से शादी कर ली तो उसका परित्याग कर दिया गया | क्या यही धर्मनिरपेक्षता का पहचान है ?
  29. कश्मीर मे सोनिया का सांप्रदायिक हिंसा बिल कानून लागू नहीं होगा क्योंकि वहाँ अल्प संख्यक हिन्दू - सिख है वे भी मात्र 2-3 हजार
  30. भारतीय कानून के अनुसार “ मानव अंगों को किसी भी पार्टी के चुनाव चिन्ह के रूप में नही लिया जा सकता है” तो कैसे कांग्रेस पार्टी को ‘हाथ’ का प्रतिक आवंटित किया गया है ? यह कानून के खिलाफ नही है ?
  31. दिल्ली इमाम सैयद बुखारी के घोषणा थी कि तालिबान सभी मुसलमानों के लिए आदर्श है और ओसामा बिन लादेन नायक ? क्या आप इस धर्मनिरपेक्षता पर विचार करेंगे ?
  32. जम्मू और कश्मीर के संसदीय चुनाव के लिए २ लाख हिंदू वयस्क मतदाता है | लेकिन विधानसभा के लिए नही ? क्यों ?
  33. जम्मू और कश्मीर विधानसभा की अवधि ६ साल और अन्य राज्यों की ५ साल क्यों ?
  34. बंगलादेश में हिंदू लड़किया पीटी जाती है, उनके साथ गैंग रैप किया जाता है | प्रतिदिन मंदिरों को जलने या नष्ट करने कि खबरे पढैते होंगे | क्या हमारे धर्मनिरपेक्षतावादी और मानवाधिकारी कार्यकर्ताओ को इनके लिए आवाज़ नही उठानी चाहिए ? क्या सिर्फ मुसलमानों के लिए ही मानवाधिकार है ?
  35. क्या आप जानते है कि “ इस्लाम राष्ट्रवाद और राष्ट्रिय सीमाओ में विश्वास नही करता है | यह पूरी दुनिया को इस्लाम के तहत दारुल हरब से दारुल इस्लाम तक लाना चाहते है ?”
  36. क्यों मुस्लिम मस्जिद और मदरसे में जाते है न कि स्कूल और कालेज में ? क्या मदरसा भी वैज्ञानिक और इंजिनियर तैयार करता है ? (सेक्युलर नेताओ द्वारा मुसलमानों को अलग से आरक्षण के लिए अपना सर पिटने के सन्दर्भ में )
  37. मुहर्रम जुलूस हिंदू बाहुल्य क्षेत्रो से लाया जारहा है लेकिन हिंदू धार्मिक जुलूस मुस्लिम इलाको से अनुमति नही है क्यों ? क्या यह सम्रदायिक बटवारे को स्थायी नही करता है ?
  38. क्या आपको लगता है कि नेहरू परिवार ही एक परिवार है जो आजादी के लिए लड़े या अन्य स्वतंत्रता सेनानियों ke भी थे? जैसे भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, मदनलाल धींगरा ,वन्शिनाथान, चापेकर ब्रदर्स, वीर सावरकर, राज गुरु, सुभाष चंद्र बोस, उधम सिंह आदि |
  39. मल्लापुरम ( केरल) में , एक डाक्टर ने पाया कि मुस्लिम महिलाओ कि तीन पीढियां बेटी-१३, माँ-२६ और दादी – ३९ सभी गर्भवती है तथा प्रसव के लिए भारती कराया | क्या आप को भी लगता है कि मुसलमानों के लिए परिवार नियोजन अनावश्यक है ?
  40. रामायण के लेखक ऋषि वाल्मीकि एक डाकू थे, उसी तरह महाभारत के लेखक वेड व्यास एक मछुवारे थे | दोनों महाकाव्यो और लेखक हिन्दुओ द्वारा प्रतिष्ठित है | क्या अब भी लगता है कि हिंदू धर्म जातिवाद का समर्थन करता है ?
  41. २००२ में कर्नाटक सरकार मंदिरों द्वारा प्राप्त ७२ करोड रुपयों में से ५० करोड मदरसों को, १० करोड चर्च को, १० करोड मंदिरों को दिया गया | मदरसो (आतंकवादी कारखाना ) और चर्चो के विकास के लिए हिन्दुओ का पैसा क्या देना चाहिए ?
  42. जब अफगानिस्तान में तालिबान, बुद्ध प्रतिमा को ध्वस्त कर दिया, तो टाइम्स ऑफ इंडिया ने लिखा है कि यह बाबरी मस्जिदके विध्वंस की प्रतिक्रिया में था. क्या आप टाइम्स ऑफ इंडिया द्वारा के इस औचित्य से सहमत? जैसे को तैसा के लिए ठीक है? तो फिर तुम क्यों गोधरा कांड की प्रतिक्रिया में गुजरात दंगों की आलोचना करते हो ?
  43. पांडिचेरी में एक मुस्लिम को दफनाने से इनकार कर दिया गया था क्योंकि वह प्रभु मुरुगा के लिए एक मंदिर का निर्माण किया था क्या आप को भी लगता है कि "धर्म एक दूसरे से नफरत नहीं सिखाते हैं"?
  44. १९८९ में कांग्रेस के चुनावी घोषणापत्र में राजीव गाँधी ने घोषणा की कि “ अगर मिजोरम में कांग्रेस सत्ता में आई तो यहाँ बाईबल के अधर पर शिक्षाए दी जायेगी (?)” यदि यह सांप्रदायिक नही है तो क्या है ?
  45. वर्ल्ड मुस्लिम अल्पसंख्य समुदाय के अध्यक्ष, कुवैत के शेख अल सईद युसूफ सयेद हासिम रिफाई को केरल में बिना वीजा के आने कि अनुमति दी गयी थी और उन्हें गिर्गिराफ्तर नही किया गया बल्कि केरल सर्कार के सरकारी दामाद की तरह खातिरदारी कि गयी और लेजाने लाने के लिए सरकारी कार कि व्यवस्था कि गयी थी | क्या यह राष्ट्रवाद को बढ़ावा देने वाला कार्य है ?
  46. यदि ब्रिटेन और अमेरिका( एक धर्म निरपेक्ष देश) में एक से अधिक महिला से शादी करने कि अनुमति नही है तो क्या भारत में एक से अधिक औरतो से शादी करने कि अनुमति देनी चाहिए ?
  47. पोप को भारत कि यात्रा को आमंत्रित किया गया था लेकिन नेपाल के राजा महेंद्र को नागपुर में १९६५ में मकरसंक्रांति समारोह में भाग लेने के लिए अनुमति नही दी गयी थी | क्या यही धर्म निरपेक्षता है ?
  48. अशोक और कनिष्क अफगानिस्तान पर शासन किया. कंधारी जो की दुर्योधन की माँ, कंधार से आया है ( अब अफगानिस्तान में )| क्या आप मानते हैं कि अफगानिस्तान एकबार भारत का अभिन्न हिस्सा था?
  49. त्रिपुरा में बैप्टिस्ट चर्च को न्यूजीलैंड से 60 साल पहले मिशनरियों द्वारा स्थापित किया गया था | क्या आपको लगता है कि चर्च राष्ट्रवाद को बढ़ावा देंगे?
  50. पाकिस्तान में छात्रों को शुरू से ही सिखाया जाता है कि हिंदु हमारे दुश्मन हैं, हिंदू से मित्रता कभी नहीं किया जा सकता है काफिरो (हिंदुओं) को मार देना चाहिए. क्या आप को अब भी लगता है कि दोस्ती पाकिस्तान के साथ संभव है?
  51. पाकिस्तान इस्लामी देश है,बायीं-पास सर्जरी या कैंसर के इलाज के लिए भारत आते है | पाकिस्तान कैसा एक देश है जिसके पास परमाणु विकशित करने की क्षमता है लेकिन एक अच्छे अस्पताल कि नही ?इसका मतलब है कि पाकिस्तानी सिर्फ ट्रिगर से खुश है विकास और स्वास्थ्य सीवाओ की कीमत पर |
  52. कम्युनिस्ट नेता स्टालिन की बेटी, स्वेतलाना, दिनेश सिंह के भाई से शादी करने के लिए और भारत में बसने की कामना की | हमारे साम्यवादियों और इंदिरा गांधी ने इस का विरोध किया | वे अब कैसे एक इतालवी महिला का समर्थन करे ?
  53. जब योगा संयुक्त राज्य अमेरिका में एक करोड़ों डॉलर का उद्योग है, हमारी सरकार क्यों अंधी बन गयी है इस तकनीक मानवविकास के लिए ? क्या इसलिए कि यह हिंदू संस्कृति का एक हिस्सा है ?
  54. पूजा में 'संकल्प' "भारत वर्षे , भारत कंडे......... के साथ शुरू होता है ...". ये क्या हैं? क्या आप को अभी भी लगता है कि अध्यात्मवाद और राष्ट्रवाद अलग कर रहे हैं ? ये राष्ट्र की दो आंखें है?
  55. अध्यात्मवाद और राष्ट्रवाद भारत में अविभाज्य हैं.क्या आपको नहीं लगता कि अध्यात्मवाद के बिना भारत बिना आत्मा के एक शरीर की तरह हो जाएगा?
  56. हिंदू धर्म में आप को सुधारको कि संख्या बहुत मिल जायेगी | अन्य धर्मो में क्यों नही पाई जाती है ? क्या इन्हें सुधारने कि जरुरत नही है कि सुधारे हुए है ?



सोनिया गांधी ने अपनी जन्म दिनांक 1944 बताई है लेकिन सुचनाए कहती है की उसके पिताजी सिग्नोर स्टेफनो माइनो 1942 से 1945 के बीच रूस मे केदी थे !

Sunday, January 22, 2012

हिन्दुओं को भी संघ निष्ठां की जरूरत


कौरव क्या कम बुद्धिमान व कम शूरवीर थे ? भीष्म , दरोन् , कर्ण , अश्वत्थामा , से टक्कर ले सकने वाला पांडव पक्ष में अर्जुन के अतिरिक्त कोई दूसरा योद्धा ना था ...फिर भी कौरव किस लिए हार गए ?? संघ निष्ठा का अभाव ही उनके पतन का कारण था ...
भीष्म दरोन् आदि सभी महान थे..परन्तु प्रत्येक व्यक्तिनिष्ट थे ...संघ या समूह के लिए व्यक्तित्व के त्याग की उनकी तौयारी ना थी ..( आदर्श समूह के निर्माण के लिए व्यक्ति अ...पने अपने कुछ अधिकारों को समाज को देता है ..समाज हित के लिए व्यक्तिगत हितों का त्याग करता है ...तब समाज बनता है ...)...भीष्म पितामह अपनी प्रतिज्ञा छोड़ने को तौयार ना थे ...उन्होंने कहा "मै पुरुष के अतिरिक्त किसी से युद्ध नहीं करूँगा "....दरोन् ने कहा , " मेरा पुत्र मारा या हाथी ...इसे निश्चित किये बिना मै युद्ध नहीं करूँगा " कर्ण का भी व्यक्तिगत अहम अधिक था ...वह कहता है , " जब तक भीष्म व दरोन् लड़ते हैं तब तक मै रन क्षेत्र में नहीं जाऊँगा "
इन लोगों में संघ निष्ठा नहीं थी ......
परन्तु पांडवों में प्रत्येक व्यक्ति के महान होने पर भी , उन्होंने संघ के लिए अपनी -अपनी प्रतिज्ञाएं तोड़ी थी .....महाभारत युद्ध में हाथ में शस्त्र न् लेने की प्रतिज्ञा को श्रीकृष्ण ने भी हाथ में शस्त्र लेकर तोडा ...निः शस्त्र कर्ण पर अर्जुन ने बाण छोड़ा ...कभी असत्य को स्पर्श ना करने वाले युधिस्थीर ने भी \'नरो वा कुंजरों वा\' बोला था ...भीम ने भी गदा युद्ध के नियमों को छोड़ कर युद्ध किया था ...
कहने का तात्पर्य है व्यक्ति निष्ठा से बढ़ कर संघ निष्ठा होनी चाहिए ....
समूह / संघ के लिए जीवन न्योछावर करने की तत्परता के लिए व्यक्तिगत हितों की तिलांजलि से हमारी संस्कृति खड़ी हुई है ...
और आज इसी की सर्वाधिक जरूरत है ...टूटन को रोकने के लिए ...
एक बड़े मुस्लिम नेता ने ( सभी जानते हैं ) एक बार गांधी जी के बारे में कहा था ..." गाँधी जी महापुरुष हैं मै उनका आदर करता हूँ ..परन्तु उनकी अपेक्षा एक मार्ग में भटकता मुसलमान मुझे अधिक प्रिय है "
इसमें हमें कदाचित उस मुसलमान की धर्मान्धता दिखाई दे ...परन्तु समाज शास्त्र की दृष्टि से यह होनी ही चाहिए ...संघ निष्ठा के बिना हमारे दुर्लभ विचारों व सिद्धांतों का नुक्सान ही हुआ है !

Wednesday, January 18, 2012

आज भी अपने घरों से विस्थापित कश्मीरी हिन्दू


पवन कुमार अरविंद
26 जनवरी को भारत अपना 63वां गणतंत्र दिवस मनाने जा रहा है लेकिन विडम्बना है कि कश्मीर के हिन्दू आज भी अपने घरों से दूर विस्थापित जीवन जीने को मजबूर हैं। केन्द्र व राज्य सरकारों की भेदभावपूर्ण नीतियों के कारण 19 जनवरी 1990 को कश्मीरी हिन्दुओं को अपने ही घरों से विस्थापित होना पड़ा।

कश्मीर के मूल निवासी कश्मीरी हिन्दुओं की सभ्यता व संस्कृति लगभग पांच हजार वर्ष से भी ज्यादा पुरानी है। इनकी सभ्यता, संस्कृति और सांस्कृतिक धरोहरों को वर्ष 1989 से ही पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवादियों व अलगाववादियों द्वारा कुचलने का प्रयास किया जा रहा है। कश्मीर से हिंदुओं का निर्मूलन आतंकियों तथा स्थानीय अलगाववादियों का एक प्रमुख मुद्दा रहा है, क्योंकि कश्मीरी हिन्दू अलगाववादियों की राह का सबसे बड़ा रोड़ा थे। इसी कारण शांतिप्रिय हिन्दू समुदाय आतंकियों का प्रमुख निशाना बना।

04 जनवरी 1990 को कश्मीर के एक स्थानीय अखबार ‘आफ़ताब’ ने हिज्बुल मुजाहिदीन द्वारा जारी एक विज्ञप्ति प्रकाशित की। इसमें सभी हिंदुओं को कश्मीर छोड़ने के लिये कहा गया था। एक और स्थानीय अखबार ‘अल-सफा’ में भी यही विज्ञप्ति प्रकाशित हुई। विदित हो कि हिज्बुल मुजाहिदीन का गठन जमात-ए-इस्लामी द्वारा जम्मू-कश्मीर में अलगाववादी व जिहादी गतिविधियों को संचालित करने के मद्देनजर वर्ष 1989 में हुआ।

आतंकियों के फरमान से जुड़ी खबरें प्रकाशित होने के बाद कश्मीर घाटी में अफरा-तफरी मच गयी। सड़कों पर बंदूकधारी आतंकी और कट्टरपंथी क़त्ल-ए-आम करते और भारत-विरोधी नारे लगाते खुलेआम घूमते रहे। अमन और ख़ूबसूरती की मिसाल कश्मीर घाटी जल उठी। जगह-जगह धमाके हो रहे थे, मस्जिदों से अज़ान की जगह भड़काऊ भाषण गूंज रहे थे। दीवारें पोस्टरों से भर गयीं, सभी कश्मीरी हिन्दुओं को आदेश था कि वह इस्लाम का कड़ाई से पालन करें। लेकिन तत्कालीन मुख्यमंत्री फारूख अब्दुल्ला की सरकार इस भयावह स्थिति को नियन्त्रित करने में विफल रही।
 
कश्मीरी हिन्दुओं के मकानों, दुकानों तथा अन्य प्रतिष्ठानों को चिह्नित कर उस पर नोटिस चस्पा कर दिया गया। नोटिसों में लिखा था कि वे या तो 24 घंटे के भीतर कश्मीर छोड़ दें या फिर मरने के लिये तैयार रहें। आतंकियों ने कश्मीरी हिन्दुओं को प्रताड़ित करने के लिए मानवता की सारी हदें पार कर दीं। यहां तक कि अंग-विच्छेदन जैसे हृदयविदारक तरीके भी अपनाए गये। संवेदनहीनता की पराकाष्ठा यह थी कि किसी को मारने के बाद ये आतंकी जश्न मनाते थे। कई शवों का समुचित दाह-संस्कार भी नहीं करने दिया गया।

19 जनवरी 1990 को श्री जगमोहन ने जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल का दूसरी बार पदभार संभाला। कश्मीर में व्यवस्था को बहाल करने के लिये सबसे पहले कर्फ्यू लगा दिया गया लेकिन यह भी आतंकियों को रोकने में नाकाम रहा। सारे दिन जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) और हिज्बुल मुजाहिदीन के आतंकी आम लोगों को कर्फ्यू तोड़ सड़क पर आने के लिए उकसाते रहे। विदित हो कि राज्य में 19 जनवरी से 9 अक्टूबर 1996 तक राष्ट्रपति शासन रहा।

अन्तत: 19 जनवरी की रात निराशा और अवसाद से जूझते लाखों कश्मीरी हिन्दुओं का साहस टूट गया। उन्होंने अपनी जान बचाने के लिये अपने घर-बार तथा खेती-बाड़ी को छोड़ अपने जन्मस्थान से पलायन का निर्णय लिया। इस प्रकार लगभग 3,50,000 कश्मीरी हिन्दू विस्थापित हो गये। इससे पहले जेकेएलएफ ने भारतीय जनता पार्टी के नेता पंडित टीकालाल टपलू की श्रीनगर में 14 सितम्बर 1989 को दिन-दहाड़े हत्या कर दी। श्रीनगर के न्यायाधीश एन.के. गंजू की भी गोली मारकर हत्या कर दी गयी। इसके बाद क़रीब 320 कश्मीरी हिन्दुओं की नृशंस हत्या कर दी गयी जिसमें महिला, पुरूष और बच्चे शामिल थे।

विस्थापन के पांच वर्ष बाद तक कश्मीरी हिंदुओं में से लगभग 5500 लोग विभिन्न शिविरों तथा अन्य स्थानों पर काल का ग्रास बन गये। इनमें से लगभग एक हजार से ज्यादा की मृत्यु 'सनस्ट्रोक' की वजह से हुई; क्योंकि कश्मीर की सर्द जलवायु के अभ्यस्त ये लोग देश में अन्य स्थानों पर पड़ने वाली भीषण गर्मी सहन नहीं कर सके। क़ई अन्य दुर्घटनाओं तथा हृदयाघात का शिकार हुए।
यह विडंबना ही है कि इतना सब होने के बावजूद
इस घटना को लेकर शायद ही कोई रिपोर्ट दर्ज हुई हो। यदि यह घटना एक समुदाय विशेष के साथ हुई होती तो केन्द्र व राज्य सरकारें धरती-आसमान एक कर देतीं। मीडिया भी छोटी से छोटी जानकारी को बढ़ा-चढ़ाकर वर्णन करता। लेकिन चूंकि पीड़ित हिंदू थे इसलिये न तो कुछ लिखा गया, न ही कहा गया। सरकारी तौर पर भी कहा गया कि कश्मीरी हिन्दुओं ने पलायन का निर्णय स्वेच्छा से लिया। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने एक सतही जांच के बाद सभी तथ्यों को ताक पर रख इस घटना को नरसंहार मानने से साफ इन्कार कर दिया। जबकि सत्यता यह थी कि सैकड़ों महिला, पुरुष और बच्चों की नृशंस हत्या हुई थी।

भारत का संविधान देश में किसी भी व्यक्ति को जाति, मजहब, भाषा और प्रांत के आधार पर विभाजित किये बिना सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अधिकार देता है। कश्मीरी पंडितों का पलायन क्या इस अधिकार का हनन नहीं है? केवल सरकार ही नहीं बल्कि वैश्विक स्तर के मनवाधिकार संगठन भी इस मामले पर मौन रहे। विख्यात अंतरराष्ट्रीय संगठनों; जैसे- एशिया वॉच, एम्नेस्टी इंटरनेशनल तथा कई अन्य संस्थाओं में इस मामले पर सुनवाई आज भी लम्बित है। उनके प्रतिनिधि अभी तक दिल्ली, जम्मू तथा भारत के अन्य राज्यों में स्थित उन विभिन्न शिविरों का दौरा नहीं कर सके हैं जहां कश्मीरी हिन्दुओं के परिवार शरणार्थियों का जीवन व्यतीत कर रहे हैं।

इन कश्मीरी विस्थापितों की दुर्दशा राजनीतिक दलों द्वारा राष्ट्रीय मुद्दा बनाया जाना चाहिए था। लेकिन दुर्भाग्य से आज दलों के लिए सेल्फ रूल, स्वायत्तता और अफस्पा हटाना ही प्रमुख मुद्दा है। यह भी कम आश्चर्य नहीं कि निष्कासन के 22 वर्षों बाद भी इन हिन्दुओं की सुनने वाले कुछ लोग ही हैं।

Tuesday, January 17, 2012

कुछ प्रश्न हिन्दुओं से !

 हिन्दु निम्न प्रश्नों के उत्तर दें -

  1. यदि पाकिस्तान और भारत का बटवारा धर्म के आधार पर हुआ जिसमे पाकिस्तान मुस्लिम राष्ट्र बना तो भारत हिन्दू राष्ट्र क्यूँ घोषित नहीं किया ? जबकि दुनिया मे एक भी हिन्दू राष्ट्र नहीं है !
  2. तथाकथित राष्ट्र का पिता मोहनदास गांधी ने ऐसा क्यूँ कहा पाकिस्तान से हिन्दू सिखो की लाशे आए तो आए लेकिन यहाँ एक भी मुस्लिम का खून नहीं बहना चाहिए ?
  3. मोहनदास करमचंद गांधी चाहते तो भगत सिंह जी को बचा सकते थे क्यूँ नहीं बचाया ?
  4. भारत मे मुस्लिम के लिए अलग अलग धाराए क्यूँ है ?
  5. ऐसा क्यूँ है की भारत से अलग होकर जीतने भी देश बने है सब इस्लामिक देश ही बने । क्यूँ ?
  6. केरल मे कोई रिक्शा वाला वाहन चालक हिन्दू श्री कृष्ण जय हनुमान क्यूँ नहीं लिख सकता ?
  7. भारत मे मुस्लिम 18% के आस पास है फिर भी अल्पसंख्यक कैसे है ? जबकि नियम कहता है की 10% के अंदर की संख्या ही अल्पसंख्यक है
  8. कश्मीर से हिन्दुओ को क्यूँ खदेड़ दिया जबकि कश्मीर हिन्दुओ का राज्य था ?
  9. ऐसा क्यूँ है की मुस्लिम जहा 30-40% हो जाते है तब अपने लिए अलग इस्लामिक राष्ट्र बनाने की मांग उठाते है विरोध करते है अन्य समुदाय के गले रेतते है क्यूँ ?
  10. हिन्दुत्व को सांप्रदायिक क्यूँ ठहराया जाता है जबकि इस्लामिक आतंकवाद को धर्म से नहीं जोड़ने की अपील की जाती है ?
  11. फरवरी मे बाबा रामदेव ने सर्वप्रथम भ्रष्टाचार के खिलद विशाल रेली आयोजित की थी, उस महारेली मे 1 लाख 18 हजार लोग आए थे तब मीडिया के किसी भी चेनल ने एक खबर तक नहीं दिखाई थी और जैसे ही अण्णा जंतर मंत्र पर मात्र 5000 समर्थको के साथ अनशन पर बैठे तो सारे मीडिया वाले अण्णा चालीसा गाने लगे ???? इसके पीछे क्या कारण है
  12. अगर अण्णा हज़ारे को अनशन करना ही था तो रामदेव से मंच से पब्लिसिटी हासिल करके अलग मंच बनाने की क्या आवश्यकता थी ?
  13. बॉलीवुड अण्णा हज़ारे का समर्थन करता है लेकिन रामदेवजी का विरोध क्यूँ करता है ?
  14. हमारा देश ही दुनिया मे एक मात्र देश है जो मुस्लिम को हज सब्सिडी देता है 60 वर्षो मे सरकार ने इसके लिए 10000 करोड़ रुपये खर्च कर डाले क्यूँ ?
  15. सोनिया गांधी ने आओनी जन्म दिनांक 1944 बताई है लेकिन सुचनाए कहती है की उसके पिताजी सिग्नोर स्टेफनो माइनो 1972 से 1945 के बीच रूस मे केदी थे कसिए बेवकूफ बना रही है ? सोनिया
  16. भारत मे मुस्लिमो के मदरसो के अनुदान हिन्दू मंदिरो से क्यूँ ?
  17. कश्मीर मे गीता उपदेश देने पर संवेधानिक अडचने क्यूँ है ?
  18. जमा मस्जिद के इमाम सैयद बुखारी ने एक बार कहा था की वह ओसामा बिन लादेन का समर्थन करता है और आईएसआई का अजेंट है फिर भी भारत सरकार उसे गिरफ्तार क्यूँ नहीं करती ?
  19. सरकार ने अण्णा हज़ारे के आंदोलन को सख्ती से नहीं कुचला जबकि रामदेव के समर्थको और स्वामी रामदेव की जान के पीछे पड़ी थी क्यूँ ?
  20. मोहनदास गांधी ने अपने ब्रह्म चर्या के प्रयोग को बुढ़ापे मे करके क्या सीखा ? युवाओ को क्या सिखाया ?
  21. पाकिस्तान मे 1947 मे 22.45% हिन्दू थे आज मात्र 1.12% शेष है सब कहा गए ?
  22. मुगलो द्वारा ध्वस्त किया गया मंदिर सोमनाथ के जीर्णोद्धार की बात आई तो गांधी ने ऐसा क्यूँ कहा की यह सरकारी पैसे का दुरपयोग है जबकि जामा मस्जिद के पुनर्निर्माण के लिए सरकार पर दबाव डाला, अनशन पर बैठे
  23. भारत मे 1947 मे 7.88% मुस्लिम थे आज 18.80% है इतनी आबादी कैसे बढ़ी ?
  24. भारत मे मीडिया हिन्दुओ के, संघ के खिलाफ क्यूँ बोलती है ?
  25. अकबर के हरम मे 4878 हिन्दू औरते थी, जोधा अकबर फिल्म मे और स्कूली इतिहास मे इसे क्यूँ नहीं छापा गया
  26. ऐसा क्यूँ होता है की जो भी सोनिया गांधी का धर्म जानने की कोशिश करता है कोर्ट उसी पर जुर्माना लगा देता है ?
  27. बाबर ने लाखो हिन्दुओ की हत्या की फिर भी हम उसकी मस्जिद क्यूँ देखना चाहते है ?
  28. भारत मे 80% हिन्दू है फिर भी श्री राम मंदिर क्यूँ नहीं बन सकता ?
  29. कॉंग्रेस के शासन मे 645 दंगे हुए है जिसमे 32,427 लोग मारे गए है मीडिया को वो दिखाई नहीं देता है जबकि गुजरात मे प्रतिकृया मे हुए दंगो मे 2000 लोग मारे गए उस पर मीडिया हो इतना हल्ला करती है क्यूँ ?
  30. 67 कारसेवको को गोधरा मे जिंदा जलाया मीडिया उनकी बाते क्यूँ नहीं करती ?
  31. जवाहर लाल नेहरू के दादा एक मुस्लिम (गया सुद्दीन गाजी) थे, हमें इतिहास मे गलत क्यूँ बताया गया ?
  32. भारत मे गुरु परंपरा रही है, हर महापुरुष के गुरु थे गांधी जी ने आज तक अपना गुरु क्यूँ नहीं बनाया ?
  33. बाकी के प्रश्न आप जोड़िए इतने जोड़िए की लोगो का दिमाग हिल जाये
  34. भारत एक ऐसा देश है जहा से सभ्यता शुरू हुई तो गांधी इस देश का पिता कैसे ? 
  35. दुनियामे एक भी हिन्दू देश नहीं है फिर भी आप सोचते है हिन्दू सांप्रदायिक है ? 
  36. गांधी ने खिलाफत आंदोलन को सहयोग क्यूँ दिया इससे क्या फायदे हुए ? 
  37. शुद्धि कारण आंदोलन कर रहे स्वामी श्रद्धानन्द की हत्या करने वाले रशीद नाम के युवक को गांधी ने भाई कहकर संबोधित क्यूँ किया ? गांधी ने कहा था की रशीद भाई जैसा है और स्वामी श्रद्धानन्द हिन्दू एकता का कार्यक्रम चलकर के "हिन्दू - मुस्लिम एकता" को विखंडित कर रहे थे 
  38. जब तालिबान ने बुद्ध की मूर्तिया गिराई थी तो सेकुलर कीट मीडिया के "टाइम्स ऑफ इंडिया" ने अपने कॉलम मे लिखा था की यह बाबरी मस्जिद गिराने पर प्रतिशोध है  क्या आप सहमत है इस वक्तव्य से ? जैसे को तैसा ? तो आप गुजरात के दंगो का विरोध क्यूँ करते हो वहाँ भी तो गोधरा कांड के विरोध मे बदले की आग मे दंगे हुए थे  ? 
  39. ईसाई मिशनरी मुस्लिम इलाको मे धर्मांतरण क्यूँ नहीं करते ? 
  40. भारतीय मीडिया हिन्दुत्व विरोधी क्यूँ है ? संघ सबसे बड़ा एनजीओ है बिना किसी सरकारी मदद के फिर मीडिया को इससे क्या परेशानी है ? संघ देश के गरीब पिछड़े इलाको मे अपने स्वयं सेवी संस्थानो की मदद से मुफ्त मे विद्यालय चलता है जहां सरकारी योजनाए नहीं चलती क्या संघ देश विरोधी है ? या मीडिया ? 
  41. आप मीडिया के बारे मे क्या सोचते हो ? रामदेव भगवा धारी है इसलिए ? उसका समर्थन नहीं करती ? या अण्णा हज़ारे कॉंग्रेस प्रायोजित अजेंट ताकि राष्ट्रवादियो को बाँट कर वोट काट सके ?  और कॉंग्रेस जीते ? 
  42. केरल मे आप जीसस अल्ला के नाम से शपथ ले सकते है लेकिन राम का नाम ले नहीं सकते । 
  43. सेकुलर कीट TIMES OF INDIA ने अपने लेख मे लिखा था "किस तरह बंगलादेशी घुसपेथियों का भारतीयकरण किया जाये" आप ऐसे लेख से इन मीडिया की मंशा समझ सकते है की ये लोग भारत को एक धर्म शाला मानते है 
  44. हमारे राष्ट्र पति भवन मे एक मस्जिद है लेकिन मंदिर नहीं है क्या आप अभी भी सोचते है भारत एक सेकुलर देश है ? 
  45. लोग कहते है की ताजमहल के बारे मे ये सब कोरी अफवाहे है की यह एक हिन्दू मंदिर है" अगर ये अफवाहे है तो कार्बन 14 पद्धति से इसकी जांच करवा लो दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा, और नीचे के आनन फानन मे बंद किए गए कमरे भी खोले जाए देश भी जाने की उसमे क्या है ? जैसे पद्मनाभ मंदिर के तहखाने खोले गए ? सच तो यह है की आगरा के पुरातत्व विभाग के पास भी ऐसी कोई जानकारी नहीं है की इस महल का निर्माण शाहजहा ने करवाया था  
  46. भारत मे मस्जिदों के इमाम और मौलवियों को दस दस हजार से अधिक तंख्वाह मिलती है पुजारीय को क्यूँ नहीं ? क्या यही सेकुलर वाद है ? 
  47. 2002 मे कर्नाटक सरकार को मंदिरो से 72 करोड़ की आवक हुई जिसमे से 50 करोड़ मदरसो पर खर्च हुए, 10 करोड़ चर्च पर और सिर्फ 8.5 करोड़ मंदिरो पर ..... ? हिन्दू अपने पैसे से मस्जिद क्यूँ बनवाए ? क्यूँ चर्च चलाये ? क्या मदरसो से डॉक्टर, इंजीनियर निकलते है ? 
  48. यहाँ पॉप के आगमन पर राष्ट्र अवकाश रखा जाता है और शंकरचार्य को आधी रात दिवाली के दिन केद किया जाता है ... 
  49. पॉप को भारत मे बिना आने दिया जाता है और नेपाल के राजा को मक्कार सक्रांति पर नहीं आने दिया जाता (1965)
  50. एक अँग्रेजी अखबार ने सोनिया का एक लेख छापा हिन्दुत्व पर .... ? क्या उस अखबार को सोनिया से बेहतर लेखक नहीं मिला ? 
  51. उत्तर पूर्वी राज्यो मे न्यूजीलेंड, ऑस्ट्रेलिया और निदर लेंड की सहायता से चर्च का निर्माण हो रहा है ....  क्या आपको लगता है चर्च राष्ट्र वाद को बढ़ावा देते है ?

Monday, January 16, 2012

बहराइच के गाजी बाबा की मजार का सच



 बहराइच में हिन्दू एक आक्रान्ता की कबर पर सर झुकाते हैं !!

जैसा कि पहले भी कई बार कहा जा चुका है कि वामपंथियों और कांग्रेसियों ने भारत के गौरवशाली हिन्दू इतिहास को शर्मनाक बताने में कोई कसर बाकी नहीं रखी है… क्रूर, अत्याचारी और अनाचारी मुगल शासकों के गुणगान करने में इन लोगों को आत्मिक सुख की अनुभूति होती है। लेकिन यह मामला उससे भी बढ़कर है, एक मुगल आक्रांता, जो कि समूचे भारत को “दारुल-इस्लाम” बनाने का सपना देखता था, की कब्र को दरगाह के रूप में अंधविश्वास और भेड़चाल के साथ नवाज़ा जाता है, लेकिन इतिहास को सुधार कर देश में आत्मगौरव निर्माण करने की बजाय हमारे महान इतिहासकार इस पर मौन हैं।मुझे यकीन है कि अधिकतर पाठकों ने सुल्तान सैयद सालार मसूद गाज़ी के बारे में नहीं सुना होगा, यहाँ तक कि बहराइच (उत्तरप्रदेश) में रहने वालों को भी इसके बारे में शायद ठीक-ठीक पता न होगा। जी हाँ, हम बात कर रहे हैं बहराइच (उत्तरप्रदेश) में “दरगाह शरीफ़”(???) पर प्रतिवर्ष ज्येष्ठ मास के पहले रविवार को लगने वाले सालाना उर्स के बारे में…। बहराइच शहर से 3 किमी दूर सैयद सालार मसूद गाज़ी की दरगाह स्थित है, ऐसी मान्यता है(?) कि मज़ार-ए-शरीफ़ में स्नान करने से बीमारियाँ दूर हो जाती हैं (http://behraich.nic.in/) और अंधविश्वास के मारे लाखों लोग यहाँ आते हैं। सैयद सालार मसूद गाज़ी कौन था, उसकी कब्र “दरगाह” में कैसे तब्दील हो गई आदि के बारे में आगे जानेंगे ही, पहले “बहराइच” के बारे में संक्षिप्त में जान लें – यह इलाका “गन्धर्व वन” के रूप में प्राचीन वेदों में वर्णित है, ऐसा माना जाता है कि ब्रह्मा जी ने ॠषियों की तपस्या के लिये यहाँ एक घने जंगल का निर्माण किया था, जिसके कारण इसका नाम पड़ा “ब्रह्माइच”, जो कालांतर में भ्रष्ट होते-होते बहराइच बन गया।

महमूद गज़नवी (गज़नी) के बारे में तो जानते ही होंगे, वही मुगल आक्रांता जिसने सोमनाथ पर 16 बार हमला किया और भारी मात्रा में सोना हीरे-जवाहरात आदि लूट कर ले गया था। महमूद गजनवी ने सोमनाथ पर आखिरी बार सन् 1024 में हमला किया था तथा उसने व्यक्तिगत रूप से सामने खड़े होकर शिवलिंग के टुकड़े-टुकड़े किये और उन टुकड़ों को अफ़गानिस्तान के गज़नी शहर की जामा मस्जिद की सीढ़ियों में सन् 1026 में लगवाया। इसी लुटेरे महमूद गजनवी का ही रिश्तेदार था सैयद सालार मसूद यह बड़ी भारी सेना लेकर सन् 1031 में भारत आया। सैयद सालार मसूद एक सनकी किस्म का धर्मान्ध मुगल आक्रान्ता था। महमूद गजनवी तो बार-बार भारत आता था सिर्फ़ लूटने के लिये और वापस चला जाता था, लेकिन इस बार सैयद सालार मसूद भारत में विशाल सेना लेकर आया था कि वह इस भूमि को “दारुल-इस्लाम” बनाकर रहेगा और इस्लाम का प्रचार पूरे भारत में करेगा (जाहिर है कि तलवार के बल पर)।सैयद सालार मसूद अपनी सेना को लेकर “हिन्दुकुश” पर्वतमाला को पार करके पाकिस्तान (आज के) के पंजाब में पहुँचा, जहाँ उसे पहले हिन्दू राजा आनन्द पाल शाही का सामना करना पड़ा, जिसका उसने आसानी से सफ़ाया कर दिया। मसूद के बढ़ते कदमों को रोकने के लिये सियालकोट के राजा अर्जन सिंह ने भी आनन्द पाल की मदद की लेकिन इतनी विशाल सेना के आगे वे बेबस रहे। मसूद धीरे-धीरे आगे बढ़ते-बढ़ते राजपूताना और मालवा प्रांत में पहुँचा, जहाँ राजा महिपाल तोमर से उसका मुकाबला हुआ, और उसे भी मसूद ने अपनी सैनिक ताकत से हराया। एक तरह से यह भारत के विरुद्ध पहला जेहाद कहा जा सकता है, जहाँ कोई मुगल आक्रांता सिर्फ़ लूटने की नीयत से नहीं बल्कि बसने, राज्य करने और इस्लाम को फ़ैलाने का उद्देश्य लेकर आया था। पंजाब से लेकर उत्तरप्रदेश के गांगेय इलाके को रौंदते, लूटते, हत्यायें-बलात्कार करते सैयद सालार मसूद अयोध्या के नज़दीक स्थित बहराइच पहुँचा, जहाँ उसका इरादा एक सेना की छावनी और राजधानी बनाने का था। इस दौरान इस्लाम के प्रति उसकी सेवाओं(?) को देखते हुए उसे “गाज़ी बाबा” की उपाधि दी गई। इस मोड़ पर आकर भारत के इतिहास में एक विलक्षण घटना घटित हुई, ज़ाहिर है कि इतिहास की पुस्तकों में जिसका कहीं जिक्र नहीं किया गया है। इस्लामी खतरे को देखते हुए पहली बार भारत के उत्तरी इलाके के हिन्दू राजाओं ने एक विशाल गठबन्धन बनाया, जिसमें 17 राजा सेना सहित शामिल हुए और उनकी संगठित संख्या सैयद सालार मसूद की विशाल सेना से भी ज्यादा हो गई। जैसी कि हिन्दुओ की परम्परा रही है, सभी राजाओं के इस गठबन्धन ने सालार मसूद के पास संदेश भिजवाया कि यह पवित्र धरती हमारी है और वह अपनी सेना के साथ चुपचाप भारत छोड़कर निकल जाये अथवा उसे एक भयानक युद्ध झेलना पड़ेगा। गाज़ी मसूद का जवाब भी वही आया जो कि अपेक्षित था, उसने कहा कि “इस धरती की सारी ज़मीन खुदा की है, और वह जहाँ चाहे वहाँ रह सकता है… यह उसका धार्मिक कर्तव्य है कि वह सभी को इस्लाम का अनुयायी बनाये और जो खुदा को नहीं मानते उन्हें काफ़िर माना जाये…”।उसके बाद ऐतिहासिक बहराइच का युद्ध हुआ, जिसमें संगठित हिन्दुओं की सेना ने सैयद मसूद की सेना को धूल चटा दी। इस भयानक युद्ध के बारे में इस्लामी विद्वान शेख अब्दुर रहमान चिश्ती की पुस्तक मीर-उल-मसूरी में विस्तार से वर्णन किया गया है। उन्होंने लिखा है कि मसूद सन् 1033 में बहराइच पहुँचा, तब तक हिन्दू राजा संगठित होना शुरु हो चुके थे। यह भीषण रक्तपात वाला युद्ध मई-जून 1033 में लड़ा गया। युद्ध इतना भीषण था कि सैयद सालार मसूद के किसी भी सैनिक को जीवित नहीं जाने दिया गया, यहाँ तक कि युद्ध बंदियों को भी मार डाला गया… मसूद का समूचे भारत को इस्लामी रंग में रंगने का सपना अधूरा ही रह गया।बहराइच का यह युद्ध 14 जून 1033 को समाप्त हुआ। बहराइच के नज़दीक इसी मुगल आक्रांता सैयद सालार मसूद (तथाकथित गाज़ी बाबा) की कब्र बनी। जब फ़िरोज़शाह तुगलक का शासन समूचे इलाके में पुनर्स्थापित हुआ तब वह बहराइच आया और मसूद के बारे में जानकारी पाकर प्रभावित हुआ और उसने उसकी कब्र को एक विशाल दरगाह और गुम्बज का रूप देकर सैयद सालार मसूद को “एक धर्मात्मा”(?) के रूप में प्रचारित करना शुरु किया, एक ऐसा इस्लामी धर्मात्मा जो भारत में इस्लाम का प्रचार करने आया था। मुगल काल में धीरे-धीरे यह किंवदंती का रूप लेता गया और कालान्तर में सभी लोगों ने इस “गाज़ी बाबा” को “पहुँचा हुआ पीर” मान लिया तथा उसकी दरगाह पर प्रतिवर्ष एक “उर्स” का आयोजन होने लगा, जो कि आज भी जारी है। इस समूचे घटनाक्रम को यदि ध्यान से देखा जाये तो कुछ बातें मुख्य रूप से स्पष्ट होती हैं-(1) महमूद गजनवी के इतने आक्रमणों के बावजूद हिन्दुओं के पहली बार संगठित होते ही एक क्रूर मुगल आक्रांता को बुरी तरह से हराया गया (अर्थात यदि हिन्दू संगठित हो जायें तो उन्हें कोई रोक नहीं सकता)(2) एक मुगल आक्रांता जो भारत को इस्लामी देश बनाने का सपना देखता था, आज की तारीख में एक “पीर-शहीद” का दर्जा पाये हुए है और दुष्प्रचार के प्रभाव में आकर मूर्ख हिन्दू उसकी मज़ार पर जाकर मत्था टेक रहे हैं।(3) एक इतना बड़ा तथ्य कि महमूद गजनवी के एक प्रमुख रिश्तेदार को भारत की भूमि पर समाप्त किया गया, इतिहास की पुस्तकों में सिरे से ही गायब है।जो कुछ भी उपलब्ध है इंटरनेट पर ही है, इस सम्बन्ध में रोमिला थापर की पुस्तक “Dargah of Ghazi in Bahraich” में उल्लेख हैएन्ना सुवोरोवा की एक और पुस्तक “Muslim Saints of South Asia” में भी इसका उल्लेख मिलता है,जो मूर्ख हिन्दू उस दरगाह पर जाकर अभी भी स्वास्थ्य और शारीरिक तकलीफ़ों सम्बन्धी तथा अन्य दुआएं मांगते हैं उनकी खिल्ली स्वयं “तुलसीदास” भी उड़ा चुके हैं। चूंकि मुगल शासनकाल होने के कारण तुलसीदास ने मुस्लिम आक्रांताओं के बारे में ज्यादा कुछ नहीं लिखा है, लेकिन फ़िर भी बहराइच में जारी इस “भेड़िया धसान” (भेड़चाल) के बारे में वे अपनी “दोहावली” में कहते हैं –लही आँखि कब आँधरे, बाँझ पूत कब ल्याइ ।कब कोढ़ी काया लही, जग बहराइच जाइ॥अर्थात “पता नहीं कब किस अंधे को आँख मिली, पता नहीं कब किसी बाँझ को पुत्र हुआ, पता नहीं कब किसी कोढ़ी की काया निखरी, लेकिन फ़िर भी लोग बहराइच क्यों जाते हैं…” 

“लाल” इतिहासकारों और धूर्त तथा स्वार्थी कांग्रेसियों ने हमेशा भारत की जनता को उनके गौरवपूर्ण इतिहास से महरूम रखने का प्रयोजन किया हुआ है। इनका साथ देने के लिये “सेकुलर” नाम की घृणित कौम भी इनके पीछे हमेशा रही है। भारत के इतिहास को छेड़छाड़ करके मनमाने और षडयन्त्रपूर्ण तरीके से अंग्रेजों और मुगलों को श्रेष्ठ बताया गया है और हिन्दू राजाओं का या तो उल्लेख ही नहीं है और यदि है भी तो दमित-कुचले और हारे हुए के रूप में। आखिर इस विकृति के सुधार का उपाय क्या है…? जवाब बड़ा मुश्किल है, लेकिन एक बात तो तय है कि इतने लम्बे समय तक हिन्दू कौम का “ब्रेनवॉश” किया गया है, तो दिमागों से यह गंदगी साफ़ करने में समय तो लगेगा ही। इसके लिये शिक्षण पद्धति में आमूलचूल परिवर्तन करने होंगे। “मैकाले की अवैध संतानों” को बाहर का रास्ता दिखाना होगा, यह एक धीरे-धीरे चलने वाली प्रक्रिया है। हालांकि संतोष का विषय यह है कि इंटरनेट नामक हथियार युवाओं में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है, युवाओं में “हिन्दू भावनाओं” का उभार हो रहा है, उनमें अपने सही इतिहास को जानने की भूख है। आज का युवा काफ़ी समझदार है, वह देख रहा है कि भारत के आसपास क्या हो रहा है, वह जानता है कि भारत में कितनी अन्दरूनी शक्ति है, लेकिन जब वह “सेकुलरवादियों”, कांग्रेसियों और वामपंथियों के ढोंग भरे प्रवचन और उलटबाँसियाँ सुनता है तो उसे उबकाई आने लगती है, इन युवाओं (17 से 23 वर्ष आयु समूह) को भारत के गौरवशाली पृष्ठभूमि का ज्ञान करवाना चाहिये। उन्हें यह बताने की जरूरत है कि भले ही वे बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के नौकर बनें, लेकिन उन्हें किसी से “दबकर” रहने या अपने धर्म और हिन्दुत्व को लेकर किसी शर्मिन्दगी का अहसास करने की आवश्यकता नहीं है। जिस दिन हिन्दू संगठित होकर प्रतिकार करने लगेंगे, एक “हिन्दू वोट बैंक” की तरह चुनाव में वोटिंग करने लगेंगे, उस दिन ये “सेकुलर” नामक रीढ़विहीन प्राणी देखते-देखते गायब हो जायेगा। हमें प्रत्येक दुष्प्रचार का जवाब खुलकर देना चाहिये, वरना हो सकता है कि किसी दिन एकाध “गधे की दरगाह” पर भी हिन्दू सिर झुकाते हुए मिलें…
संदर्भ : http://jayshah.net/archives/163

Sunday, January 15, 2012

डॉ. सुब्रह्मण्यम स्वामी (राष्ट्र एवं धर्मप्रेमी योद्धा )


वर्तमानमें इस देशपर राष्ट्रघाती एवं भ्रष्टाचारी राज्य कर रहे हैं । ऐसे राष्ट्रघाती एवं भ्रष्टाचारियोंको सत्तासे हटाकर राष्ट्रप्रेमी एवं धर्मप्रेमियोंको सत्ता सौंपना आवश्यक है । आज देशकी १२० करोड जनतामें राष्ट्र एवं धर्मप्रमी कितने एवं कहां है, ऐसा प्रश्न जनताके मनमें आना स्वाभाविक है । ज्येष्ठ समाजसेवक श्री. अण्णा हजारे एवं योगऋषि रामदेवबाबा दोनों उनके संगठनद्वारा राष्ट्रका एवं कुछ मात्रामें धर्मका कार्य कर रहे हैं । इस समय राष्ट्र एवं धर्मका वैध मार्गसे अकेले सिपाहीके समान विगत ४०वर्षोंसे कार्य करनेवाले एक नामकी उपेक्षा हो रही है । वह नाम है जनता पक्षके अध्यक्ष डॉ. सुब्रह्मण्यम स्वामीका !
लोकनायक जयप्रकाश नारायणकी प्रेरणासे डॉ. स्वामीने राष्ट्रकार्यमें स्वयंको समर्पित किया । उनकी प्रेरणासे ही वे कभी जय-पराजयसे निराश नहीं हुए एवं उन्होंने संघर्ष जारी रखा । उन्होंने संघर्षके अच्छे-बुरे प्रभाव पर भी ध्यान नहीं दिया । डॉ. स्वामीके गुरु कांची कामकोटी पीठके शंकराचार्य श्री चंद्रशेखरेंद्र सरस्वती (वर्तमान समयके शंकराचार्य श्री जयेंद्र सरस्वतीके गुरु) के आशिर्वाद एवं  जयप्रकाश नारायणद्वारा किएर्भयतासे खडे होकर बोल पा रहे हैं । ऐसे राष्ट्र एवं धर्मके लिए कार्यरत निर्भय व्यक्तित्वके विभिन्न पहलु देखें -

जन्म एवं बाल्यावस्था

अ. बाल्यावस्थासे ही राजनीतिज्ञोंसे संबंध : डॉ. सुब्रह्मण्यम स्वामीका जन्म १५ सितंबर १९३९ को चेन्नईके मायलापूर नामक सांस्कृतिक शहरमें हुआ । उनके पिता सीताराम सुब्रह्मण्यम भारतीय प्रशासकीय अधिकारी थे । वे भारत शासनके ‘सचिव’ पदसे निवृत्त हुए । उनकी मां केरलके एक सुसंस्कृत तामिल घरानेसे थी । सीताराम सुब्रह्मण्यम शासकीय सेवामें होनेके कारण डॉ.स्वामीकी शिक्षा राजधानी दिल्लीमें संपन्न हुई । डॉ. स्वामीके पिताके सत्यमूर्र्ति, थिरू कामराज इत्यादि बडे राजनीतिज्ञोंसे निकटवर्ती संबंध थे, तथा वरिष्ठ शासकीय अधिकारी होनेके कारण शासनद्वारा उन्हें दिल्लीके ‘राजेंद्र प्रसाद मार्ग’ पर शासकीय निवास प्रदान किया गया था । यहां बिहारके संसद सदस्य शामानंदन सहाय, भूतपूर्व उपप्रधानमंत्री बाबू जगजीवन राम इत्यादि बडे राजनेताओं निवासस्थान होनेके कारणे उनका एवं डॉ. स्वामीके पिताका एक दूसरेके यहां आना-जाना था ।
आ. शंकानिरसन न होनेसे यज्ञोपवीत धारण करनेसे मना किया : एक बार जगजीवन रामने डॉ. स्वामीसे प्रश्न किया कि आप ब्र्राह्मण होकर आपके गलेमें यज्ञोपवीत क्यों नहीं है ?’’ इसपर डॉ. स्वामीने बताया कि ७ वर्षकी आयुमें उनका उपनयन संस्कार किया जा रहा था । उस समय जिज्ञासू वृत्तिसे उन्होंने पंडितसे प्रश्न किया कि उनके वर्गमित्र यज्ञोपवीत (जनेऊ) नहीं धारण करते फिर वे क्यों धारण करें ? पंडितके उत्तरसे उन्हें संतुष्टि नहीं हुई । उन्होंने पंडितसे अनेक प्रश्न पूछे, जिससे घरमें सब लोग अस्वस्थ हो गए तथा उनके पिताजीने वह विधि ही निरस्त किया । इससे मां दुखी थी; परंतु डॉ.स्वामीने ठान लिया था कि जबतक उनके प्रश्नोंका पंडितसे संतोषजनक उत्तर नहीं मिलता, वे यज्ञोपवीत धारण नहीं करेंगे । इस उत्तरसे जगजीवन राम अत्यधिक प्रभावित हुए । (तत्पश्चात् डॉ.स्वामीके गुरु शंकराचार्य श्री चंद्रशेखरेंद्र सरस्वतीने अच्छा मुहूर्त देखकर यह विधि करवा लिया एवं आध्यात्मिक विधिमें यज्ञोपवीतका शास्त्र एवं महत्त्व बताया ।)

शिक्षा

अ. उच्चविद्याविभूषित डॉ. स्वामी : डॉ. स्वामीने दिल्ली विश्वविद्यालयमें हिंदु महाविद्यालयसे गणित विषयमें उपाधि प्राप्त की । तत्पश्चात् उन्होंने कोलकाताके इंडियन स्टॅटिस्टिकल इंन्स्टिट्यूट (भारतीय सांख्यिकी संस्था) से सांख्यिकी विषयमें उच्च उपाधि प्राप्त की । वहां पढते समय डॉ. स्वामीने भारतीय सांख्यिकी संस्थाके संचालक प्रसंत महालनोबीसद्वारा किए गए अन्वेषणको आवाहन किया था । उनके शैक्षणिक प्राविण्यसे प्रभावित होकर इंग्लैंडके विश्वविख्यात हॉवर्ड विश्वविद्यालयद्वारा उन्हें अन्वेषण करने हेतु आमंत्रित किया गया ।


आ. नोबल पारितोषिक प्राप्त विद्वानोंके साथ अन्वेषण : हॉवर्ड शैक्षणिक संस्थामें पढते हुए डॉ. स्वामीने नोबेल विजेता सायमन कुझनेटस एवं नोबेल विजेता पॉल स्यामूल्सन इन विद्वानोंके साथ काम किया । डॉ. स्वामीने १९६४ में अर्थशास्त्र विषयमें केवल १८ महिनेमें ‘डॉक्टरेट’की उपाधि प्राप्त की ।

शैक्षणिक क्षेत्रमें कार्य

अ. विदेशी एवं देशी शिक्षा संस्थाओंमें प्राध्यापकी : हॉवर्डमें अर्थशास्त्र विषयमें डॉक्टरेट प्राप्त करनेपर वहींपर अर्थशास्त्र पढानेके लिए उन्हें सहायक प्राध्यापक पदपर नियुक्त किया गया । डॉ. स्वामीने हॉवर्डमें १० वर्ष अलग-अलग कालावधिमें प्राध्यापकके रूपमें काम किया । अभी भी वे हॉवर्डके ग्रीष्मकालीन सत्रमें अर्थशास्त्र पढानेके लिए जाते हैं । उन्होंने १९६९-१९९१ इस कालावधिमें भारतीय तंत्रज्ञान संस्था दिल्ली (आय.आय.टी.) में अर्थशास्त्रके पूर्णकालीन प्राध्यापकके रूपमें कार्य किया । १९७० में इंदिरा गांधीने डॉ. स्वामीको बलपूर्वक एवं अवैधानिक रूपसे प्राध्यापक पदसे निष्कासित कर दिया । १९८० में सर्वोच्च न्यायालयद्वारा डॉ.स्वामी पुनः प्राध्यापकके पदपर नियुक्त किए गए । १९९१ मेंउन्होंने वेंâद्रीय मंत्रीपद विभूषित करने हेतु प्राध्यापक पदसे त्यागपत्र दिया । डॉ. स्वामीने १९७७ से १९८० के मध्य ‘भारतीय तंत्रज्ञान संस्था दिल्ली’ शैक्षणिक संस्थाके संचालक मंडलमें कार्य किया । उसी प्रकार १९८० से १९८२ तक भारतीय तंत्रज्ञान संस्थाके परिषदमें काम किया है । वर्तमान समयमें वे केरलमें संचार एवं व्यवस्थापन व्यापार संस्था नामक शिक्षा संस्थाके संचालक हैं ।
आ. डॉ. स्वामीके अर्थविषयक संकल्पनासे भारतीय अर्थव्यवस्थाकी पुनर्रचना : डॉ. स्वामीने हॉवर्ड एवं भारतमें किए गए अन्वेषणके कारण वे विश्वविख्यात अर्थतज्ञके रूपमें जाने गए । डॉ. स्वामीने उनके ‘भारतीय आर्थिक नियोजन - एक वैकल्पिक दृष्टिकोण’ (इंडियन इकॅनॉमिक प्लानिंग, अ‍ॅन अल्टरनेटिव्ह अप्रोच ) नामक प्रथम पुस्तकमें भारतीय अर्थव्यवस्थाके लिए एक स्पष्ट पर्याय प्रस्तुत किया था । उस समय तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधीने लोकसभामें अर्थसंकल्पीय अधिवेशनमें प्रश्नोत्तरकी कालावधिमें इस पुस्तकमें प्रस्तुत संकल्पनाका विरोध करनेका निर्णय लेकर पुस्तककी समीक्षा की । (तदुपरांत १९९० में डॉ. स्वामीद्वारा प्रस्तुत की गई संकल्पनासे भारतीय अर्थव्यवस्थाकी पुनर्रचना की गई एवं भारतीय अर्थव्यवस्था विकसित हुई ।)
इ. पुस्तक एवं शोधप्रबंधको वैश्विक प्रसिद्धि : ‘शिकागो विश्वविद्यालय समाचार संस्थाद्वारा १९७३ में ‘भारत एवं चीन १९५२-१९७० आर्थिक विकास : एक तुलनात्मक मूल्यांकन’ इस डॉ. स्वामीद्वारा प्रकाशित शोधप्रबंधकी पूरे विश्वके अर्थतज्ञोंद्वारा प्रशंसा की गई । डॉ. स्वामी एवं आधुनिक अर्थशास्त्रके जनक पॉल स्यामूल्सनने मिलकर ‘थेअरी ऑफ इंडेक्स नंबर्स (सूचकांक संख्या सिद्धांत)’ इस विषयपर लिखा हुआ शोधनिबंध अमेरिकन इकॉनॉमिक रिव्हाइव्ह (१९७४) एवं रॉयल इकॉनॉमिक सोसायटीकी आर्थिक पत्रिका (१९८४) ने प्रकाशित किया था । डॉ. स्वामीका यह अभूतपूर्व प्रबंध विश्वमें एक नए आर्थिक सिद्धांतके रूपमें मान्य हुआ । डॉ. स्वामीद्वारा भारत एवं चीनके परमाणु संबंधपर लिखी गई ‘भारत एवं चीन : एक तुलनात्मक मूल्यांकन’ यह दूसरी पुस्तक विकास प्रकाशन संस्थाद्वारा प्रकाशित की गई है ।
ई. डॉ. स्वामीकी नोबल पारितोषिक प्राप्त करनेकी पात्रता : विश्वविख्यात विश्वविद्यालय 'हॉवर्ड'में डॉ. स्वामीने नोबेल विजेता सायमन कुझनेटस एवं पॉल स्यामूल्सन इन विद्वानोंके साथ काम किया । डॉ. स्वामी अर्थशास्त्रके प्राध्यापक थे, तब दोनों विद्वानोंने ऐसा कहा था कि यदि डॉ. स्वामीने इससे पूर्व प्रसिद्धि प्राप्त सूचकांक संख्या सिद्धांत (थिअरी ऑफ इंडेक्स नंबर्स) विषयपर इसी प्रकार अन्वेषण जारी रखा, तो उन्हें भी नोबेल पारितोषक निश्चित मिलेगा ।

राज्यकालका प्रारंभ

अ. लोकनायक जयप्रकाश नारायणकी भेंटसे जीवनमें परिवर्तन : लोकनायक जयप्रकाश नारायणके साथ हॉवर्डमें हुई अभूतपूर्व भेंटसे डॉ. स्वामीका जीवन परिवर्तित हो गया एवं वे शिक्षा जगतसे राजनीतिकी ओर मुडे । जयप्रकाश नारायणकी भेंट होनेके पश्चात् डॉ. स्वामी राजनीतिक क्षेत्रमें ध्येय प्राप्तिकी भावनासे प्रेरित हुए एवं उसपर उन्होंने ध्यान केंद्रित किया ।
आ. जनता पक्षके संस्थापक सदस्य : १९७० में इंदिरा गांधी साम्यवादी विचारधाराके लोगोंसे प्रभावित हुर्इं एवं तानाशाही करने लगी । उस समय दिल्लीके भारतीय तंत्रज्ञान संस्थामें अर्थशास्त्रके पूर्णकालीन प्राध्यापक डॉ. स्वामीको साम्यवादी विचारधाराके लोगोंद्वारा डाले गए दबावके कारण तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधीने अवैधानिक रूपसे अपनी सत्ताका दुरुपयोगकर प्राध्यापक पदसे उन्हें हटा दिया । डॉ. स्वामीने इंदिरा गांधीकी इस तानाशाहीका सभी प्रकारसे विरोध करनेका निश्चय किया । १९७६ में इंदिरा गांधीद्वारा लगाए गए आपातकालके कारण राजनीतिमें परिवर्तन लानेका डॉ. स्वामीने निश्चय किया । यहींसे डॉ. स्वामीकी राजनीति वास्तविक रूपसे प्रारंभ हुई । तत्पश्चात् वे जनता पक्षके संस्थापक बने । आज डॉ. स्वामी भारतीय लोकतंत्रके इतिहासमें आमूल परिवर्तन लानेवाले जनता पक्षके अध्यक्ष हैं ।

डॉ. स्वामीद्वारा आपातकालमें किया गया कार्य

अ. विदेशमें जाकर आपातकालका विरोध :१९७६ में इंदिरा गांधी द्वारा लगाए गए आपातकालमें डॉ. स्वामीका साहसी विदेशगमन, वहांसे वापस आनेपर संसदमें उनकी नाटकीय उपस्थिति, वहांसे सुरक्षित रूपसे स्वयंको मुक्त कर पुनः विदेशगमन करनेके कारण अत्यधिक विख्यात हुए । पुलिसद्वारा फरार (मोस्ट वाँटेड) घोषित करनेपर भी डॉ. स्वामी सुरक्षित रूपसे विदेश जानेमें सफल हुए । वहां उन्होंने अनिवासी भारतियोंका संगठन कर ‘फ्रेंड ऑफ इंडिया’ (भारतके परदेशमें स्थित मित्र) नामक संगठन स्थापित कर आपातकालका विदेशसे विरोध किया ।


आ. विदेशी समाचारपत्रों द्वारा हस्तक्षेप  : डॉ. स्वामीके इस क्रांतिकारक कार्यपर पूरे विश्वके समाचार पत्रोंने ध्यान दिया एवं भारतके सभी स्तरके लोगोंने उनकी प्रशंसा की । अमेरिकाके ‘वॉशिंग्टन पोस्ट’ इस
समाचारपत्रद्वारा ‘आपातकाल एक मजाक बन गया है’, ऐसा समाचार प्रकाशित किया गया था । इस घटनासे इंदिरा गांधीको कुछ महीनोंमें सार्वजनिक चुनाव घोषित करने पडे एवं उसमें वे पराजित हुर्इं ।

डॉ. स्वामी : एक उत्कृष्ट प्रशासक

अ. विभिन्न मतदानकेंद्रसे ५ बार निर्वाचित होनेवाले प्रथम संसद सदस्य : सर्वप्रथम डॉ. स्वामी जनसंघसे १९७४ में उत्तरप्रदेश राज्यसभामें चुनकर आए । आपातकालके पश्चात् १९७७ में एवं तत्पश्चात् पुनः हुए चुनावमें डॉ. स्वामी मुंबईके उत्तर-पूर्व (घाटकोपर) मतदानकेंद्रसे दो बार निरंतर चुने गए । उन्होंने मतदानवेंâद्रके विकासके लिए विभिन्न कार्य एवं जनसम्पर्क किए, जिसके कारण अबतक लोग उनका स्मरण करते हैं । १९८८ से १९९४ इन ६ वर्षोंकी कालावधिमें उन्होंने राज्यसभामें उत्तरप्रदेश मतदानवेंâद्रका प्रतिनिधित्व किया । मार्च १९९८ में वे तामिलनाडूके मदुराई मतदानकेंद्रसे लोकसभाके चुनावमें चुनकर आए । इस प्रकार ५ बार विभिन्न मतदानवेंâद्रोंसे चुनकर आनेवाले प्रथम लोकप्रतिनिधि हुए ।
आ. एल.टी.टी.ईका बंदोबस्त करना : १९९०-९१ में प्रधानमंत्री चंद्रशेखरके मंत्रीमंडलमें कानूनमंत्रीके पदका कार्यभार संभालते हुए तामिलनाडूके एल.टी.टी.ई (लिबरेशन टायगर्स आर्पâ तमिल ईलम) इस आतंकवादी संगठनको जडसे उखाडने हेतु उन्होंने सेनाका उपयोग किया, जिससे तामिलनाडूमें ‘भारतका एक संरक्षक’ के रुपमें उनकी छवि निर्माण हुई ।
इ. विभिन्न देशोंसे ऐतिहासिक व्यावसायिक अनुबंध करना : डॉ. स्वामीके मंत्रीपदके कार्यकालमें उन्होंने चीन, अफगानिस्तान एवं पोलेंड इत्यादि देशोंसे ऐतिहासिक व्यापारी अनुबंध किए ।
ई. सत्ताधारी कांग्रेस पक्षद्वारा विरोधी पक्षके डॉ. स्वामीको केबिनेट मंत्रीका स्तर दिया जाना : १९९४ में तत्कालीन पंतप्रधान पी.व्ही.नरसिंह रावद्वारा डॉ. स्वामीकी ‘अंतर्राष्ट्रीय व्यापार एवं कामगार नीति आयोग’के संचालक पदपर नियुक्ति की गई । भारतके इतिहासकी यह प्रथम घटना थी कि एक सत्ताधारी पक्षद्वारा विरोधी पक्षके नेताको केंद्रीय मंत्रीका स्तर दिया गया । इससे डॉ. स्वामीकी कुशलता स्पष्ट होती है । इस पदपर काम करते समय डॉ. स्वामीने कामगारों तथा अंतर्राष्ट्रीय व्यापार नियमोंमें अत्यधिक सुधार किए, जिससे भारतके निर्यात क्षेत्रको भारी मात्रामें लाभ हुआ ।
उ. भारतके अंतर्राष्ट्रीय संबंध सुधारनेमें डॉ. स्वामीका योगदान : १९७८ से १९८५ में भारतकी चीनके साथ विदेश नीति पुनर्गठित करनेका महान कार्य डॉ. स्वामीने किया । उनके अथक प्रयासोंके कारण भारतकी चीनके साथ विदेश नीति एक शत्रुराष्ट्रसे एक साधारण पडोसी राष्ट्रमें रूपांतरित हुई एवं दोनों देशोंद्वारा इसका पूरा श्रेय डॉ. स्वामीको दिया गया । १९७८ से १९९८ इस कालावधिमें डॉ. स्वामीने कुल ७ बार विभिन्न राजनीतिक संबंध स्थापित करने हेतु चीनको भेंट दी ।
ऊ. चीन एवं इस्राईल देशोंको अधिकृत भेंट देनेवाले प्रथम राजकीय नेता : तत्कालीन प्रधानमंत्री मोरारजी देसाईके सहकार्यसे डॉ. स्वामी चीन एवं इस्राईल देशोंको भेंट देनेवाले प्रथम भारतीय नेता सिद्ध हुए । १९८२ में इस्राईल देशमें सार्वजनिक रूपसे यात्रा करनेवाले प्रथम भारतीय राजनेता थे । इस्राईलमें उन्होंने रॉबिन, तत्कालीन पंतप्रधान मेनाचीन बेगीं एवं अनेक महत्त्वपूर्ण राजनेताओंसे भेंट की जिसके परिणामस्वरूप दोनों देशोंद्वारा एक- दूसरेके देशमें दूतावास आरंभ हुए एवं मित्रताके सबंध स्थापित हुए ।
ए. विदेशनीतिपर लेखन करना : दक्षिण अफ्रीका, इंग्लेंड, पोलेंड, नामिबिया, चीन, इस्राईल इत्यादि अनेक देशोंके साथ मित्रताके सबंध स्थापित करनेमें डॉ. स्वामीका महत्त्वपूर्ण योगदान है । डॉ. स्वामीने भारत-चीन, भारत-पाकिस्तान, भारत-इस्राईल आदि देशोंके साथ विदेशनीतिपर अत्यधिक लेखन भी किया है ।
ऐ. संयुक्त राष्ट्रके लिए भी कार्य : नवंबर १९७८ में ‘विकसित देशोंमें आर्थिक सहकार्य’ पर प्रतिवेदन बनाने हेतु संयुक्त राष्ट्रद्वारा गठित समूहके वे सदस्य थे । १९६३ के पूर्वार्धमें डॉ. स्वामीने संयुक्त राष्ट्रके अमेरिकाके मुख्यालयमें ‘सहायक अर्थशास्त्रज्ञ अधिकारी’ पदपर कार्य किया है ।

सोनिया गांधीका प्रधानमंत्री न बनने का सही कारण है - डॉ. स्वामी

२००४ के चुनावमें कांग्रेस पक्ष बहुमतसे चु    नके आनेपर १७ मे २००४ को सायं. ५ बजे सोनिया गांधी सरकार बनाकर स्वयं प्रधानमंत्री बननेवाली थी; परंतु भारतके तत्कालीन राष्ट्रपति अब्दुल कलामने एक कानून बताकर सोनिया गांधीको सरकार बनानेसे रोका । उस कानूनके पिछे थे डॉ. सुब्रह्मण्यम स्वामी !

भारतीय नागरी कानूनद्वारा विरोध !

डॉ. स्वामीने १५ मई २००४ में राष्ट्रपतिको एक पत्र भेजा था । उसमें ऐसा कहा था कि कानूनन सोनिया गांधी प्रधानमंत्री नहीं बन सकती । भारतीय नागरी कानून १९५५ के अनुसार यदि भारतका नागरिक उस व्यक्तिके देशमें प्रधान हो सकता है, तो ही उस व्यक्तिको भारतमें प्रधान बनना संभव है । इटलीमें भारतके नागरिकको वहांके कानूनके अनुसार प्रधानमंत्री बनना असंभव है । अतः इससे यह स्पष्ट होता है कि इटलीमें रहनेवाली सोनिया गांधी कानूनन भारतमें प्रधानमंत्री नहीं बन सकती । 

सोनिया गांधी प्रधानमंत्री बनी तो सर्वोच्च न्यायालयमें आवाहन देनेकी चेतावनी !

१७ मई २०११ को राष्ट्रपति अब्दुल कलामके समक्ष डॉ. स्वामीका पत्र था । राष्ट्रपतिद्वारा दोपहर १२. ४५ को डॉ. स्वामीने कानूनका स्पष्टीकरण मांगने हेतु राष्ट्रपति भवनमें आमंत्रित किया एवं डॉ. स्वामीने यह स्पष्टीकरण दिया । डॉ. स्वामीने राष्ट्रपतिको कहा कि, ‘‘जिसप्रकार मैंने जयललिताको मुख्यमंत्री बननेसे रोका उसी प्रकार सोनिया गांधीके प्रधानमंत्री बननेपर मैं सर्वोच्च न्यायालयमें अभियोग प्रविष्ट कर चुनौती दूंगा ।’’

डॉ. स्वामीकी चेतावनीसे सोनिया गांधी पीछे हटीं !

डॉ. स्वामीकी इस आव्हानात्मक भूमिकासे राष्ट्रपति अब्दुल कलामने सोनिया गांधीको इस विषयमें समझाया कि, ‘यदि आपको कानूनके विरोधमें जाकर सरकार स्थापित करना है एवं प्रधानमंत्री बनना है तो मुझे सर्वोच्च न्यायालयमें डॉ. स्वामीद्वारा प्रविष्ट अभियोगके निर्णयकी प्रतिक्षा करनी होगी । तबतक आपका प्रधानमंत्री बनना असंभव है ।’ इसी कारण अंतमें सोनिया गांधी पीछे हटीं एवं उनका भारतका प्रधानमंत्री बननेका स्वप्न टूटा ।