Thursday, November 10, 2011

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Tuesday, November 8, 2011

'पाक में अल्पसंख्यकों के साथ पक्षपात'

ईसाई
पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों विशेषकर ईसाईयों पर हमले बढ़ रहे हैं.
पाकिस्तान की एक ग़ैर-सरकारी संस्था ने देश में अल्पसंख्यकों की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि अल्पसंख्यकों को पक्षपाती नियमों का सामना करना पड़ रहा है और विवादास्पद ईश-निंदा क़ानून को ख़त्म किया जाए.
इस रिपोर्ट को जिन्ना संस्थान ने तैयार किया है और मानवाधिकारों के लिए काम करने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्था ‘एशियन ह्यूमन राईट्स कमीशन’ ने जारी किया है.
रिपोर्ट में पाकिस्तान के अल्पसंख्यकों की सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक स्थिति का विस्तार से आकलन किया गया है.
जिन्ना संस्थान की रिपोर्ट में बताया गया है कि विवादास्पद ईश-निंदा क़ानून में संशोधन के ख़िलाफ़ हुए हिंसक प्रदर्शनों पर वर्ष 2010 का अंत हुआ और वर्ष 2011 की शुरुआत पंजाब के गवर्नर सलमान तासीर और अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री शहबाज़ भट्टी की हत्या से हुई. दोनों नेताओं ने ईश-निंदा क़ानून में संशोधन के लिए कोशिशें की थी.

'ईश-निंदा क़ानून में संशोधन नहीं'

रिपोर्ट में सरकार को कड़ी आलोचना का निशाना बनाया गया है और बताया गया है कि सरकार धार्मिक दलों के भारी दबाव के बाद ईश-निंदा क़ानून में संशोधन करने से पीछे हट गई.
इस रिपोर्ट में बताया गया है कि अल्पसंख्यकों पर हो रहे ताज़ा हमले सभी स्तर पर साज़िश का नतीजा हैं जिसमें न्यायपालिका, कार्यपालिका और विधायिका शामिल हैं.
जिन्ना संस्थान के मुताबिक़ सरकार ने पाकिस्तानियों की नागरिकता को दो हिस्सों मुस्लिम और ग़ैर मुस्लिम में बांटने में भूमिका निभाई है.
रिपोर्ट में बताया गया है कि बढ़ते हुए चरमपंथ के बीच एक तरफ़ चरमपंथी अल्पसंख्यकों को ईश-निंदा क़ानून की आड़ में धमकियाँ देते हैं, दूसरी तरफ़ सरकार भी उन लोगों के ख़िलाफ़ कार्रवाई नहीं करती जो अल्पसंख्यकों पर हिंसा करते हैं.

'अल्पसंख्यकों को सुरक्षा मिले'

जिन्ना संस्थान ने अपनी रिपोर्ट में सरकार को कुछ प्रस्ताव दिए हैं जिसके मुताबिक ईश-निंदा क़ानून को ख़त्म किया जाए और अगर सराकर उसे ख़त्म नहीं कर सकती है तो उस क़ानून के ग़लत इस्तेमाल को रोके.
अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए पुलिस को प्रशिक्षण दिया जाए ताकि वह बिना किसी भेदभाव के कार्रवाई कर सके.
ग़ौरतलब है कि जिन्ना संस्थान पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी की सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री शेरी रहमान की संस्था है और उन्होंने ही सबसे पहले विवादास्पद ईश-निंदा क़ानून में संशोधन का बिल संसद में पेश किया था. बाद में सरकार के भारी दबाव के बाद उन्होंने यह बिल वापस ले लिया था.

पूजा के लिए खुला पाकिस्तान का मंदिर

 मंगलवार, 20 सितंबर, 2011 को 16:51 IST तक के समाचार

पाक मंदिर
पेशावर का मंदिर करीब 160 साल पुराना है और पिछले 50 सालों से बंद हैं.
पाकिस्तान की एक अदालत ने पेशावर में एक प्राचीन मंदिर में हिंदू समुदाय को पूजा करने की अनुमति दे दी है.
पेशावर हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एजाज़ अफ़ज़ल ख़ान की अध्यक्षता में दो सदस्यीय खंडपीठ ने यह आदेश एक हिंदू महिला फूलवती की ओर से दायर की गई याचिका पर दिया. अदालती आदेश के अनुसार मंदिर की सुरक्षा का ज़िम्मेदारी सरकार की होगी, लेकिन हिंदू समुदाय का कहना है कि उन्हें अभी तक मंदिर का चाबी नहीं मिली है.
स्थानीय हिंदुओं के मुताबिक़ यह मंदिर एक 160 साल पुराना है और यह पेशावर के सबसे पुराने इलाक़े गोरखटड़ी में स्थित है.
ग़ैर सरकारी आँकड़ों के मुताबिक़ ख़ैबर पख़्तूनख़्वाह प्रांत में हिंदुओं की जनसंख्या क़रीब 20 हज़ार है और कुछ हिंदू परिवार अफ़ग़ानिस्तान के भी पेशावर पहुँचे हैं.

'मंदिर का निर्माण'

सरकार ने बख़्त मोहम्मद को मंदिर का प्रभारी नियुक्त किया है और उन्होंने बताया कि जबसे यह मंदिर बंद था उस दौरान उसके कई हिस्से ढह गए थे और बाद में सरकार ने मंदिर का फिर से निर्माण किया है.

चाबियाँ अभी तक नहीं

"हिंदू समुदाय को अभी तक मंदिर का चाबियाँ नहीं मिली हैं और सरकार को चाहिए कि वह मंदिर की चाबियाँ हिंदू समुदाय के हवाले कर दे ताकि मंदिर को फिर से आबाद किया जा सके."
रमेश लाल, पेशावर निवासी
उन्होंने बताया कि प्रांतीय पुरातत्व विभाग मंदिर की देखभाल कर रहा है और इससे पहले यह मंदिर पुलिस इस्तेमाल कर रही थी.
पेशावर के निवासी रमेश लाल ने बीबीसी को बताया कि यह मंदिर 50 सालों से बंद था और पुलिस ने उस पर कब्ज़ा कर लिया था और उन्हें पूजा के लिए दूसरे शहर जाना पड़ता था.
उन्होंने सरकार का आभार व्यक्त किया और कहा कि अब वे ख़ुश हैं कि पेशावर शहर में ही मंदिर में पूजा की अनुमति मिल गई है.

'मंदिर की चाबियाँ हिंदुओं को नहीं'

उन्होंने बताया कि हिंदू समुदाय को अभी तक मंदिर की चाबियाँ नहीं मिली हैं और सरकार को चाहिए कि वह मंदिर की चाबियाँ हिंदू समुदाय के हवाले कर दे ताकि मंदिर को फिर से आबाद किया जा सके.
रमेश
रमेशा के मुताबिक़ अगर चाबियाँ नहीं मिली तो वह अदालत में याचिका दायर करेंगे.
रमेश लाल का कहना था कि इस वक़्त मंदिर की हालत बहुत ख़राब है और अब तक मंदिर में पूजा शुरू नहीं हो सकी है, क्योंकि चाबियाँ प्रशासन के पास हैं.
उन्होंने कहा कि वे मंदिर की चाबियाँ हासिल करने के लिए अदालत में याचिका दायर करेंगे और अगर चाबियाँ प्रशासन के पास होंगी तो हिंदू पूजा कैसे करेंगे.
मंदिर की चाबियों के सवाल पर एक अधिकारी ने बताया कि प्रशासन ने हिंदुओं को केवल पूजा की अनुमति होगी. इसके अलावा वे न अपने पास चाबियाँ रख सकते हैं और न ही कोई निर्माण का काम कर सकते हैं.
35 वर्षीय शादाब का कहना था कि उन्होंने इस मंदिर को हमेशा बंद देखा है और छोटी उम्र में उनकी इच्छा थी कि मंदिर को पूजा के लिए खोल दिया जाए और अब उनकी इच्छा पूरी हुई है.
पेशवार हाई कोर्ट ने तो मंदिर में हिंदुओं को पूजा की अनुमति दे दी है, लेकिन चाबियों का मामला अभी तक हल नहीं हो सका है.

पाक में हिंदुओं का पक्षपात का आरोप

शुक्रवार, 9 सितंबर, 2011 को 20:33 IST तक के समाचार

हिंदु
पाकिस्तानी सरकार हिंदु बाढ़ पीड़ितों के साथ भेदभाव कर रही है.
“हम खुले आसमान के नीचे तपती हुई धूप में बैठे हैं और उसकी वजह से हमारे बच्चे बीमार हो रहे हैं.”
यह शब्द मूमल नामक एक महिला के हैं जो सिंध के दक्षिणी शहर बदीन से 40 किलीमीटर की दूरी पर स्थित एक गाँव में भारी बारिश से प्रभावित हुए क़रीब सौ से अधिक हिंदू परिवारों में से एक हैं.
दक्षिणी शहर गोलाड़ची से बदीन से जाते हुए बाईं तरफ़ एक सड़क कड़यो घहंवर की ओर जाती है जिसके दोनों ओर बारिश का पानी किसी झील की तरह लग रहा है.
सड़क पर लोग मौजूद हैं और उनकी पोशाक से लगता है कि वह किसान हैं और उनका संबंध हिंदू समुदाय से है.

श्याम लाल, बाढ़ पीड़ित

"मैं मदद केलिए ज़िला प्रशासन के पास गया था लेकिन उन्होंने मदद करने के बजाए उलटा डाँट दिया और कहा कि किस से पूछ यह शिविर बनाया है."
सिंध प्रांत में पिछले दो हफ़्तों से लगातार बारिश हो रही है जिस की वजह से हज़ारों लोग प्रभावित हो गए हैं.
कड़यो घहंवर शहर में दाख़िल होते ही खुले मैदान में एक शिविर नज़र आया जिसमें कुछ तंबू लगे हुए थे और बच्चे, महिलाएँ और बूढ़े बैठे हुए थे.
उस शिविर की देखभाल श्याम लाल नामक एक युवा कर रहे थे. श्याम लाल ने बताया कि इस शिविर में सौ परिवार रह रहे हैं और दूसरे लोगों को नहीं रख सकते क्योंकि इतनी जगह नहीं है.

'कोई सुविधा नहीं'

उन्होंने शिविर में लगे तंबू की ओर इशारा करते हुए बताया कि उन्होंने यह तंबू किराए पर लिए हैं और पाँच हज़ार प्रति दिन किराया अदा करते हैं.
श्याम लाल ने कहा, “मैं मदद के लिए ज़िला प्रशासन के पास गया था लेकिन उन्होंने मदद करने के बजाए उलटा डाँट दिया और कहा कि किससे पूछकर यह शिविर बनाया है.”
उस शिविर में न तो पीने के साफ़ पानी की कोई व्यवस्था थी और और न ही शौचालय की कोई सुविधा थी. शौचालय की सुविधा न होने से तीन लोग बीमार हो गए और उनकी मौत हो गई.
शिविर में मौजूद मूमल नामक महिला ने बताया कि वह हिंदू हैं इसलिए स्थानीय राजनेता और प्रशासन उनकी कोई मदद नहीं कर रहे हैं जबकि वह मुसलमानों की सहायता कर रहे हैं.
कड़यो घहंवर में ग़ैर सरकारी संस्थाएँ भी राहत कार्य में व्यस्त हैं लेकिन स्थानी हिंदू समुदाय को उनसे भी शिकायत है कि वह भी स्थानीय प्रशासन के कहने पर काम कर रहे हैं और उनकी मदद नहीं कर रहे हैं.

पाक में हिंदू समुदाय की मुश्किलें

 मंगलवार, 1 नवंबर, 2011 को 16:46 IST तक के समाचार

धन बाई
धन बाई की 21 वर्षीय बेटी तीन साल पहले ग़ायब हो गई थी और अब तक वापस नहीं आई है.
“मैं बहुत मुश्किलों का सामना कर रही हूँ और मन करता है कि खिड़की से कूद पर अपनी जान दे दूँ.”
यह शब्द 52 वर्षीय धन बाई के हैं जो कराची के लयारी इलाक़े में एक कमरे के फ्लैट में अपनी दो बेटियों और पति के साथ रहती हैं.
धन बाई पाकिस्तान के उन सैंकड़ों हिंदू माताओं में से हैं जिन की बेटियों को मुसलमान बनाकर उनकी जबरन शादी कर दी जाती है.
तीन साल पहले धन बाई की 21 वर्षीय बेटी बानो घर से अचानक ग़ायब हो गई थी और फिर परिवार को पता चला कि वह मुसलमान बन चुकी है और उसकी शादी हो गई है.
बानो ने मैट्रिक परीक्षा पास करने के बाद एक ग़ैर सरकारी संस्था में काम करना शुरु कर दिया था और घर का ख़र्च चलाने में अपने पिता की मदद करती थी.
बानो की माता धन बाई ने बीबीसी से बातचीत करते हुए कहा, “मेरी बेटी को कुछ लोग ले गए और हम उस मुक़दमे में इतने फंसे हैं कि अब घर चलाना भी मुश्किल हो गया है.”
उन्होंने बताया कि उनका जीवन बहुत मुश्किल में बीत रहा है और उन का मन करता है कि नदी में डूब जाए या फिर खिड़की से कूद कर अपनी जान दे दे.

'जबरन शादी और धर्म परिवर्तन'

"बानो ने एक दिन मुझे कहा कि अम्मी मैं नौकरी करना चाहती हूँ तो मैंने हाँ कह दी और वह अपना बोझ ख़ुद उठाने लगी. वह तो ग़रीबों की मदद करने जाती थी, क्या पता कि वह कभी वापस भी नहीं आएगी"
धन बाई, लड़की की माँ
कराची हिंदू पंचायत के मुताबिक़ हर महीने 20 से 22 ऐसे मामले सामने आते हैं जिसमें लड़कियों को मुसलमान बनाया जाता है और फिर उनकी जबरन शादी की जाती है.
धन बाई पिछले तीन सालों से अपनी बेटी की राह देख रही हैं और अदालतों के चक्कर काट रही हैं लेकिन तीन सालों के भीतर वह अपनी बेटी बानो को एक बार भी नहीं देख सकी हैं.
उन्होंने कहा, “बानो ने एक दिन मुझे कहा कि अम्मी मैं नौकरी करना चाहती हूँ तो मैंने हाँ कह दी और वह अपना बोझ ख़ुद उठाने लगी. वह तो ग़रीबों की मदद करने जाती थी, क्या पता कि वह कभी वापस भी नहीं आएगी.”
धन बाई ने कहा कि “मेरी बेटी से बात भी नहीं होती है, वो कहाँ है, वो कहीं है भी या नहीं या उसको मार दिया गया, हमें कुछ पता नहीं हैं.”
बेटी की याद ने धन बाई को बीमार कर दिया है और अपनी दो बेटियों लक्ष्मी और श्रद्धा की भी चिंता है कि कहीं वह भी घर न निकल जाएँ.
उनके पति बुधाराम लालजी का भी मन अब काम में नहीं लगता है.
बुधाराम लालजी अदालतों के चक्कर काट कर थक गए हैं और उन्होंने बीबीसी से बातचीत करते हुए कहा, “हम अदालतों के चक्कर काट कर थक गए हैं और हमने अदालत से कहा है कि एक बार तो हमारी बेटी को सामने लाया जाए और अगर वह ख़ुद कहे कि वह मुसलमान होकर ख़ुश है तो हम कभी भी उसके पीछे नहीं जाएंगे.”
बुधाराम लालजी एक स्थानीय कंपनी में ड्राइवर हैं और उनको इतना वेतन नहीं मिलता कि वह अपने बच्चों का पेट पाल सकें.

'बाप भी मुश्किल में'

उन्होंने कहा, “हमें कुछ पता नहीं है कि कब हमारा मुक़दमा ख़त्म होगा और कब अपनी बेटी से मुलाक़ात होगी. हम बहुत तंग हो चुके हैं और कहाँ जाएँ, मुक़दमों का सामना करें या बच्चों का पेट पालें.”
मुफ़्ती नईम
धार्मिक संगठन कहते हैं कि लड़के-लड़कियाँ ख़ुद उनके पास धर्म परिवर्तन के लिए आ रहे हैं
कराची हिंदू पंचायत के अध्यक्ष अमरनाथ ने बताया कि जबरन शादी और धर्म-परिवर्तन पाकिस्तान में हिंदू समुदाय का सबसे बड़ी समस्या है.
उन्होंने कहा कि हिंदू समुदाय की कम उम्र लड़कियों को घरों से निकाला जाता है और उन्हें झांसा दिया जाता है. उनकी शिकायत है कि इन मामलों में न तो सरकार मदद करती है और न ही पुलिस.
उन्होंने कहा, “आजकल इन मामलों में इस्लामी धार्मिक गुटों के लोग लिप्त हैं और इस्लामी मदरसों के छात्र भी ऐसा कर रहे हैं. शहर के बड़े मदरसे मुसलमान होने का प्रमाण पत्र जारी कर देते हैं.”
अमरनाथ ने बताया कि सबसे बड़ी समस्या यह है कि जब यह मामला सामने आता है तो सब लोग ख़ुश हो जाते हैं, पड़ोसी है तो वह भी ख़ुश हो जाता है कि एक और मुसलमान हो गया.
उन्होंने कहा कि हिंदू समुदाय को घरों से निकालना और उन्हें मुसलमान करना एक योजना के तहत हो रहा है.

'मरदसे लिप्त नहीं'

कराची के एक बड़े मदरसे जामिया बिनोरिया के अध्यक्ष मुफ़्ती नईम ने बीबीसी से बातचीत करते हुए कहा कि उनके मदरसे के छात्र या धार्मिक संगठन के लोग हिंदू लड़कियों को मुसलमान बनाने में लिप्त नहीं हैं.
उन्होंने कहा कि पिछले दो महीनों के भीतर उनके पास 200 से ज़्यादा लड़के और लड़कियाँ मुसलमान होने के लिए पहुंचे हैं और उनको किसी ने जबरन मुसलमान नहीं बनाया है.
उन्होंने कहा कि कोई ऐसा उदाहरण नहीं मिलता कि किसी हिंदू लड़की ने कहा हो कि उनको जबरन मुसलमान बनाया गया है बल्कि उनके माता पिता मरदसों पर आरोप लगाते हैं.
पाकिस्तान हिंदू परिषद के मुताबिक़ पाकिस्तान में हिंदूओं को जनसंख्या 70 लाख से ज़्यादा है जिसमें बड़ी संख्या सिंध प्रांत में रहती है.

Thursday, September 8, 2011

कांग्रेस सरकार के हाथो मे आतंकी तो सुरक्षित है किन्‍तु भारतीय नही

देश को आतंक के ऐसे खौफ़ नाक चेहरे से हमेशा रूबरू होना पड़ रहा है। हम मूक दर्शक होकर अपनो को मरने दे रहे है, इससे बड़ा राष्‍ट्रीय शर्म और क्‍या हो सकता है। अभी दिल्‍ली धमाको के सदमे से ऊबरी भी नही थी कि मीडिया हाऊसो को भेजे ईमेल के द्वारा भारत सरकार फिर से आंतकी हमलो की खुली चुनौ‍ती दी गई किन्‍तु अभी भी हम विचार मंथन से अतिरि‍क्त कुछ भी कदम उठा पाने के असक्षम है।

हम ऐसे आतंकियो को रोक पाने मे क्‍यो असक्षम है जबकि अमेरिका और इग्‍लैंड जैसे राष्‍ट्र 2001 और 2005 के प्रथम आतंकी हमलो के बाद कोई बड़ा हमला नही देखा किन्‍तु हमने संसद पर हमले के बाद 50 से अधिक आतंकी हमले झेले है और आज भी झेल रहे है। इसका क्‍या कारण है कि अमेरिका और इंग्‍लैण्‍ड ने फिर ऐसे दर्द नाक मंजर नही क्‍यो नही देखा क्‍योकि उनके देश मे आंतकियो को धर्म नही देखा जाता, आतंकियो को आन द स्‍पॉट उसके अंजाम पर पर पहुँचा दिया जाता है। परन्‍तु भारत की स्थिति भिन्‍न है भारत को सेक्‍युलर देश दिखाने के लिये आंतकियो को धर्म के नाम पर संगरक्षण दिया जाता है यही कारण है कि संसद पर हमले का मुख्‍य आरोपी अफ़जल गुरू और मुम्‍बई हमलो का एक मात्र जिन्‍दा अभियुक्त को कोर्ट से सजा-ए-मौत हो जाने के बाद भी हमारी सरकार ऐसे खतरनाक आतंकी को सिर्फ इसलिये संरक्षण दे रही है क्‍योकि वह मुस्लिम है और सरकार खुलकर हिन्‍दूवादी संगठनो को आंतकी घोषित करने पर तुली है। आतंकी का कोई धर्म नही होता है किन्‍तु इसे भी इग्‍नोर नही किया जा सकता है कि जितने भी आतंकी भारत तथा विश्‍व के अन्‍य देशो पर हमले किये है उनमे मुस्लिम ही निकलते है और तो और जहाँ भी मुस्लिम बहुल्य इलाके है वहाँ आंतकी गतिविधिया होती रहती है इससे चीन भी अछूता नही है।

आजादी के वक़्त और फिर उसके बाद आज तक कांग्रेस की 'मुसलमानों के प्रति तुष्‍टीकरण नीति' ने इस देश की खूब दुर्दशा कराई है... उपर से सच्‍चर जैसी कमेटी और सपोलो को दुग्‍धपान करने की नीति को पोषण देने की है। जिन लोको को हम आरक्षण के देकर तकनीकि शिक्षा दे रहे है वही तो ऐसी शिक्षा का उपयोग आतंकी गतिविधियो मे कर रहे है। आज भारत के समक्ष जितनी भी आतंकी गतिविधिया होती है हम चाह कर के भी उन पर लगाम इसलिये नही लगा पा रहे है क्‍योकि हमारी सरकार की सोच ही विभेद पूर्ण है वह आतंक को नही देखती वह आतंकी का धर्म देखती है। इन सब का श्रेय सिर्फ और सिर्फ कांग्रेस की 'मुस्लिम तुष्‍टीकरण' की राजनीति को जाता है... कांग्रेस की सत्‍ता लोलुप्‍ता नीति का ही परिणाम है कि हम आंतकी की खूनी चेहरा दशकों से देख रहे हैं और न जाने अभी और कब तक भोगते रहेंगे।

दिल्‍ली हाईकोर्ट मे बम विस्‍फोट मे सिर्फ 12 वकील और नागरिक मारे गये दिल्‍ली सरकार ने मौत की कीमत 4 लाख रूपये घोषित कर दी है यदि कल की तरीख़ मे ऐसा कोई हमला एक मात्र प्रधानमंत्री, सोनिया गांधी अथवा राहुल गांधी पर हुआ होता तो भारत के लिये आज का दिन सामान्‍य न होता, इन किसी की मौत पर आज भारत मे आपातकाल जैसी स्थिति देखने को मिल सकती थी। क्‍योकि इनकी जान की कीमत है और जनता तो कीड़े माकौड़े की तरह सिर्फ वोट देने के लिये बनी हुई है। राहुल गांधी को अस्‍पाताल मे राजनीति खेलते हुये शर्म नही आई कि जो परिवार मौत के सदमे मे थे वहाँ राहुल गांधी वोट बटोरने गये थे। गांधी परिवार की निजता निजता है और हम जनता को राहुल कभी भी किसी भी हालत मे देखने जा सकते है चाहे मरीज नग्‍न अवस्था मे ही क्‍यो न हो और देश की सुपर पीएम को क्‍या रोग है यह जानने का अधिकार जनता को नही है।


ढाका से आये हमारे प्रधानमंत्री का यह बयान कि हम आतंकियो से नही हारेगे जैसे आतंकियो और सरकार के बीच शतरंज का खेल हो रहा हो और जनता प्‍यादो की भाति पिटने के लिये है। अब समय है कि हम शासन को अपने हाथ मे ले क्‍योकि यह सरकार कही से भी किसी भी स्‍तर पर जन भावना के लिये काम करने के लिये विफल रही है। हमें सच स्‍वीकार करना होगा कि कांग्रेस नीत सरकार के हाथो मे आतंकी तो सुरक्षित है किन्‍तु भारतीय नही।

क्या आप कटती हुई गायों को बचाना चाहते है ?

प्रिय भारतवासियों,
उत्तर प्रदेश के बिजनेसमेन (व्यापारीगण) अब स्वचालित आधुनिक मशीन से युक्त कत्लखाने गायों को काटने के लिए बहुत जल्द बनाने जा रहे है ताकि गायों को तीव्र गति से काटा जा सके, उनके मांस को विदेशों में भेजा जा सके और उन्हें बहुत बड़ा लाभ प्राप्त हो सके | अगर ये लोग इसमें कामयाब हो जाते है तो फिर इन कत्लखानो की संख्या पूरे भारत में बहुत तेजी से बढ़ेगी | पूरे देश के लोग इन कत्लखानो को खोलने का पुरजोर विरोध कर रहे है और उत्तर प्रदेश की सरकार ने कहा है कि अगर एक करोड़ लोग भी कत्लखाने खोलने का विरोध करें और इस आन्दोलन की हिमायत करें तो स्वचालित आधुनिक मशीन से युक्त कत्लखाने खोलने की इजाजत व्यापारियों को नहीं दी जाएगी|
हम गायों की पूजा करते है | भारतीय होने के नाते और मानवता के नाते हम ऐसा होते हुवे हरगिज नहीं देख सकते ................ कृपया आप अपना समर्थन अवश्य दें |
अगर आपको लगता है कि इस तरह के कत्लखाने नहीं खुलने चाहिए तो आप कृपा करके 0522-3095743 पर एक मिस कोल जरूर करे| एक घंटी बजने के बाद कोल अपने आप डिस-कनेक्ट हो जाएगी |
जिस तरह से आपने अन्ना हजारे के जन लोकपाल बिल के आन्दोलन को सफल बनाया उसी तरह से आप अपना समर्थन दें | इसमें आपका कोई खर्चा नहीं है, बल्कि आपके इस एक मिस कोल से प्रतिदिन कटने वाली हजारों लाखों गायें बच जाएगी |कृपया आप अपने मोबाइल से मिस्कोल जरूर करें और इसे जितने लोगों तक पंहुचा सके पहुचाये |
मैने मिस कोल कर दिया है ........ अब आपकी बारी है क्‍योकि क्‍या आप अपनी माँओ को कटते देख सकते है ?
अभी मिस कोल करे - नंबर है - 05223095743

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अच्छा लगा हो तो आगे प्रसार दीजिए, फॉरवर्ड कीजिये, और भारतीय भाषाओं में अनुवादित कीजिये, अपने ब्लॉग पर डालिए, मेरा नाम हटाइए, अपना नाम /मोबाईल नंबर डालिए| मुझे कोई आपत्ति नहीं है| मतलब बस इतना है कि ज्ञान का प्रवाह होते रहने दीजिये|
साभार - http://mahashakti।bharatuday।in/2011/09/blog-post.html महाशक्ति जी

Tuesday, September 6, 2011

आर्यावर्त लायें

 
ईसाइयत और इस्लाम ने जहां भी आक्रमण या घुसपैठ की, उन्होंने वहाँ की मूल संस्कृति को नष्ट कर दिया. लक्ष्य प्राप्ति में भले ही शताब्दियाँ लग जाएँ, ईसाइयत और इस्लाम आज तक विफल नहीं हुए. ईसा १० करोड़ से अधिक अमेरिकी लाल भारतीयों और उनकी माया संस्कृति को निगल गया. अब ईसा की भेंड़ सोनिया काले भारतीयों और उनकी वैदिक संस्कृति निगल रही है. जिन्हें देश, वैदिक सनातन धर्म और सम्मान चाहिए-हमारी सहायता करें.
ऐसे ईसाइयत और इस्लाम को संरक्षण देने वाले भारतीय संविधान के अनुच्छेदों २९(१) व ३९(ग) की भारतीय संविधान के अनुच्छेदों ६० व १५९ के अधीन शपथ लेकर दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ व १९७ के अधीन सोनिया के लिए लूट, हत्या और बलात्कार के संरक्षण हेतु चाकरी करने वाली प्रतिभा, प्रदेशों के राज्यपाल और भारतीय संविधान को बनाये रखने की शपथ लेने वाले भ्रष्ट जज वैदिक सनातन धर्म और मानव जाति के शत्रु हैं.
४ मस्जिदों में धमाके के कारण हम भगवा आतंकवादी हैं. और १०८ मंदिर तोड़ने वालो की संरक्षक सोनिया सरकार आतंकवादी नहीं! दूध की धुली है. हमारे पास भारतीय दंड संहिता की धारा १०२ के अधीन प्राइवेट प्रतिरक्षा का अधिकार है. यद्यपि भारतीय संविधान का अनुच्छेद ३१ बदला भी गया और लुप्त भी हुआ, लेकिन उपरोक्त धारा आज भी प्रभावी है. जिन मस्जिदों से हमारे ईश्वर को गाली दी जाती है और जिन पुस्तकों कुरान व बाइबल में हमें कत्ल करने की आज्ञा है, आप सहयोग दें, उन्हें हम नहीं रहने देंगे.
मात्र हम अभिनव भारत और आर्यावर्त सरकार के बागी ही ईसाइयत और इस्लाम को मिटा सकते हैं. सोनिया इसे जानती है, इसीलिए आतंकित है.
प्रेसिडेंट, प्रधानमंत्री और राज्यपाल सोनिया द्वारा मनोनीत मातहत व उपकरण है. लुटेरे संविधान का अनुच्छेद ३९(ग) व्यक्ति को सम्पत्ति का अधिकार ही नहीं देता. भारतीय संविधान को कोई भ्रष्टाचारी नहीं मानता.
जज व नागरिक दंड प्रक्रिया संहिता की धाराओं १९६ व १९७ के अधीन, सोनिया के मनोनीत, राज्यपालों द्वारा शासित हैं. अहिंसा, सांप्रदायिक एकता और शांति प्रक्रिया की आड़ में और भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) के संरक्षण में, ईसाइयत व इस्लाम - मिशन व जिहाद की हठधर्मिता के बल पर वैदिक संस्कृति को मिटा रहे हैं. वे हठधर्मी सिद्धांत हैं, "परन्तु मेरे उन शत्रुओं को जो नहीं चाहते कि मै उन पर राज्य करूं, यहाँ लाओ और मेरे सामने घात करो." (बाइबल, लूका १९:२७) और "और तुम उनसे (काफिरों से) लड़ो यहाँ तक कि फितना (अल्लाह के अतिरिक्त अन्य देवता की उपासना) बाकी न रहे और दीन (मजहब) पूरा का पूरा (यानी सारी दुनियां में) अल्लाह के लिए हो जाये." (सूरह अल अनफाल ८:३९). स्पष्टतः वैदिक सनातन धर्म मिटाना दोनों का घोषित कार्यक्रम है. यदि आप पलटवार में आर्यावर्त सरकार को सहयोग नहीं देंगे तो मानव जाति ही मिट जायेगी.
किसी गैर मुसलमान को जीने का अधिकार न मुसलमान देता है और न किसी उस व्यक्ति को जीने का अधिकार ईसाई देता है, जो ईसा को अपना राजा नहीं मानता. फिरस्वतंत्रताकैसे मिली यह पूछते ही या तो आप ईश निंदा में कत्ल हो जायेंगे या भारतीय दंड संहिता की धारा १५३ अथवा २९५ में जेल में होंगे. जज तो राज्यपाल का बंधुआ मजदूर है. अपराधी वह है, जिसे सोनिया का मातहत राज्यपाल अपराधी माने.

Monday, September 5, 2011

Minority voting right (धर्मयुद्ध में सहयोग दें.)

धर्मयुद्ध में सहयोग दें. 

पूर्व केंद्रीयमंत्री डा० सुब्रमण्यम स्वामी के विरोधी उत्तर दें.

जो लोग डा० स्वामी के विरुद्ध विष वमन कर रहे हैं, वे मेरे निम्नलिखित उत्तर को पढ़ कर सोचें!
काबा हमारी है, अजान गाली है, मस्जिद सेनावास हैं, जर्मनी सहित कई देशों ने नए मस्जिदों के निर्माण पर रोक लगा दी है और कुरान सारी दुनिया में फुंक रही है. धरती पर क्यों रहे इस्लाम?
आधुनिक दुर्गा साध्वी पूर्ण चेतनानंद की ललकार भायखला, मुंबई कारागार से!
भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) का संकलन कर वैदिक सनातन धर्म के अनुयायियों की धरती, देश, सम्पत्ति व नारियां उनसे चुरा कर संयुक्त रूप से मुसलमानों और ईसाइयों को सौँप दिया गया है. हमारे शासकों को यह स्वीकार भी है. अतएव मुसलमान और ईसाई लोगों को लड़ कर यह निर्णय कर लेना चाहिए कि विश्व पर अधिकार मुसलमानों का रहेगा या ईसाइयों का. यहाँ भी एक समस्या है. जीते चाहे कोई, रहेगा वह शासक (सोनिया) का दास ही! सूचना के अधिकार के अधीन मुझे बताया गया है कि वैदिक पंथियों को अपने वैदिक सनातन धर्म को बनाये रखने का कोई अधिकार नहीं है.
अहिंसा, सांप्रदायिक एकता और शांति प्रक्रिया की आड़ में ईसाइयत व इस्लाम मिशन व जिहाद की हठधर्मिता के बल पर वैदिक संस्कृति को मिटा रहे हैं. वे हठधर्मी सिद्धांत हैं, "परन्तु मेरे उन शत्रुओं को जो नहीं चाहते कि मै उन पर राज्य करूं, यहाँ लाओ और मेरे सामने घात करो." (बाइबल, लूका १९:२७) और "और तुम उनसे (काफिरों से) लड़ो यहाँ तक कि फितना (अल्लाह के अतिरिक्त अन्य देवता की उपासना) बाकी न रहे और दीन (मजहब) पूरा का पूरा (यानी सारी दुनियां में) अल्लाह के लिए हो जाये." (सूरह अल अनफाल ८:३९). वैदिक सनातन धर्म को मिटाना दोनों का संवैधानिक अधिकार, {भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१)}, ईश्वरीय आदेश व घोषित कार्यक्रम है. यदि ईसाइयत और इस्लाम हैं तो न वैदिक सनातन धर्म बचेगा और न मानव जाति. इस प्रकार ईसाइयत और इस्लाम खूनी मजहब हैं. भारतीय दंड संहिता की धारा ९६ के अधीन प्राइवेट प्रतिरक्षा में किया गया कोई कार्य अपराध नहीं है. पाठक को ऊपर उद्धृत खूनी मजहबों ईसाइयत और इस्लाम को मिटाने का भारतीय दंड संहिता की धारा १०२ के अधीन कानूनी अधिकार है. राज्य ही राज्य से लड़ सकता है. आर्यावर्त सरकार की स्थापना पाठक के प्राइवेट प्रतिरक्षा के लिए की गई है. पाठक आर्यावर्त सरकार को सहयोग दें, हम ईसाइयत और इस्लाम मिटायेंगे.
वस्तुतः हम अभिनव भारत और आर्यावर्त सरकार से जुड़े बागियों ने ज्ञान के वृक्ष का फल खा लिया है. हमारे लिए मूर्खों के वैश्यालय व मदिरालय नामक स्वर्ग का दरवाजा सदा के लिए बंद हो चुका है. {(बाइबल, उत्पत्ति २:१७) व (कुरान २:३५)}. हमें ज्ञात हो गया है कि भारतीय संविधान वैदिक सनातन धर्म सहित मानव जाति को मिटाने के लिए संकलित किया गया है. भारत में मुसलमानों और ईसाइयों को इसलिए रोका गया है कि दोनों ने स्वेच्छा से शासकों की दासता स्वीकार कर ली है. ऐसे भयानक भारतीय संविधान का १९५० से आज तक किसी ने विरोध नहीं किया. हमारा कथन है कि यदि आप अपनी, अपने देश व अपने वैदिक सनातन धर्म की रक्षा करना चाहते हैं तो समस्या की जड़ ईसाइयत और इस्लाम के पोषक भारतीय संविधान को, निजहित में, मिटाने में हमारा सहयोग कीजिए.
मै डेनिअल वेबस्टर के कथन से पूरी तरह सहमत हूँ, हमको मिटाने के लिए किसी भी राष्ट्र के पास शक्ति नहीं है. हमारा विनाश, यदि आएगा तो वह दूसरे प्रकार से आएगा. वह होगा सरकार के षड्यंत्र के प्रति जनता की लापरवाही. ... मुझे भय है कि जनता अपने उन लोकसेवकों पर अत्यधिक विश्वास करेगी, जिन्हें स्वयं अपने ही सर्वनाश के लिए (सोनिया द्वारा) हथियार बना लिया गया है.

अजान क्या है?

यह एक बड़ी ग़लतफ़हमी है जो अज़ान के बोले जाने वाले शब्द अकबरका अर्थ जानने की वजह से पैदा हुई है। यह शब्द रोज़ाना पांच बार, मस्जिदों से ऊंची आवाज़ में अज़ानके दौरान सुना जाता है। अज़ान देकर लोगों को पुकारा, बताया, बुलाया जाता है कि नमाज़ का निर्धारित समय गया, सब लोग उपासना स्थल(?) (मस्जिद) में जाएं।
पूरे अजान को नीचे पढ़ें और बताएं कि यदि मात्र अल्लाह कि पूजा हो सकती है, तो पाठक की उपासना की आजादी, सहअस्तित्व और साम्प्रदायिक सद्भाव कहाँ है? हमसे राम राज्य और आजादी का वादा किया गया है, हम अल्लाह की पूजा क्यों करें?

~अजान~

यहां पूरी अज़ान के बोल उल्लिखित कर देना उचित महसूस होता है :
अल्लाहु अकबर-अल्लाहु अकबर (दो बार), अर्थात् अल्लाह सबसे बड़ा है।
अश्हदुअल्ला इलाह इल्ल्अल्लाह (दो बार), अर्थात् मैं गवाही देता हूं कि अल्लाह के सिवाय कोई पूज्य, उपास्य नहीं।
अश्हदुअन्न मुहम्मदुर्रसूलुल्लाह (दो बार), अर्थात् मैं गवाही देता हूं कि (हज़रत) मुहम्मद (सल्ल॰) अल्लाह के रसूल (दूत, प्रेषित, संदेष्टा, नबी, Prophet) हैं।
हय्या अ़लस्-सलात (दो बार), अर्थात् ‘(लोगो) आओ नमाज़ के लिए।
हय्या अ़लल-फ़लाह (दो बार), अर्थात् ‘(लोगो) आओ भलाई और सुफलता के लिए।
अस्सलातु ख़ैरूम्-मिनन्नौम (दो बार, सिर्फ़ सूर्योदय से पहले वाली नमाज़ की अज़ान में), अर्थात् नमाज़ नींद से बेहतर है।
अल्लाहु अकबर-अल्लाहु अकबर (एक बार), अर्थात् अल्लाह सबसे बड़ा है।
ला-इलाह-इल्ल्अल्लाह (एक बार), अर्थात् कोई पूज्य, उपास्य नहीं, सिवाय अल्लाह के।
हमारी कठिनाई यहाँ से प्रारम्भ होती है कि दास मुसलमान अपनी दासता गैर-मुसलमान पर आरोपित करना अपना मजहबी दायित्व मानते हैं. अपने अजान द्वारा ईमाम(मुअज्जिन) गैर-मुसलमान को उपरोक्त अजान के पंक्तियों के अनुसार दिन में लाउड स्पीकर से कम से कम १५ बार चेतावनी देते हैं कि हमारा ईश्वर झूठा है. ईश्वर पूजा के योग्य नहीं है. क्या मुसलमान यह बताएंगे कि मुहम्मद के चित्र बना देने वाले को कत्ल करने वालों को हमारे ईश्वर का अपमान करने का अधिकार कहाँ से प्राप्त हुआ? हम मुसलमानों को कत्ल क्यों न करें?
सबको दास बनाना और स्वयं दास बनना ईसाइयत (बाइबल, उत्पत्ति २:१७) और इस्लाम (कुरान २:३५) के मूर्ख अनुयायियों की फितरत है. एकेश्वरवाद के अनुसंधान का यही कारण है. मूसा एकेश्वरवाद का जनक है. मसीह ईसा और मुहम्मद तो नकलची हैं. जेहोवा और अल्लाह से क्रमशः मूसा और मुहम्मद ही मिल सकते हैं. इस प्रकार धूर्त पैगम्बरों ने मानव मात्र को दास बनाने की अनूठी विधि ढूंढ रखी है. यहूदी मूसा का दास है और मुसलमान मुहम्मद का. जो दास नहीं बनता उसे पैगम्बर लूट और नारी बलात्कार का लोभ देकर कत्ल कराते हैं. इस प्रकार ईसाइयत और इस्लाम मानव मात्र को दास बनाने के अमोघ अस्त्र है, पैगम्बर तो रहे नहीं-उत्तराधिकार शासकों और पुरोहितों को सौँप गए हैं.
पाठक का सामना किसी ऐसे समूह से हो जाए, जिसके देवता का पेशा चोरी का कार्य (कुरआन ८:१, ४१ व ६९) है. जिसने अपने अनुयायी मुसलमानों पर युद्ध अनिवार्य कर दिया है| (कुरआन २:२१६) आतंक (कुरआन ८:१२) और नारियों के बलात्कार (कुरआन ४:२४ व २३:६) की छूट दे रखी है | जिस समूह का पूज्य देवता सगर्व कहता है कि वह हत्यारा है| (कुरआन ८:१७). लूट के माल का स्वामी है, (कुरआन ८:१) लूट के माल को पवित्र बताता है, (कुरआन ८:६९), मुसलमान समाज में लूट का बंटवारा करता है, (कुरआन ८:४१) प्रतिज्ञाऐ तोड़ता है, (कुरआन ६६:२) जिसने मुहम्मद का निकाह मुहम्मद की ही पुत्रवधू से कराया था | (कुरआन,३३:३७-३८). जो मुसलमानों द्वारा गैर-मुसलमान नारियों का बलात्कार निंदनीय नहीं मानता है (कुरआन २३:६) अपितु इन कुकर्मो को करने वाले मुसलमानों को स्वर्ग भेजता है, जहाँ ऐसे अपराधी मुसलमानों को हूरे व गिलमे मिलेंगे, (यानी अल्लाह और उसके अनुयायी असामाजिक तत्व हैं. जिन्हें धरती पर रहने का अधिकार नहीं है) तो क्या आप चुप बैठे रहेंगे? मुझे दुःख है कि आप चुप ही नहीं बैठे हैं, बल्कि लूट व यौन सुख के लोभ में और मुजाहिदों के हाथों मौत के भय से सच्चाई को सामने नहीं आने दे रहे हैं | आप मानवदोही क्यों नहीं हैं? भारतीय संविधान मुसलमान और ईसाई को समर्थन व संरक्षण दे रहा हैं| अतएव आतंकवादी मुसलमान, कसाब या अफजल नहीं, अल्लाह व मस्जिद का पौषक भारतीय संविधान हैं| अपराध करने वाले से अपराध सहन करने वाला अपराधी होता है. अतः अपराधी भारतीय संविधान का बहिष्कार करने में हमारा सहयोग करें|
आप से स्वतंत्रता और रामराज्य का वादा किया गया था. आप को सोनिया के रोम राज्य की चाकरी करते लज्जा क्यों नहीं आती? भारतीय संविधान ने आप को उपासना की स्वतंत्रता दी है. ईमाम(मुअज्जिन) मात्र अल्लाह की पूजा करने की मस्जिदों से बांग लगाते हैं. स्वयं अल्लाह के दास हैं. आप को दास बनाने के लिए ललकारते हैं. अपने इष्ट देवता व संस्कृति का अपमान सहन करते आप को लज्जा क्यों नहीं आती?
अज़ान यद्यपि सामूहिक नमाज़ के लिए बुलावाहै, फिर भी इसमें एक बड़ी हिकमत यह भी निहित है कि अजान मानव मात्र को पैगम्बर या शासकों का दास बनाता है.
हमारे वैदिक सनातन धर्म में कोई पाप क्षमा नहीं होता. दूसरे की धन-धरती लूटने, कत्ल करने और नारी बलात्कार की सुविधा नहीं है. हमारा ईश्वर आप को उपासना, सम्पत्ति और जीवन का अधिकार देता है. आप को दास नहीं बनाता. पशु-पक्षी तक को अपनी स्वतंत्रता प्रिय है. हम आप को धूर्त पैगम्बरों द्वारा छीना गया यही ‘स्वतंत्रता’ का अनमोल रत्न वापस देना चाहते हैं.
अल्लाह व उसके इस्लाम ने मानव जाति को दो हिस्सों मोमिन और काफ़िर में बाँट रखा है. धरती को भी दो हिस्सों दार उल हर्ब और दार उल इस्लाम में बाँट रखा है. (कुरान ८:३९) काफ़िर को कत्ल करना व दार उल हर्ब भारत को दार उल इस्लाम में बदलना मुसलमानों का मजहबी अधिकार है.
हम इसलिए लड़ रहे हैं कि आप धूर्त पुरोहितों और शासकों के दास न बनें. मुसलमान और ईसाई आप की आँखों के सामने आप की नारियों का बलात्कार न करने पायें. आप के घर न लूट लिए जाएँ और आप कत्ल न कर दिए जाएँ. हम आतताई अल्लाह व जेहोवा को भगवान मानने के लिए तैयार नहीं हैं. और न कुरान व बाइबल को धर्म पुस्तक स्वीकार करते हैं. हम भारतीय संविधान, कुरान व बाइबल को मानवता का शत्रु मानते हैं. जो ऐसा नहीं मानता, वह दया का पात्र है.
मुसलमान इतिहासकार सगर्व लिखते हैं कि मुहम्मद ने कितने शांतिप्रिय नागरिकों को कत्ल किया. कितने मंदिर तोड़े. कितनी अबला नारियों के गहने लूटे, उनके सगे-सम्बन्धियों को कत्ल किया और उसी रात उनका बलात्कार किया. लेकिन जब सर्बो ने मुसलमान नारियों का बलात्कार किया और जब लेबनान के नागरिक ठिकानों पर इजराएल ने बमबारी की तो मुसलमानों को मानवाधिकार याद आ गया. अफगानिस्तान और इराक पर अमेरिकी आधिपत्य से मुसलमान आतंकित हैं. लेकिन मुसलमान भूल गए हैं कि अल्लाह ने मुसलमानों को सृष्टि सौँप रखी है (कुरान २:२५५) और ईसा ने ईसाइयों को हर उस व्यक्ति को कत्ल करने का अधिकार दे रखा है, जो ईसा को अपना राजा स्वीकार नहीं करता. (बाइबल, लूका १९:२७). मुसलमान विचार करें कि तब क्या होगा, जब ईसाई मुसलमानों को कत्ल कर विश्व के सभी इस्लामी राज्यों पर आधिपत्य जमा लेंगे? अकेले इजराएल से तो मुसलमान निपट नहीं पाए, सभी ईसाई राज्यों से मुसलमान कैसे निपटेंगे?
ईसाइयत और इस्लाम में आस्था व्यक्त (दासता स्वीकार) करिये, चाहे जिस नारी का बलात्कार कीजिये. [(बाइबल, याशयाह १३:१६) व (कुरान २३:६)] जिसकी भी चाहें सम्पत्ति लूटिये [(बाइबल, व्यवस्थाविवरण २०:१४) व और जिसे भी चाहिए अपनी तरह दास बनाइए. न बने तो कत्ल कर दीजिए. मूर्खों और दासों के वैश्यालय व मदिरालय नामक स्वर्ग का दरवाजा सदा के लिए खुला है. {(बाइबल, उत्पत्ति २:१७) व (कुरान २:३५)}.

आजादी नहीं दासता हेतु.

अमेरिकी, संयुक्त राष्ट्र और भारतीय संविधान ने आप को उपासना की स्वतंत्रता दी है. ईमाम(मुअज्जिन) मात्र अल्लाह की पूजा करने की मस्जिदों से बांग लगाते हैं. इस्लाम का शाब्दिक अर्थ समर्पण है. जहां हम वैदिक पंथी आजादी के लिए लड़ते हैं, वहीं मुसलमान धरती पर मानव मात्र की दासता के स्थापना के लिए निरीहों की जान लेते हैं. स्वयं अल्लाह के दास हैं. आप को दास बनाने के लिए ललकारते हैं. अपने इष्ट देवता व संस्कृति का अपमान सहन करते आप को लज्जा क्यों नहीं आती?
दासता को पुष्ट करने के लिए नागरिक के सम्पत्ति को छीना जाना आवश्यक है. अतएव संविधान के अनुच्छेद २९(१) का संकलन कर ईसाइयत और इस्लाम को अपने लूट, हत्या, बलात्कार और धर्मान्तरण की संस्कृति को बनाये रखने का मौलिक अधिकार दिया गया है. इसके अतिरिक्त राज्यपालों और प्रेसिडेंट को भारतीय संविधान के संरक्षण, संवर्धन व पोषण का अनुच्छेदों १५९ व ६० के अंतर्गत भार सौंपा गया है. लोकसेवकों को संरक्षण देने के लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ बनाई गई है. जो भी लूट का विरोध करे उसे उत्पीड़ित करने की भी दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अंतर्गत व्यवस्था की गई है.
अज़ान के ये बोल १४०० वर्ष से अधिक पुराने हैं। भारत में ही नहीं, पूरी दुनिया में नमाज़ियों को मस्जिद में बुलाने के लिए लगभग डेढ़ हज़ार साल से निरंतर यह आवाज़ लगाई जाती रही है। इस्लाम की स्थापना के बाद से इस दास धर्म का एक भी विरोधी नहीं पैदा हुआ. आप लोग यह युद्ध नहीं लड़ सकते. धरती पर एक से बढ़ कर एक त्रिकालदर्शी, योद्धा, चिन्तक, समाज सुधारक और बुद्धिमान पैदा हुए, लेकिन, मालेगांव व अन्य मस्जिदों पर विष्फोट के अभियुक्त और जेल में निरुद्ध, जगतगुरु श्री अमृतानंद के अतिरिक्त किसी ने भी ईसाइयत और इस्लाम का विरोध नहीं किया. उनके आशीर्वाद से हम आप के लिए लड़ रहे हैं.
जब ईमाम(मुअज्जिन) मस्जिदों से लाउडस्पीकर पर अजान चिल्लाता है कि मात्र अल्लाह की पूजा हो सकती है, तब वह स्पष्टतः, ईसाइयत सहित, गैर-मुसलमान के आराध्य देवों का अपमान करता है. गैर-मुसलमान के धार्मिक भावनाओं को आहत करता है. इस प्रकार अजान भारतीय दंड संहिता की उपरोक्त धारा २९५क के अनुसार पाठक के विरुद्ध किया जाने वाला दंडनीय अपराध है.
बिना राज्यपाल के संस्तुति के जज सुनवाई नहीं कर सकता. आम नागरिक शिकायत नहीं कर सकता. चूंकि इस कानून के बनने के बाद से आज तक किसी राज्य ने किसी मस्जिद या ईमाम(मुअज्जिन) के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा २९५अ के अंतर्गत कोई अभियोग नहीं चलाया, अतएव सोनिया द्वारा मनोनीत उप राज्यपाल महामहिम श्री तेजेन्द्र खन्ना का राज्य ईमामों व मस्जिदों को संरक्षण देने का अपराधी है और सर्वोच्च न्यायालय ईमाम(मुअज्जिन) को वेतन दिलवाने का अपराधी. (एआईआर, एस सी १९९३, २०८६). सोनिया गैर-मुसलमान की हत्या कराने पर तुली हुई है.
मस्जिदों से ईमामों के खुतबों को ध्यान पूर्वक सुनिए. ईमामों को कुरान के आदेशों को तोड़ मरोड़ कर पेश करने की भी आवश्यकता नहीं. भारतीय संविधान के अनुच्छेद २७ का उल्लंघन कर आप के कर से प्राप्त १० अरब रुपयों में से वेतन लेकर ईमाम बदले में कुरान के सूरह अनफाल (८) की सभी मुसलमानों को सीधी शिक्षा देते हैं. (एआईआर, एससी, १९९३, प० २०८६). अजान द्वारा ईमाम(मुअज्जिन) स्पष्ट रूप से गैर-मुसलमानों को चेतावनी देते हैं कि मात्र अल्लाह की पूजा हो सकती है. खुतबे कुरान के सूरह अनफाल (८) में स्पष्ट दिए गए हैं. अल्लाह निश्चय रूप से कहता हैं कि उसने मुसलमानों को जिहाद के लिए पैदा किया है, युद्ध (जिहाद) में लूटा हुआ माल, जिसमे नारियां भी शामिल हैं, अल्लाह और मुहम्मद का है. (कुरान ८:१, ४१ व ६९). जान लो जो भी माल लूट कर लाओ, उसका ८०% लूटने वाले का है. शेष २०% अल्लाह, मुहम्मद, ईमाम, खलीफा, मौलवी, राहगीर, यतीम, फकीर, जरूरतमंद आदि का है. (कुरआन ८:४१). लूट ही अल्लाह यानी सत्य है. लूट में विश्वास करने वाले विश्वासी हैं. (कुरआन ८:२). विश्वासी लूट के लिए घर छोड़ देते हैं, (कुरआन ८:५). मै गैर-मुसलमानों में भय पैदा करता हूँ. तुम अंतिम गैर-मुसलमान को मिटा दो. (कुरआन ८:७). गैर-मुसलमानों के गले काटो, उनके हर जोड़ पर वार करो और उनको असहाय कर दो. क्यों कि वे अल्लाह के विरोधी हैं, (कुरआन ८:१२). जो भी अल्लाह और मुहम्मद के आदेशों का उल्लंघन करता है, वह जान ले कि अल्लाह बदला लेने में अत्यंत कठोर है. (कुरआन ८:१३). काफ़िर के लिए आग का दंड है. (कुरआन ८:१४). जब काफिरों से लड़ो तो पीठ न दिखाओ. (कुरआन ८:१५). तुमने नहीं कत्ल किया, बल्कि अल्लाह ने कत्ल किया. (कुरआन ८:१७). मुसलमानों को लड़ाई पर उभारो. (कुरआन ८:६५). तब तक बंधक न बनाओ, जब तक कि धरती पर खून खराबा न कर लो. (कुरआन ८:६७). जो भी लूट का माल तुमने (मुसलमानों ने) प्राप्त किया है, उसे परम पवित्र मान कर खाओ. (कुरआन ८:६९). सत्य स्पष्ट है. काफिरों को आतंकित करने व समाप्त करने के लिए मुसलमानों में जोश पैदा करते हुए अल्लाह कहता है, जब तुम काफिरों से लड़ो, तो उनको इस तरह परास्त करो कि आने वाले समय में उन्हें चेतावनी मिले. काफ़िर यह जान लें कि वे बच नहीं सकते. (कुरआन ८:६०). कुरान वर्णित उपरोक्त आदेशों से क्या आप को नहीं लगता कि भारत के बंटवारे व कश्मीर की मांग, हिंदू जाति संहार, नारियों के बलात्कार आदि के लिए अल्लाह उत्तरदायी है, मुसलमान नहीं?
दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन राज्य अजान व खुतबों को अपराध नहीं मानता. लेकिन अजान का विरोध करना भारतीय दंड संहिता की धारा १५३अ व २९५अ के अंतर्गत दंडनीय अपराध है. मेरे विरुद्ध उपरोक्त धाराओं के अधीन ५० अभियोग पंजीकृत हुए, जिनमे से ६ आज भी लम्बित हैं, यह अभियोग मस्जिद, चर्च, ईसाइयत और इस्लाम, अजान, बाइबल, कुरान और भारतीय संविधान का विरोध करने के कारण चल रहे हैं. उप राज्यपाल महामहिम श्री तेजेन्द्र खन्ना की सरकार, वैदिक सनातन धर्म और आर्य जाति का, अपने संरक्षण में, भारतीय दंड संहिता की धारा २९५अ के अंतर्गत खूनी अल्लाह व उसके इस्लाम द्वारा किये गए अपराधों को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन संरक्षण देकर, विनाश करा रही है.
मस्जिदों से हमारे वैदिक सनातन धर्म का और ईश्वर का, दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन सरकार द्वारा दिए गए संरक्षण में, अपमान होता है, मुहम्मद के कार्टून बनाने पर ईशनिंदा के लिए मौत का फतवा देने वाले सरकारी संरक्षण में अजान द्वारा हमारे ईश्वर का अपमान क्यों करते हैं? ईश निंदा के अपराध में हम मुसलमानों को कत्ल क्यों न करें? हमसे उपासना की स्वतंत्रताका वादा किया गया है, ईमाम(मुअज्जिन) मस्जिदों से, "ला इलाहलिल्लाहू मुहम्मद्दुर रसुल्ल्लाहू" क्यों चिल्लाते हैं? हम अल्लाह के उपासना की दासता क्यों स्वीकार करें? ईश्वर का अपमान कराने वाली सरकार को सत्ता में रहने का अधिकार नहीं.
जजों ने मानवता के हत्यारों जेहोवा अल्लाह को ईश्वर घोषित कर रखा है. कुरान बाइबल को धर्मपुस्तक घोषित कर रखा है. (एआईआर, कलकत्ता, १९८५, प१०४). इस्लाम के लिए आप काफ़िर हैं. इस्लाम है तो काफ़िर नही. हम आप के लिए लड़ रहें हैं और आप लोग अपने सर्वनाश की जड़ चर्चों, मस्जिदों और इस्लाम को बचाने के लिए हमें प्रताडित कर रहे हैं.
पन्थनिरपेक्ष सोनिया वैदिक सनातन धर्म को मिटा रही है और आप की आर्यावर्त सरकार धर्म की स्थापना हेतु भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) मिटाएगी. किसके साथ हैं आप?
देश की छाती पर सवार सोनिया ने निम्नलिखित शपथ ली हुई है:-
“… मै यह भी प्रतिज्ञा करती हूँ कि जब भी अवसर आएगा, मै खुले रूप में पंथद्रोहियों से, फिर वे प्रोटेस्टैंट हों या उदारवादी, पोप के आदेश के अनुसार, युद्ध करूंगी और विश्व से उनका सफाया करूंगी और इस मामले में मै न उनकी आयु का विचार करूंगी, न लिंग का, न परिस्थिति का. मै उन्हें फांसी पर लटकाऊंगी, उन्हें बर्बाद करूंगी, उबालूंगी, तलूंगी और (उनका) गला घोटूंगी| इन दुष्ट पंथ द्रोहियों को जिन्दा गाडून्गी| उनकी स्त्रियों के पेट और गर्भाशय चीर कर उनके बच्चों के सिर दीवार पर टकराऊँगी, जिससे इन अभिशप्त लोगों की जाति का समूलोच्छेद हो जाये| और जब खुले रूप से ऐसा करना सम्भव न हो तो मै गुप्त रूप से विष के प्याले, गला घोटने की रस्सी, कटार या सीसे की गोलियों का प्रयोग कर इन लोगों को नष्ट करूंगी| ऐसा करते समय मै सम्बन्धित व्यक्ति या व्यक्तियों के पद, प्रतिष्ठा, अधिकार या निजी या सार्वजनिक स्थिति का कोई विचार नहीं करूंगी| पोप, उसके एजेंट या जीसस में विश्वास करने वाली बिरादरी के किसी वरिष्ठ का जब भी, जैसा भी निर्देश होगा, उसका मै पालन करूंगी|
जो लोग स्वयं अपनी रक्षा नहीं कर सकते, वे उन लोगों की सहायता कर सकते हैं, जो उनके लिए लड़ रहे हैं। अन्यथा वे बचेंगे नहीं.